क्या की “आप” की प्रतिनिधि बन गई
स्पेशल जज न्याय बिंदु -
केजरीवाल को जमानत देना
महंगा पड़ सकता है मैडम -
जिस तरह आनन फानन में स्पेशल जज न्याय बिंदु ने केजरीवाल को जमानत देने का आदेश दिया, वह उन्हें किसी बड़ी मुसीबत में फंसा सकता है - अपने आदेश में जो बातें न्याय बिंदु ने कही, वह बातें केजरीवाल के वकील और “आप” पार्टी कहती रही है
न्याय बिंदु को इस मामले में हाथ डालना ही नहीं चाहिए था क्योंकि केस के सुनवाई स्पेशल जज कावेरी बवेजा कर रही थी जो MP - MLA कोर्ट के मामलों के लिए मनोनीत हैं -
एक बात स्पेशल जज बिंदु ने कही जो सबसे ज्यादा आपत्तिजनक है कि हजारो पन्नों का रिकॉर्ड पढ़ने का किसके पास टाइम है और जमानत पर छोड़ दिया जैसे छोड़ने की कीमत पकड़ रखी थी वरना तो पढ़ने देती सब कुछ कावेरी बवेजा को - आपको किसने कहा था कि आज ही आदेश देना है और आपके आदेश से “आपिए” तो ऐसे खुश हुए जैसे स्पेशल जज बिंदु ने कोई ऐसा बिंदु पकड़ लिया जिससे केजरीवाल को जमानत देना जरूरी हो गया और उसे जमानत नहीं मिली बल्कि वो तो “बरी” हो गया आरोपों से -
बड़ा रिकॉर्ड पढ़ने की बात कावेरी बवेजा ने भी की थी जब उन्होंने ED के आरोपपत्र पर संज्ञान लेना था और इसलिए उन्होंने order की तारीख 9 जुलाई कर दी यानी एक महीना बाद ना कि तुरंत संज्ञान लेने के आदेश कर दिया जैसे बिंदु ने जमानत देने के कर दिए तुरंत -
न्याय बिंदु को इतना भी पता नहीं कि केजरीवाल ने हाई कोर्ट में ED के सामने पेश होने की शर्त लगाईं थी कि उसकी गिरफ़्तारी न हो लेकिन उन्होंने मानी नहीं और ED द्वारा सबूत दिखाने पर यहां तक कहा कि इसे अभी तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया - और शाम को उसी दिन ED ने गिरफ्तार कर लिया -
न्याय बिंदु ने इस बात से भी आंखें मूंद ली कि हाई कोर्ट की जज स्वर्णकांता शर्मा ने सिसोदिया को मई में जमानत देने से मना करते हुए कहा था कि सिसोदिया एक Powerful व्यक्ति हैं जो सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं और गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं - केजरीवाल तो जब सिसोदिया से भी ज्यादा शक्तिशाली है, तो उसे तो जमानत मिलनी ही नहीं चाहिए फिर भी दी बिंदु मैडम ने -
न्याय बिंदु को यह भी याद नहीं रहा कि दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने केजरीवाल की गिरफ़्तारी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए कहा कि ED ने कानून का पालन किया है लेकिन बिंदु जी सारा कुसूर ED का बता रही थी -
न्याय बिंदु ने केस की नज़ाकत को समझा ही नहीं और लगता है केजरीवाल गैंग से ट्यूशन पढ़ा हुआ था जो जमानत देते हुए शर्त लगाईं कि केजरीवाल जांच में बाधा नहीं डालेंगे - जो व्यक्ति ED के 9 summons पर पेश नहीं हुआ, उससे आप कैसे उम्मीद कर गई बिंदु कि वह जांच में बाधा नहीं डालेगा - 9 summons पर पेश न होना सबसे बड़ी बाधा पैदा करना था जांच में -
यह तो अच्छा हुआ कि आज ही ED ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील कर दी और कोर्ट ने जमानत पर रोक लगा दी - सबसे बड़ा सबूत न्याय बिंदु के “आप” से मिले हुए होने का यह है कि जब ED ने कहा कि हमें 2 दिन का समय दीजिए अपील करने के लिए तो उसे तुरंत खारिज कर दिया -कई मामलों में जब किसी को सजा होती है तो कुछ समय के सजा को निलंबित कर दिया जाता है जिससे वह अपील कर सके - बिंदु जी लगता है केजरीवाल गिरोह के किसी लालच में थी जो ED की कोई बात सुनना ही नहीं चाहती थी - लोग पूछ सकते हैं कितनी बक्शीश मिली बिंदु जी को केजरीवाल को छोड़ने के लिए - बिंदु जी के बैंक खातों और assets की जांच होनी चाहिए -
दिल्ली हाई कोर्ट से बिंदु के आदेश पर रोक लगना और गली गली उस पर चर्चा होना बिंदु को किसी मुसीबत में डाल सकता है -
एक आम आदमी का तो इसी बात से सर चकरा रहा है कि जो सबूत हैं जो दस्तावेज हैं उनके लिए कोई जज कह रहा है कि इतने कौन पढ़ता है

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