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Wednesday, August 21, 2024

आर ए एम देव जी की पोस्ट इस पोस्ट को सेव कर लीजिये, हमेशा काम आती रहेगी।

 आर ए एम देव जी की पोस्ट 


इस पोस्ट को सेव कर लीजिये,  हमेशा काम आती रहेगी। 


हिंसा - violence -  का समर्थन करने के लिए दो इंग्लिश शब्दों का बड़े चतुराई से उपयोग किया जाता है।  


पहला है Provoke – प्रोवोक - याने उकसाना,  चिढ़ाना,   ललकारना,  भड़काना, उत्तेजित करना,  गुस्सा दिलाना । 

दूसरा है Unleash - अनलीश -  याने खोलना, छुड़ाना, छोड़ना, खोल देना, उन्मुक्त करना। यह दो भागों में बंटा शब्द है। इसमें जो leash है उसका मतलब बंधन होता है, जैसे खूंखार कुत्ते को बांध रखने का पट्टा या सांकल। सहसा यह कुत्ते या किसी हिंस्र पशुओं को ताबे में रखने के लिए प्रयोग किया जाता है। 


जमात ए विक्टिमकार्ड वाले हमेशा दूसरों पर उनको प्रोवोक करने का आरोप लगाते है और यही कहते हैं कि हमें उकसाया गया है, हमारी सब्र का और इम्तिहान न लिया जाये आदि आदि। लेकिन उसके बाद वे अपना वायोलन्स हमपर unleash करते हैं। 

यहाँ हमें वायोलन्स की तीव्रता को देखना चाहिए जो बदनीयत का सबूत होता है। क्योंकि जिस प्रमाण में लोग उतरते हैं, उनकी तैयारी होती है और वायोलन्स बिलकुल केन्द्रित होता है कि क्या करना है और कहाँ करना है जिसका कम से कम प्रतिकार होगा और अधिक से अधिक परिणाम होगा, नुकसान, भय और दहशत से वहाँ से लोगों का पलायन होगा। 


बाद में ठंडे दिमाग से विश्लेषण करने पर पता चलता है कि यह दंगा नहीं बल्कि ज़मीन खाली कराने एक मिनी युद्ध था जिसकी प्लानिंग लंबे समय से हो रही थी,  लोगो की मानसिकता बनाई जा रही थी, उनको जिम्मेदारियाँ सौंपी गयी थी। इलाके के बाहर से कौन आएंगे, उनके स्थानिक रहबर कौन होंगे, समय समय पर नए हथियार कौनसे होंगे - सब की प्लानिंग होती थी और युद्ध छेड़ने के लिए किसी न किसी बहाने का सहारा लिया जाता था। 


देखना यह भी चाहिए कि युद्ध के सफल परिणाम के बाद managing the peace की भी प्लानिंग होती है जहां नेता, मीडिया अपनी अपनी भूमिका बजाते हैं। क्या कहना चना है, कौन कहेगा कब कहेगा किस जगह से कहा जाएगा, देश में कौन बोलेंगे, विदेश में कौन बोलेंगे - सब प्लानिंग होती है, दिखाई भी देती है । और इनकी यह भी तैयारी होती है कि उनकी इस प्लानिंग के बारे में कोई न बोल सके। उनकी unleash की हुई हिंसा पर कोई कुछ न बोले बल्कि उस हिंसा को unleash करने का जो बहाना ये बता रहे हैं उस provocation पर ही फोकस रहे। कपिल मिश्रा पर फोकस देखिये, ताहिर हुसैन का होता हुआ निर्लज्ज बचाव देखिये और ताहिर की आड़ में बाकियों का बॅकग्राउंड में छुप जाना देखिये। अंकित शर्मा और दिलावर सिंह नेगी की हत्याओं की क्रूरता का वेस्टर्न मीडिया ने कोई संज्ञान नहीं लिया। 


जब कि एक डेनियल पर्ल का गला रेता गया था उसका राग कितने साल आलापते रहे थे। 


वायोलन्स को unleash करना मतलब खूंखार कुत्ते का पट्टा खोल देना। मतलब  खूंखार कुत्तों को पाला गया है। यहाँ सवाल ये आता है और सब के द्वारा किया जाना चाहिए कि ये खूंखार कुत्ते पाले क्यों गये थे। और तो और, सब कुछ खुले में आने के बाद भी उनको भविष्य में बार बार उपयोग के लिए जिस तरह बचाया जाता है वह भी देखने योग्य है। जिस तरह तेंदुआ बाड़े में घुस कर भेड बकरियाँ उठा ले जाते हैं वे भेड बकरियाँ वापस आने से रही। लेकिन अगर तेंदुआ आप के हाथ लग जाये तो उसे तुरंत मार देने के लिए आपके पास हथियार नहीं होते और हिम्मत भी कम होती है। आप हिम्मत या हथियार जुटाएँ उसके पहले प्राणीप्रेमी हाजिर होते हैं उसे छुड़ाने। उसे पकड़ने के लिए आप को भरसक कोसते हैं, ‘बेच्चारे' तेंदुओं को आप से ही लेकर मुर्गी खिलाते हैं और तेंदुए को सुरक्शित ले जाते हैं। और वो तेंदुआ आप की 'सेवा' में फिर हाजिर होता है और आप असहाय देखते हैं क्योंकि आप तेंदुए से अधिक उन प्राणीप्रेमियों की पहुँच से डरते हैं। 


विदेशों में भेड़ियों का उपद्रव बढ़ता है वहाँ उन्हें मार कर पेड़ों पर या जहां दिखाई दे ऐसे टांगा जाता है। अब वहाँ भी प्राणिप्रेमी सक्रिय हो गए हैं तो यह क्यों किया जाता है इसका कारण खुलकर कोई नहीं बताता, लेकिन अभी तक करते जरूर हैं। शायद अति हो जाएगी तो कुछ प्राणिप्रेमियों को भी वैसे ही टांग दिया जाएगा उसके बाद भेड़ियों से शांति मिलेगी। 


Provoke और Unleash के फर्क को आप अच्छे से समझ गए होंगे यह उम्मीद है। किताब का अभ्यस करेंगे, चरित्र का अभ्यास करेंगे तो पता चलेगा कि यही सीख मिलती है। इंग्लिश की सीख अगर ढंग से दी गयी होती - इंग्लिश माध्यम की आवश्यकता नहीं - तो आज तक बहुत सारे लोग यह जान चुके होते। 


आज जानने की जिज्ञासा है लेकिन चूंकि इंग्लिश कच्ची है इसलिए ज्ञान से वंचित हैं। और हिन्दी या अन्य भारतीय भाषाओं में यह किताबें आने से रही। क्या इसके लिए भी उन नेताओं का अभी तक आभार मानेंगे जिन्होने अस्मिता के नाम पर अज्ञान को बढ़ावा दिया ?अस्तु, चाहे तो यह लेख दुबारा पढे, हो सके तो सेव करें क्योंकि यह provoke और unleash का फर्क समझना आप को कई जगह काम आयेगा। न केवल तर्क करने में बल्कि समझ गए तो भविष्य में खुद के बचाव में भी। और हाँ, ज्ञान खुद तक सीमित नहीं रखना चाहिए, इसे कॉपी कर के औरों को बाँटिए। मैंने लिखकर आप में बांटा है, आप कम से कम इसे आगे तो बढ़ा सकते हैं। और लोग आप के साथ खड़े होंगे तो आप का ही घर बचेगा। वरना अकेला आदमी जान कर भी इस ज्ञान का क्या अचार डालेगा ? सब को बताने से ही सब की रक्षा होगी, जिसमें आप भी होंगे। 


सह वीर्यं करवावहे। इसे आगे अवश्य बढ़ाइए।


रिपोस्ट

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