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Tuesday, September 3, 2024

✅राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की पीड़ा, दूसरी तरफ ममता की नौटंकी, सजा बढ़ाना ही क्या एकमात्र उपाय है लेकिन जहां सजा है, वहां सुप्रीम कोर्ट रोक देता है

 ✅राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की पीड़ा,

दूसरी तरफ ममता की नौटंकी,

सजा बढ़ाना ही क्या एकमात्र 

उपाय है लेकिन जहां सजा है,

वहां सुप्रीम कोर्ट रोक देता है -


कोलकाता रेप / हत्या के मामले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बहुत भावुक हो कर लेख लिखा जिसमें उन्होंने कहा कि “कोलकाता में हुई डॉक्टर के रेप और मर्डर की घटना से देश सकते में है - जब मैंने इसके बारे में सुना तो मैं निराश और भयभीत हुई - ज्यादा दुखद बात यह है कि यह घटना अकेली घटना नहीं है। यह महिलाओं के खिलाफ अपराध का एक हिस्सा है -


राष्ट्रपति ने कहा कि लोग महिलाओं को उपभोग की वस्तु समझते हैं और यही महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध की वजह है - ऐसे लोगों के दिमाग में महिलाओं को लेकर यह सोच गहरी हो चुकी है, यह केवल भारत में ही नहीं है बल्कि दुनियाभर में ऐसा ही है, कहीं अपराध ज्यादा हैं और कहीं कम -


राष्ट्रपति जी जो कहा ठीक है, लेकिन महिलाओं पर बढ़ते अपराधों के लिए अदालतों की उदासीनता भी बहुत हद तक जिम्मेदार है - अपने 22 अगस्त के लेख में मैंने कई केसों का जिक्र करते हुए बताया था कि अदालतों में किस तरह अत्यधिक देरी और ट्रायल कोर्ट्स और हाई कोर्ट्स  द्वारा अधिकतम सजा दिए जाने के बावजूद, सुप्रीम कोर्ट उनकी सजा कम कर देता है और फांसी तक की सजा ख़त्म कर देता है - बच्चियों के रेप के लिए अपराधी को छोड़ देना उनका हौंसला बढ़ाता है -


कभी सुप्रीम कोर्ट से अपराधी की फांसी माफ़ करने के लिए दलील देता है कि Every Sinner Has a Future लेकिन उस 4 साल की बच्ची के भविष्य का ख्याल नहीं करता जिसे रेप कर हत्या कर दी दरिंदे ने - कहीं कह दिया गया कि वो (अपराधी) तो नमाज़ पढता है और फांसी की सजा से छोड़ दिया - कभी हाई कोर्ट जज ने कह दिया कि skin to skin contact नहीं हुआ और बरी कर दिया अपराधी को -


यह सब मामले अक्सर पॉक्सो एक्ट के होते हैं जिसमें बच्चियों से बलात्कार के अपराध के लिए फांसी की सजा का प्रावधान है लेकिन अदालत फांसी की सजा देने से बचती हैं - इतना ही नहीं  High Courts और Supreme Court के जज वकालत करते हैं कि सेक्स के लिए सहमति की आयु घटाने पर सरकार विचार करे - क्या Courts नाबालिग लड़कियों को सेक्स के लिए “सहमति” के नाम पर “बालिग” घोषित करके उनके बलात्कार का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं -


ममता बनर्जी ने नौटंकी खड़ी की हुई है जो प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिख कर मांग कर रही हैं कि बलात्कार के लिए सख्त कानून बनाया जाए फांसी की सजा का प्रावधान हो और ट्रायल 15 दिन में ख़त्म होना चाहिए -


ममता बनर्जी नाटक कर रही और कोलकाता अपराध से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है - मेरा कहना है कि केवल सख्त कानून से क्या समस्या का हल हो जाएगा, फांसी का प्रावधान पॉक्सो एक्ट में है, लेकिन जब सुप्रीम कोर्ट किसी को फांसी देना ही नहीं चाहता तो कोई क्या करे - कल को ममता के कहने से बालिग लड़कियों के बलात्कार के लिए भी फांसी का प्रावधान कर भी दिया गया लेकिन सुप्रीम कोर्ट किसी को सजा देगा ही नहीं तो क्या फायदा होगा -


ममता कहती है ट्रायल 15 दिन में ख़त्म होना चाहिए - कैसे संभव है जब कोलकाता केस में सभी सबूत नष्ट कर दिए गए, Crime Scene पर दंगा करा दिया गया और CBI के हाथ आधे अधूरे सबूत सौंपे गए - कल को CBI कोर्ट में अपराधी का दोष साबित कैसे करेगी और अगर सबूतों में कमी रह गई अपराधी बरी हो जाएंगे, लगता है ममता यही चाहती है - 


महिलाओं पर रेप के बढ़ते अपराध के लिए Bollywood भी जिम्मेदार है - उसने  एक फिल्म स्त्री - 2 में  तमन्ना भाटिया ने एक गाने “आज की रात मजा हुस्न का आंखों से लीजिए” में अर्धनग्न कामुकता का प्रदर्शन करते हुए डांस किया है - इस तरह की अश्लीलता अपराधियों को बल देती है  मासूमों पर अपराध करने के लिए - 


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किसी भी देश का इस्लामीकरण कैसे होता हैं ?

 किसी भी देश का इस्लामीकरण कैसे होता हैं ?


१. मुस्लिम आबादी दर हर गैर इस्लामिक देश में गैर मुसलमानों की तुलना में दुगनी रफ़्तार से बच्चे पैदा करते हैं जिससे अर्थव्यवस्था गड़बड़ा जाती हैं*

*२. मुस्लिम आबादी पढाई लिखाई में कोई रूचि नहीं रखती अंग्रेजी, गणित, विज्ञानं आये ना आये कुरान जरुर बच्चों को पढाई जाती है* 

*३. मुस्लिम जो व्यवसाय करते हैं वो भी समाज हित के नहीं होते जैसे बड़े व्यवसायी जो टेनरी चलाते हैं उसकी गंदगी नदियों में बहाते हैं जिस से पानी में आर्सेनिक जैसे जहर की मात्रा बढती जाती हैं* 

*४. मुस्लिमो की गोस्त की दुकाने आसपास बिमारियां लाती हैं जानवरों की हत्याअन्न-जल संकट का प्रमुख कारण हैं*

*५. जहा मुस्लिम अधिक होते हैं वह संगठिततरीके से रहते हैं और आसपास किसी गैर मुस्लिम को बसने नहीं देते १०० हिन्दुओ के बीच एक मुस्लिम रह सकता हैं पर१०० मुसलमानों के बीच हिंदू नहीं रह सकता*

*६. मुस्लिम संगठित होने की वजह से गैर मुसलमानों से बेवजह झगडा करते हैं, अगर आस पास उनकी संपत्ति होती हैं तो उस पर कब्ज़ा कर लेते हैं जैसा की कश्मीर में हुआ*

*७. परिवार में अधिक सदस्य होने से और अशिक्षित होने से छोटे संगठित अपराध करते हैं जैसे की अनाधिकृत कब्जे, बिजली चोरी, नशीले पदार्थो का धंधा करते हैं*

*८. ये छोटे अपराधी जल्द ही बड़े अपराधियों से जा मिलते हैं और ये बड़े अपराधी भी कभी ना कभी उन्ही मुस्लिम बस्तियों से निकल कर आये होते हैं टाइगर मेनन और दाउद इब्राहीम कासकर और ना जाने कितने अपराधी ऊपर उठे* 

*९. बड़े अपराधी देश की अर्थ व्यवस्था कोबिजली चोरी या अतिक्रमण की तरह छोटा मोटा नुक्सान नहीं पहुचाते बल्कि हजारो करोडो का नुक्सान पहुचाते हैं जैसे स्टाम्प घोटाले व हवाला कांड का प्रमुख अब्दुल करीम तेलगी १०,००० करोड़ व हसन अली ३६,००० करोड़ इत्यादि रकम कमाते हैं और इसे इस्लामिक मुल्को से गैर इस्लामिक देशो में आतंक हत्या के लिए हथियार प्रशिक्षण पर प्रयोगकिया जाता हैं* 

*१०. वे मुस्लिम जो काफ़िर देश में किये गए अपराध लूट पाट को धार्मिक कृत्य मानते हैं वे और भी तरीको से मुस्लिम लड़के गैर-इस्लामिक देश में जंग के लिएतैयार करते हैं उनमे से एक सरलतम रास्ता जेहाद का हैं काफ़िर का क़त्ल हर मुस्लिम पर अनिवार्य हैं*

*११. कुरान पढ़े बेरोजगार लड़के जेहाद के लिए आसानी से तैयार हो जाते हैं बल्कि अपना सौभाग्य समझते हैं और इस्लामिक देशो में मौजूद अपने रहनुमाओकी मदद से जेहादी बनते हैं*

*१२. ये जेहादी देश में समय समय पर बम विस्फोट सामूहिक हत्याए वा दंगे करते हैं दंगो को कुछ लोगो की शरारत कहा जाता हैं जबकि बम विस्फोट पर कहा जाता हैं की इसका इस्लाम और मुसलमानों से कोई लेना देना नहीं जबकि दोनों ही जेहाद अर्थात धर्मं युद्ध का हिस्सा हैं* 

*१३. यदि गैर इस्लामी कौमे संगठित होकर धर्मं युद्ध का जवाब देती हैं तो मुस्लिम जोर जोर से हल्ला करना चालु करते हैं के हम पर जुल्म और अत्याचार होरहा हैं, हम सुरक्षित नहीं इस मुल्क में*

*१४. मुसलमानों के संगठित होने की वजह सेऔर हमलावर होने की वजह से नास्तिक राजनैतिक दल मुसलमानों का पक्ष लेने में ही अपनी भलाई समझते हैं जैसे की भारत में कांग्रेस, समाजवादी, कमुनिस्ट दल इत्यादि*

*१५. क्योंकि इन दलों का धर्म से, संस्कृति से कोई लेना देना नहीं होता और मुस्लिम समर्थन मिलने पर इन्हें सत्ता का और लालच आ जाता हैं ये मुस्लिमआबादी के बढने में और सहायता करते हैं उनके हर काम में चाहे वो गलत हो या सही, साथ देते हैं*

*१६. बंगलादेश से आये ४ करोड़ मुस्लिमो को कांग्रेस ने ना केवल बसाया अपितु  उनको जिस कानून (आई. ऍम. टी. डी. एक्ट) की सहायता से निकाला जा सकता था उसे भी खत्म कर दिया* 

*१७. आतंकवाद के खिलाफ कानून (पोटा एक्ट)बनाना तो दूर रहा, जो कानून था उसको भी खत्म कर दिया*

*१८. मुस्लिम नाराज ना हो इस लिए जेहादियों को उच्चतम न्यायालय से दी हुयी को सजा को भी रोके रखते हैं जैसा की कांग्रेस ने अफजल गुरु की फ़ासी रोक रखी हैं* 

*१९. गैर मुस्लिमो के इस कथित सेकुलर वर्ग की इस मूर्खता से मुस्लिम खुश होते हैं और और तेजी से आबादी बढ़ाने काउपाए सोचते हैं*

*२०. इन उपायों में गैर मुस्लिम सम्प्रदाये की लड़कियों को प्यार के झूठे जाल में फसाना होता हैं और उनसे बच्चे पैदा करने होते हैं इन्हें लव जेहादी कहते हैं*

*२१. अगर ये लव जेहादी ३-४ हिंदू या ईसाई लडकियो को जिन्हें ये वर्गला-फुसला के भगा लाए थे, खिला (वहन) नहीं कर पाते हैं, तो भोग करने के बाद किसी अधेड उम्र के मुस्लिम को बेच देते हैं  अधिकतर वह मुस्लिम बदसूरत ही होते हैं इसीलिए  उन्हें इस उम्र तक औरते नहीं मिल पात*

*२२. मुस्लिम आबादी बढ़ने के साथ-साथ छोटे-छोटे इस्लामिक क्षेत्रो का भी निर्माण करते हैं जैसे हिंदू इलाके में अधिक दामों पर कोई एक इमारत खरीद करलेते हैं और फिर वहा बड़े मुस्लिम परिवार बसा दिए जाते है*

*२३. ये मुस्लिम लोग आसपास लोगो से आये दिन झगडा करते हैं और धीरे धीरे पडोसियो को अपने घर सस्ते दामों पर किसी मुस्लिम को ही बेचने को मजबूर कर देते हैं इस प्रकार इनकी एक मकान पर खर्च की गयी अतिरिक्त रकम से कही अधिक मुनाफा निकल आता हैं*

*२४. मुसलमानों की मस्जिद अक्सर शहर के बीचों- बीच होती हैं ताकि किसी तरह की व्यवस्था बिगडने पर मीनारो की आड़ से पुलिस को देख सके और जरुरत पड़ने पर खुद पुलिस व्यवस्था पर हमला कर सके*

*२५. छोटी मुस्लिम बस्तियाँ ना केवल संगठित होती हैं अपितु हमलावर लोगो से भरी होती हैं हर घर में देसी तमंचे मिलना सामान्य बात होती हैं*

*२६. भारत में नव-निर्मित मुस्लिम बस्तियाँ अक्सर या तो राजमार्गो के किनारे  होती हैं या ट्रेन लाइनों के किनारे राजमार्गो के किनारे बनी मजारो में जिनमे से अधिकतार कुत्ते बिल्लियो की या खाली ही होती हैं हथियार छुपाये रहने की संभावनाओ से इंकार नहीं किया जाता*

*२७. यदि गैर-इस्लामिक देश के अगल-बगल में इस्लामिक देश हैं तो समय-समय पर इस्लामिक देश हमला करते रहेंगे जैसा की भारत का पडोसी पाकिस्तान करता रहता है*

*२८. ऐसे पडोसी इस्लामिक मुल्क प्रत्यक्ष जीत ना पाने की स्थिति में छदम युद्ध प्रारंभ करते हैं गैर इस्लामिक मुल्क में मौजूद मुस्लिमो कीमदद लेते हैं इस्लामिक एकता के नाम पर*

*२९. आबादी में ३० प्रतिशत तक पहुचने पर समय आ जाता .मुस्लिमो के लिए के वो काफ़िर देश पर कब्ज़ा कर ले क्यों की संगठित ३०% मत किसी भी लोकतान्त्रिक देश में काफी है सरकार बनाने के लिए या ग्रह युद्ध के माध्यम से कब्ज़ा करने के लिए*

*३०. इस सम्भावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता के मुस्लिम पडोसी देश के साथ मिल जाये और बाहर से हमले के समय अंदर से भी हमला कर दे युद्ध के समय रेल लाइन उखाड दे,  तेल पाइपलाइन तोड़ दे राजमार्ग जाम कर दें इत्यादि ताकि सेना को समय पर रसद ना मिले और वो हार जाये*

*३१. सेना के हारते ही विदेशी मुस्लिम गैर- इस्लामिक देश में आ जायेंगे और योगदान के अनुसार देसी मुस्लिमो को सत्ता में हिस्सेदारी दे देंगे क्यों की उनकी जीत में उनका भी बड़ा योगदान होगा*

*३२. देश को दारुल हरब से दारुल इस्लाम घोषित कर दिया जायेगा यानि गैर इस्लामिक देश इस्लामिक देशो में से एक हो जायेगा गैर इस्लामिक देश में क्या क्या होता हैं ये हमें लिखने की जरुरत नहीं फिर भी हम आगे के लेख में बताएँगे लेख समीक्षा : आप उपरोक्त लेख पढ़ कर समझ ही चुके होंगे की भारत इस्लामिक देश बनने की कगार पर हैं सबसे मूल करण मुस्लिम आबादी का हिन्दुओ ईसाइयों और अन्य सभी से दोगुनी रफ़्तार से बढ़ना हैं इसका दूसरा प्रमुख कारण है भारत का फर्जी सेकुलरवाद जो भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की ओर अग्रसर हैं आप ये कहे सकते हैं के घोटाल अपराध भ्रष्टाचार में तो हिंदू भी आंगे हैं तो मुस्लिमो को दोष क्यों देना हमारा उत्तर हैं के हिंदू भ्रष्टाचार कर के हथियार नहीं खरीदते, ना ही उन हथियारों से वो पाकिस्तान में बम विस्फोट करते हैं ना ही राष्ट्र का ख्याल ना कर के आबादी बढ़ाते हैं मुस्लिम हर कदम अपनी कौम को ध्यान में रख के उठाते हैं और उनका अंतिम लक्ष्य होता हैं देश का इस्लामीकरण जबकि भ्रष्ट हिंदू को हिंदू राष्ट्र से कोई लेना देना नहीं होता आप ये भी सोच रहे होंगे के मुस्लिमो ने देश में बड़ा योगदान किया हैं जब हम उन गिने चुने लोगो को जानते हैं तो पता चलता हैं वो मुस्लिम हैं ही नहीं जैसेकी अब्दुल कलाम अग्नोस्टिक हैं,अज़ीम प्रेमजी का भी यही हाल हैं, अशफाक उल्लाखान  आर्य समाजी थे व हिंदू राष्ट्र का समर्थन करते थे मुस्लिमो ने जितना योगदान नहीं किया था, उस से ज्यादा बटवारे के तौर पर ले लिया बांकी आप अपने आस-पास मुस्लिम गतिविधियाँ देख कर लेख की सत्यता परख सकते हैं

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*एक दुःखद सत्यकथा*

 *एक दुःखद सत्यकथा*

👉 *आज देश में दोनों तरफ से हिन्दू ही लड रहा है- एक ओर देशभक्त हिन्दू है तो दूसरी ओर गद्दार हिन्दू।*  

👉 सभी हिन्दू विचार करें।

अकबर के दरबार में एक कट्टर सुन्नी मुस्लिम *अब्द अल कादीर बदायूंनी* था। उसने हल्दीघाटी के युद्ध को देखा था, जिसमें वह स्वयं सम्मिलित था। इसका वर्णन उसने अपनी पुस्तक *मुंतखाब उल वारीख* में किया है। मूल पुस्तक अरबी में है, जिसका 18वीं सदी में अंग्रेजी में अनुवाद किया गया।

*दोनों तरफ की सेनाओं में  90% राजपूत लड़ रहे थे। अकबर की तरफ से सेनापति मानसिंह और राजा लूणकरण थे तो दूसरी तरफ स्वयं महाराणा प्रताप और अन्य राजपूत राजा थे। दोनों तरफ से राजपूतों ने केसरिया साफे पहन रखे थे।* 

इससे अकबर का एक सेनापति  'अबुल फजल इब्न मुबारक' असमंजस में पड़ गया कि कौन हमारी तरफ से लड़ रहा है और कौन शत्रु की तरफ से? फिर अबुल फजल इब्न मुबारक ने अब्द अल कादिर से पूछा दोनों तरफ से राजपूत केसरिया साफा पहनें हैं, मैं कैसे पहचान करूं कि कौन अपनी तरफ से लड़ रहा है और कौन शत्रु की तरफ से है?

तब अब्दअल कादिर ने कहा- *तुम बस तीर और फरसा चलाते रहो, भाला फेंकते रहो मरने वाले "काफिर" ही होंगे!*

चाहे हमारी तरफ के मरे या शत्रु की तरफ के मरे किधर भी तीर चलाओ किसी को भी मारो जीत "इस्लाम" की ही होगी। *अगर हम युद्ध में विजय हो सके तो ठीक, नहीं जीते तो कम से कम खुदा को यह तो कह देंगे कि हमने काफिरों को मारा!*

काश हिन्दू इस इतिहास को पढ़ते और सीख लेते! हिन्दुओं की स्थिति आज भी वैसी ही है, इसलिये *इस पर बस थोड़ा सा विचार जरूर कीजियेगा!*

Monday, September 2, 2024

▪️खाने के बाद तुरन्त टॉयलेट जाने की आदत से......

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▪️खाने के बाद तुरन्त टॉयलेट जाने की आदत से......


100 ग्राम सूखे धनिये में

25 ग्राम काला नमक पीसकर मिलाकर रख लें।


भोजन के बाद दो ग्राम (आधा चम्मच) की मात्रा खाकर ऊपर से पानी पी लें। आवश्यकतानुसार निरन्तर एक दो सप्ताह लेने से खाने के बाद तुरन्त पखाना जाने की आदत छुट जाती है।


▪️खाने के तुरन्त बाद फ्रेश आता हो तो.....



भुनी हुई सौंफ और जीरा का चुर्ण बनाकर रख लें।



खाने के बाद एक चम्मच की मात्रा से इस चुर्ण की फंकी लेकर गर्म पानी पीना चाहिये।


भोजन के बाद केवल भुनी हुई सौंफ चबाने से भी लाभ होता है।

दो - तीन सप्ताह लें, एकदम फिट हो जायेंगे।


▪️अम्लपित्त एसीडीटी गैस को करे जड़ से समाप्त आयुर्वेदिक यूनानी घरेलू नुस्खे से.....


अगर आप अम्लपित्त, गैस, बदहजमी, एसीडीटी, पेट मे जलन, वगेरह समस्यां से सालो से परेशान है और आपको इलाज नही मिल रहां है तो आप हमारे नीचे दीए गये नुस्खे को अपनाए कुदरत की कृपा से  निश्चित ही स्वस्थ हो जायेंगे ।


धनिया पाउडर   100  ग्राम_


सौंफ पाउडर     100 ग्राम_


त्रिफला चूरन    100 ग्राम_


उपर दी गइ सभी चीजों  को पाउडर बनाकर मिक्स करके कांच के डीब्बे मे पैक करके रख दिजिए और  सुबह शाम 1-1 चम्मच चूरन गुनगुने पानी के साथ खाने के बाद सेवन करे । यह चूरन तुरंत ही राहत दिलातां है ।


*कांग्रेस सरकारों की मूर्खता का काम* *दशकों बाद भी हमें भुगतना पड़ता है*

 *कांग्रेस सरकारों की मूर्खता का काम* 

*दशकों बाद भी हमें भुगतना पड़ता है* 

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यदि आप एशिया के सबसे बड़े घास के 

मैदान जो *कच्छ के बन्नी एरिया* में 

स्थित है जो 2600  स्क्वायर किलोमीटर 

में फैला है वहां जाएंगे तब आपको 

सैकड़ों जेसीबी बबूल के पेड़ों को 

उखाड़ते नजर आएंगे। 


अब आप सोचेंगे पेड़ लगाना तो पुण्य 

का काम है ..... 

आखिर पेड़ क्यों उखड़े जा रहे हैं ?


फिर आप कच्छ  से लेकर सुरेंद्र नगर 

मोरबी राजकोट अहमदाबाद से लेकर 

बाड़मेर जालौर तक जाएंगे तब आप 

जंगली बबूल जिसे गुजराती में 

#गांडा_बावल (#गांडा_बावळ)कहते 

है वो खूब नजर आएंगे। 


इस पूरे इलाके में जमीन के नीचे वैसे 

भी पानी की कमी है और यह जंगली 

बबूल जमीन के नीचे के पानी को 

सोख कर धरती को बर्बाद कर रहा है। 


फिर उसके बाद आप जब कांग्रेसी 

सरकारों की मूर्खता के बारे में सोचेंगे 

जिन्होंने चंद रुपयों के लिए कैसे पूरे 

इकोसिस्टम को बर्बाद कर दिया।  


साठ के दशक में कच्छ के बन्नी प्रदेश 

में जो एशिया का सबसे बड़ा घास 

का मैदान है जहां हजारों मालधारी 

यानी पशुपालक इन्हीं घास के मैदानों 

से अपनी आजीविका चलाते थे वहां 

यह देखा गया कि पानी के अंदर 

खराश यानी खारेपन की मात्रा बढ़ 

रही है ..... 

फिर पता नहीं कौन से मूर्ख वैज्ञानिक 

ने कांग्रेस सरकार को यह सलाह 

दिया कि आप अफ्रीका से #जंगली 

बबूल के पेड़ यहां उगाइए इससे 

जमीन का खारापन खत्म हो जाएगा। 


साठ के दशक में कांग्रेस सरकार को 

इसमें शानदार घोटाला नजर आया 

और पता चला कि एक केंद्रीय मंत्री 

के बेटे को इसका ठेका दिया गया। 


लेकिन इन मूर्खों ने यह नहीं सोचा 

कि प्रकृति जैसी है वैसे रहने दो .... 

उसके साथ छेड़खानी मत करो। 


जब हम किसी दूसरे सुदूर एरिया से 

*फ्लोरा एंड फौना* को लाकर किसी 

दूसरे एरिया में लगाएंगे ..... 

तब वह काफी खतरनाक भी हो 

सकता है और देश ने यह खतरनाक 

प्रयोग अंग्रेजों के जमाने में देखा था 

जब एक अंग्रेज किसी कैरेबियन में 

एक तालाब में *जलकुंभी* के फूल 

को देखकर यह सोचा कि यह कितना 

सुंदर लग रहा है और इसे भारत के 

अपने बंगले के पीछे तालाब में उगाने 

के लिए वह जलकुंभी के कुछ पेड़ 

कैरेबियन से भारत लाया और धीरे-

धीरे कुछ ही दशकों में जलकुंभी ने 

पूरे भारत के जलीय इकोसिस्टम को 

बर्बाद कर दिया। 


ठीक यही काम 60 के दशक में 

*कच्छ के बन्नी प्रदेश* में कांग्रेस 

सरकार द्वारा अफ्रीका से लाया गया 

जंगली बबूल ने किया। 


मूर्ख कांग्रेसियों ने यह नहीं सोचा कि 

पेड़ कोई भी हो उसे पानी चाहिए 

नतीजा यह हुआ कि एक जंगली 

बबूल जिसे दिन में 26 से 27 लीटर 

पानी चाहिए वह अपनी जड़ों को 

जमीन के भीतर फैलाता गया और 

जमीन को और ज्यादा बंजर और 

छार युक्त बनाता गया। नतीजा यह 

हुआ कि जो बन्नी प्रदेश कभी एशिया 

का सबसे बड़ा घास का मैदान 

कहलाया जाता था वहां घास उगना 

बंद हो गया और धीरे-धीरे पूरे एरिया 

में जंगली बबूल ने अपना कब्जा कर 

लिया।  


और यह जंगली बबूल किसी काम 

का भी नहीं होता। इसे कच्छ के कोई 

भी जानवर नहीं खाते क्योंकि इसमें 

बड़े बड़े कांटे होते हैं। जंगली बबूल 

को खाने वाले प्राणी सिर्फ मेक्सिको 

और अफ्रीका में पाए जाते हैं।  


दरअसल हमारी प्रकृति किसी विशेष 

एरिया में वैसे ही फ्लोरा एंड फौना 

डिवेलप करती है जिसे खाने वाले 

प्राणी उस एरिया में मौजूद हो ताकि 

इकोसिस्टम चलती रहे।  


अफ्रीका के जिराफ और जंगली हाथी 

और बिल्डरबिस्ट इसे खूब चाव से 

खाते है और उनके खुर से इन जंगली 

बबूल की वृद्धि कंट्रोल रहती है।  


लेकिन गुजरात में ही नहीं बल्कि पूरे 

भारत में कोई ऐसा प्राणी नहीं पाया 

जाता जो इस जंगली बबूल को खाए। 


जब घास के मैदान खत्म हो गए तो 

घास के मैदानों में अंडे देने वाले 

तमाम पक्षी विलुप्त हो गए। घास के 

मैदानों में रहने वाले तमाम जंगली 

जानवर जिसमें जंगली खरगोश आदि 

थे वो भी विलुप्त हो गया और जंगली 

खरगोश को खाने वाले कच्छ की 

लोमड़ी भी विलुप्त हो गई।  


यानी सिर्फ 4 दशक में बन्नी प्रदेश 

का पूरा इकोसिस्टम बर्बाद हो गया। 


अब सैकड़ों जेसीबी लगाकर पूरे 

बन्नी प्रदेश से कांग्रेस के इस कुकर्म 

यानी जंगली बबूल को उखाड़ा जा 

रहा है और इन्हें जलाया जा रहा है 

ताकि इनके बीज नष्ट हो जाए और 

ऐसा कुछ वर्ष करने के बाद हो 

सकता है। धीरे-धीरे बन्नी प्रदेश का 

इकोसिस्टम वापस लौट आए। 


आज वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है 

कि इस जंगली विदेशी बबूल यानी 

*गांडा बावल* को पूरी तरह से 

उखाडा जाए, नष्ट किया जाए। 

वरना यह भारत के पूरे इकोसिस्टम 

को बर्बाद कर देगा।

*एक सुझाव* जब कभी कोई सनातनी आधुनिक Social मिडिया के युग में..

 *एक  सुझाव* 


जब कभी कोई सनातनी आधुनिक Social मिडिया के युग में, हिन्दूत्व की लड़ाई लड़ते हुए किसी मुसीबत में फँस जाता है, किसी कानूनी पचड़े में फँस जाता है या अधर्मियों के हाथों शिकार हो जाता है तो वह सहायता के लिये किसे पुकारे? क्या कोई ऐसी संस्था है या कोई हेल्पलाइन है जिसे वह अपनी रक्षा के लिये गुहार लगाये, या फिर वह बंगाल के हिन्दुओं की तरह चुपचाप मरता कटता रहे!


आज़ हर हिन्दू Social मीडिया पर हिंदूवादी पोस्ट डालते हुए कहीं न कहीं असुरक्षा की भावना रखता है, कहीं वह या उसका परिवार किसी भयंकर आपदा में फँस गया तो कौन सहायता करेगा? 


अपने अपने स्तर पर सभी हिन्दू धर्म के युद्ध में अकेले लड़ाई लड़ रहें हैं,

क्या उनकी सुरक्षा की गारंटी कोई State गवर्नमेंट या सेंट्रल गवर्नमेंट लेती है?


क्या बंगाल के हिन्दुओं के परिवारों के साथ जो हिंसा और बलात्कार हुए, उन्हें बचाने के लिये कोई संगठन सामने आया... ?


जबकि दूसरे धर्मों में उनका *"ईसाई मिशनरी, वक्फ बोर्ड अथवा गुरुद्वारा कमेटी"* अपने समुदायो के लोगों के लिये संगठित होकर आगे आते हैं और ऐसा आन्दोलन छेड़ते हैं कि प्रसाशन एवं मिडिया के कान के परदे तक हिल जायें, उदाहरण के लिये देश भर में प्रतिदिन सैकड़ों लड़कियों को जिहादियों द्वारा उठा लिया जाता हैं, उनका बलात्कार किया जाता हैं, उनका धर्म परिवर्तन किया जाता है और हम Social मिडिया पर कुछेक पोस्ट डालकर अपनी भड़ास निकाल लेते हैं और भूल जाते हैं,

मगर पंजाब में 2 सिख लड़कियों के मामले को लीजिये, देशभर के सभी सिक्खों ने एकत्र होकर एक ऐसा आन्दोलन छेड़ दिया कि जिहादियों द्वारा उन लड़कियों को छोड़ना पड़ा जबकि निकाह भी हो गया था, जिहादी न तो कोर्ट का सहारा ले पाये और न थाने पुलिस का!


जानते हो ऐसा कैसे संभव हो सका, कैसे सारे सिख एक साथ एक मंच पर अपने सभी काम धंधों को छोड़कर एक हो गये??? 🤔


क्योंकि सभी सिक्खों को एकत्र करने और संचालन करने वाली उनकी *"गुरुद्वारा कमेटी"* है, जिसका चुनाव स्वयं सिक्ख समुदाय अपने वोट देकर करता है, उसी प्रकार जिहादिओं का बचाव उनका *"मुस्लिम वक्फ बोर्ड"* करता है, यहाँ तक कि उनके दोषी होने पर भी उनका साथ देता है, उसी तरह ईसाई पादरियों पर बलात्कार का चार्ज तक होने पर भी उन्हें उनकी ईसाई मिशनरी बचा ले जाती है!

और दूसरी तरफ हम बेचारे हिन्दू...?


क्या हिन्दुओं में इतना विवेक नहीं है कि वो भी अपने लिये एक *"राष्ट्रीय हिन्दू बोर्ड"* जैसी संस्था का गठन कर सके, जो सभी सनातनियों के लिये एक ढाल का काम कर सके, उन्हें जिहादियों, प्रशासन और दूसरी बाह्य शक्तियों से लड़ने की शक्ति दें सके....?

बिलकुल बना सकते हैं, *"किन्तु समस्या यह है कि हममें से कुछ बुद्धिजीवी जो अपने आपको वयस्क एवं समझदार  समझने लगते हैं, वे लोग किसी न किसी राजनैतिक विचारधाराओं से जुड़े होते हैं, फलस्वरूप वे न तो इस विषय में खुद कुछ सोचते हैं और न किसी और के विचारों को सुनने की क्षमता रखते हैं, उन्हें ऐसा लगता हैं कि इस तरह किसी और कि बातें सुनने और मानने लगे तो उनकी क्या हैसियत रह जाएगी* 


अब सोचना किसको है, सोचना हमें और आपको है, सिर्फ़ सोचना ही नहीं करके दिखाना है....!


तो आइये एक साथ आगे बढिये और अपने लिये *"राष्ट्रीय हिन्दू बोर्ड"* बनाने की मांग कीजिए जिसके मेंबर्स का चुनाव प्रत्येक 2 वर्षों के लिये प्रत्येक साधारण हिन्दू जो 18+ का हो अपने वोट डालकर करें!


इस बोर्ड के गठन के लिये प्रधानमंत्री द्वारा किसी अध्यादेश लाने की आवश्यकता नहीं होगी, और न संसद के किसी सदन में कोई बिल पारित करना होगा, बल्कि प्रधानमंत्री महोदय अपने सरकारी गजट में इसे छपवा देंगे और हो गया काम!

किन्तु प्रधानमंत्री इसे करेंगे तभी जब देश के करीब 40 करोड़ हिन्दू अपने पत्र द्वारा उन्हें ऐसा करने के लिये बाध्य करें...!


यदि एक बार यह लागू हो गया तो देश के सभी प्रमुख मंदिरों की धन-संपत्तियों और करोड़ों अरबों रूपए के चंदे से सरकार का अधिपत्य हट कर हिन्दु-बोर्ड के हाथों में आ जायें, जिसे वे अपने धर्म के लोगों की भलाई के लिये खर्च कर सकेंगे, नाकि किसी जिहादी समुदायो को फ्री की सब्सिडी और उनके मौलवीओ की तनख्वाह पर खर्च करेंगे!

इससे समस्त हिंदू समाज एक सूत्र में बंध जायेगा और अन्य सम्प्र्दायों की तरह जाति पाती को भुलाकर स्वयं को सिर्फ़ हिन्दू कहलाना पसंद करेगा!


हिन्दू एक सशक्त वोट बैंक होगा, उसे अपने हित के लिये किसी राजनैतिक दल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि सभी राजनैतिक दल कोर्ट पर जनेऊ डालें हिन्दुओं के तलवे चाटते नज़र आयेंगे...


इसे क्रियान्वयन में लाने के लिये क्या करना है... यह जानने के लिये कृपया अपना सहयोग दीजिए ताकि आपको अगला कदम के बारे में बताया जा सके!

सविनय निवेदन

           ............

🚩🚩🚩जय श्रीराम 🚩🚩🚩


*क्या हिन्दू होने के नाते आप इसे आगे फारवर्ड करेंगे  ?*

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Sunday, September 1, 2024

रामेश्वरम हिंदुओं का एक पवित्र तीर्थ है

 रामेश्वरम हिंदुओं का एक पवित्र तीर्थ है  , यह तमिल नाडु के रामनाथपुरम जिले में स्थित है। यह तीर्थ हिन्दुओं के चार धामों में से एक है। इसके अलावा यहाँ स्थापित शिवलिंग 




द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है भारत के उत्तर मे काशी की जो मान्यता है , वही दक्षिण में रामेश्वरम् की है। रामेश्वरम चेन्नई से लगभग 560 कि.मी.  , मदुरै से 175 कि.मी. एवं तिरूवनन्तपुरम् से 375 कि.मी. है। यह हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से चारों ओर से घिरा हुआ एक सुन्दर शंख आकार का द्वीप है। बहुत पहले यह द्वीप भारत की मुख्य भूमि के साथ जुड़ा हुआ था , परन्तु बाद में सागर की लहरों ने इस मिलाने वाली कड़ी को काट डाला , जिससे वह चारों ओर पानी से घिरकर टापू बन गया। यहाँ भगवान राम ने लंका पर चढ़ाई करने से पूर्व एक पत्थरों के सेतु का निर्माण करवाया था , जिसपर चढ़कर वानर सेना लंका पहुँची व वहाँ विजय पाई। बाद में राम ने विभीषण के अनुरोध पर धनुषकोटि नामक स्थान पर यह सेतु तोड़ दिया था। आज भी इस 48 कि.मी लंबे आदि- सेतु के अवशेष सागर में दिखाई देते हैं । यहाँ के मन्दिर के तीसरे प्रकार का गलियारा विश्व का सबसे लम्बा और सुन्दर गलियारा है। रामेश्वरम् के विख्यात मन्दिर की स्थापना के बारें में यह रोचक कहानी कही जाती है -- सीताजी को छुड़ाने के लिए श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई की थी। उन्होने लड़ाई के बिना सीताजी को छुड़वाने का बहुत प्रयत्न किया , पर जब राम को सफलता नहीं मिली तो विवश होकर उन्होने युद्ध किया। इस युद्ध में रावण और उसके सब साथी राक्षस मारे गये। रावण भी मारा गया और अन्ततः

सीताजी को मुक्त कराकर श्रीराम वापस अयोध्या लौटे। इस युद्ध हेतु राम को वानर सेना सहित सागर पार करना था , जो अत्यधिक कठिन कार्य था। रावण भी साधारण राक्षस नहीं था। वह पुलस्त्य महर्षि का नाती था। चारों वेदों का जाननेवाला था और  शिवजी का बड़ा भक्त था , इस कारण रामजी  को , उसे मारने के बाद , बड़ा खेद हुआ। ब्रह्मा-हत्या का पाप श्रीरामजी को लग गया। इस पाप को धोने के लिए उन्होने रामेश्वरम् में शिवलिंग की स्थापना करने का निश्चय किया। यह निश्चय करने के बाद श्रीराम ने हनुमानजी को आज्ञा दी कि काशी जाकर वहाँ से एक शिवलिंग ले आओ। हनुमानजी पवन-सुत थे। बड़े वेग से आकाश मार्ग से चल पड़े , लेकिन शिवलिंग की स्थापना की नियत घड़ी पास आ गई। हनुमान का कहीं पता न था। जब सीताजी ने देखा कि हनुमान के लौटने मे देर हो रही है , तो उन्होने समुद्र के किनारे के रेत को मुट्ठी में बाँधकर एक शिवलिंग बना दिया। यह देखकर राम बहुत प्रसन्न हुए और नियत समय पर , इसी शिवलिंग की स्थापना कर दी गई। छोटे आकार का यही शिवलिंग रामनाथ कहलाता है ; बाद में हनुमानजी के आने पर ,  पहले छोटे प्रतिष्ठित छोटे शिवलिंग के पास ही राम ने काले पत्थर के उस बड़े शिवलिंग को स्थापित कर दिया। ये दोनों शिवलिंग इस तीर्थ के मुख्य मन्दिर में आज भी पूजित हैं। यही मुख्य शिवलिंग ज्योतिर्लिंग है।

एक मान्यता यह भी है कि अयोध्या के राजा भगवान श्री राम ने लंकापति रावण से युद्ध करने से पहले विजय की कामना लिए हुए इसी स्थान पर रेत का शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की साधना की थी। जिसके बाद भगवान शिव यहाँ ज्योति रूप में प्रकट हुए। 

सेतु का पौराणिक संदर्भ यह है ---

पूरे भारत , दक्षिण पूर्व एशिया और पूर्व एशिया के कई देशों में हर साल दशहरे पर और राम के जीवन पर आधारित सभी तरह के नृत्य-नाटकों में सेतु बंधन का वर्णन किया जाता है। राम के बनाए इस पुल का वर्णन रामायण में तो है ही , महाभारत में भी , श्री राम के नल सेतु का जिक्र आया है। कालीदास की रघुवंश में सेतु का वर्णन है। अनेक पुराणों में भी श्रीरामसेतु का विवरण आता है। एन्साइक्लोपीडिया ब्रिटेनिका में इसे एडम्स ब्रिज के साथ-साथ राम सेतु कहा गया है। नासा और भारतीय सेटेलाइट से लिए गए चित्रों में धनुषकोडि से जाफना तक जो एक पतली सी द्वीपों की रेखा दिखती है , उसे ही आज रामसेतु के नाम से जाना जाता है। इसी पुल को बाद में एडम्स ब्रिज का नाम मिला। यह सेतु तब पाँच दिनों में ही बन गया था। इसकी लंबाई 100 योजन व चौड़ाई 10 योजन थी। इसे बनाने में उच्च तकनीक का प्रयोग किया गया था ।रामेश्वरम् शहर और रामनाथजी का प्रसिद्ध मन्दिर इस टापू के उत्तर के छोर पर है। टापू के दक्षिणी कोने में धनुषकोटि नामक तीर्थ है ,

जहाँ हिंद महासागर से बंगाल की खाड़ी मिलती है। इसी स्थान को

सेतुबंध कहते है। लोगों का विश्वास है कि श्रीराम ने लंका पर चढाई करने के लिए समुद्र पर जो सेतु बांधा था , वह इसी स्थान से आरंभ हुआ। इस कारण धनुष-कोटि का धार्मिक महत्व बहुत है। यही से कोलम्बो को जहाज जाते थे। अब यह स्थान चक्रवाती तूफान में बहकर समाप्त हो गया है।

गन्धमादन पर्वत --- रामेश्वरम् शहर से करीब डेढ़ मील , उत्तर-पूर्व में , गंधमादन पर्वत नाम की एक छोटी-सी पहाड़ी है। हनुमानजी ने इसी पर्वत से समुद्र को लांघने के लिए छलांग मारी थी। बाद में राम ने लंका पर चढ़ाई करने के लिए यहीं पर विशाल सेना संगठित की थी। इस पर्वत पर एक सुन्दर मन्दिर बना हुआ है , जहाँ श्रीराम के चरण-चिन्हों की पूजा की जाती है। इसे पादुका मन्दिर कहते हैं।

रामेश्वरम् की यात्रा करनेवालों को हर जगह राम -कहानी की गूंज सुनाई देती है। रामेश्वरम् के विशाल टापू का चप्पा-चप्पा भूमि राम की कहानी से जुड़ी हुई है। किसी जगह पर राम ने सीताजी की प्यास बुझाने के लिए धनुष की नोंक से कुआँ खोदा था , तो कहीं पर उन्होनें सेनानायकों से सलाह की थी। कहीं पर सीताजी ने अग्नि-प्रवेश किया था तो किसी अन्य स्थान पर श्रीराम ने जटाओं से मुक्ति पायी थी। ऐसी सैकड़ों कहानियाँ प्रचलित है। यहाँ राम-सेतु के निर्माण में लगे ऐसे पत्थर भी मिलते हैं , जो पानी पर तैरते हैं। मान्यता अनुसार नल-नील नामक दो वानरों ने उनको मिले वरदान के कारण जिस पाषाण शिला को छूआ , वो पानी पर तैरने लगी और सेतु के काम आयी। एक अन्य मतानुसार ये दोनों सेतु-विद्या जानते थे।

आदि-सेतु --- रामेश्वरम् से करीब  10 कि.मी.दक्षिण में एक स्थान है , जिसे ‘दर्भशयनम्’ कहते है ; यहीं पर राम ने पहले समुद्र में सेतु बांधना शुरू किया था। इस कारण यह स्थान आदि सेतु भी कहलाता है।

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 साभार एक विमर्श.... यूं तो #भारत ने दुनिया को बहुत कुछ दिया है।लेकिन आज #योग और #आयुर्वेद पर चर्चा कर रहे हैं।ऐसे माहौल में जब #एलोपैथी ने ...