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Friday, September 20, 2024

इस्लाम की शिक्षाओं से कभी भी दुनिया में विकास नहीं हो सकता।

 इस्लाम की शिक्षाओं से कभी भी दुनिया में विकास नहीं हो सकता।


दुनिया में 58 मुस्लिम देश हैं। लगभग 5 मुस्लिम देश केवल और केवल तेल बेचकर ही अपना विकास कर पाए क्योंकि एकमात्र तेल ही उनके विकास का आधार है।


जो चार देश तेल बेचकर थोड़ा बहुत समृद्ध भी हैं उन देशों में वहां की जनता आज भी शैक्षिक रूप से पिछड़ी हुई है।


ईरान और साऊदी जैसे मुस्लिम देशों की 7०% अर्थव्यवस्था केवल तेल से चलती है। तेल बेचकर जो डालर कमाया उसी से इन देशों ने विदेशों से इंजीनियरिंग और सहायता मांग के अपने देश को थोड़ा बहुत विकसित सा कर दिया।


जिस दिन तेल समाप्त हो गया ये देश दादा आजम के जमाने में चले जाएंगे।


इस्लाम की शिक्षा में ना तो गणित है और ना ही विज्ञान और ना ही नैतिक शिक्षा।


तलाक़, हलाला, कुर्बानी और केवल जेहाद करना तथा दुनिया में केवल इस्लाम की सत्ता यही एकमात्र इस्लाम की शिक्षा का उद्देश्य है।


इस्लाम में औरतों की शिक्षा को हराम माना गया है और उन्हें बस केवल भोग और बच्चे पैदा करने की मशीन माना गया है।


दुनिया के 40 मुस्लिम देश तो ऐसे हैं जहां हर समय अशांति ही फैली हुई है।


सबसे बड़ी बात यह है कि जिन देशों में ९५% से उपर मुस्लिम हैं और पूरी तरह इस्लाम का राज है वहां भी अब तक गडे हुए मुर्दे ना तो कब्रों से बाहर निकले और ना ही उनके जन्नत और दोजख में जाने का फैसला हो पाया।


आज भी वहां मुस्लिम संगठन छोटे छोटे आतंकवादी गुटों में बंटकर एक दूसरे को ७२ हूरों के पास भेजने पर लगे हैं।


इस्लाम के भीतर टालरेंट नाम का शब्द नहीं है। यदि आप इस्लाम विरोधी बातों को तर्क के साथ किसी मुस्लिम के सामने रखेंगे तो वह आक्रोशित हो जाएगा।


कूरान में स्पष्ट रूप से लिखा हुआ है, गैर मुस्लिम  तुम्हारे सबसे बड़े दुश्मन हैं और उनसे युद्ध करो।


मूर्ति पूजकों से दूर रहो और उन्हें इस्लाम में लाओ और यदि वे ऐसा ना करें तो उनके साथ भी युद्ध करो।

गैर इस्लामिक महिलाओं को पहले मुस्लिम बनाकर इमान में लाओ और फिर उनसे निकाह करो।


युद्ध में लूटा गया धन और महिलाओं तुम्हारी हैं। ये जो 72 हूरों वाली कल्पनाएं खलिफाओं की है, युद्ध में जब विरोधी मारे जाएंगे तो उनकी बीवियां और बच्चियों को जो कि युद्ध में जीती गयी हैं उन्हें ही इन आतंक के सरगनाओं के अनुसार 72 हूरें कहा जाता है।


दुनिया के अधिकांश इस्लामिक देश अशांत हैं। इस्लाम को मानने वाले कभी भी मानसिक रूप से खुश नहीं रहते और केवल उनका एक ही उद्देश्य है दुनिया में इस्लाम की सत्ता जो कि कभी होगा ही नहीं।


संसार में एक नियम है, कि जब कोई प्रजाति जंगल में अधिक हो जाती है तो उसे समाप्त करने वाली दूसरी प्रजाति पैदा हो जाती है।


इस्लाम की वैचारिक सोच में अब घुन लग चुका है और इस्लाम के भीतर ही इस्लाम विरोधी शक्तियां पैदा हो गयी है।


अरब का शेख इसका उदाहरण है।

साऊदी में हिंदू मंदिर खुल चुका है और महिलाओं पर धीरे-धीरे अब पाबंदियां हटने लगी है।


ईरान में बुर्के का विरोध हो रहा है।

सनातन धर्म अब सक्रिय हो चुका है।

अधिकांश मुस्लिमों के पूर्वज भी सनातनी हिंदू थे और अब उनका डी एन ए भी इस्लाम के विरुद्ध सक्रिय हो चुका है।


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अफगान छोड़ कर जितने भी भागे थे सब के सब पुरुष और नौजवान भागे। एक भी महिला या बच्चा भागते हुए नजर नहीं आया।

 अफगान छोड़ कर जितने भी भागे थे सब के सब पुरुष और नौजवान भागे। एक भी महिला या बच्चा भागते हुए नजर नहीं आया।


क्या ऐसा मुमकिन है, कि घर पर और सर पर मौत मंडरा रही हो और आप अपनी मां , बहन, बीवी और बच्चों को छोड़कर भाग जाएं? आप भाग जाएं सो तो भाग जाएं किंतु क्या घर के बाकी सदस्य यूं ही घर पर हाथ पर हाथ धरे बैठे रह सकते हैं? क्या एक भी बच्चा, एक भी महिला, एक भी बूढ़ी औरत, एक भी जवान लड़की अपनी जान बचाने की कोशिश में न भागेगी? भागेगी अवश्य भागेगी बल्कि वह आपको अपने साथ ले कर भागेगी या तो आपको घर में छुपा कर खुद घर के दरवाजे पर प्रहरी बनकर खड़ी हो जायेगी। 


मगर अफगानिस्तान में ऐसा कुछ नहीं हुआ। बल्कि ठीक इसके विलोम हुआ, इससे साफ जाहिर होता है कि अफगानिस्तान में भागने और भगाने का जो भी नाटक हुआ वह एक पूर्व नियोजित योजना के तहत हुआ है और घर की औरतों और मर्दों की आपसी सहमती से हुआ है। औरतों को अफगान में ही रह कर अपना घर अपनी जमीन संभालने का फर्ज बख्शा गया है और पुरुषों को दूसरे देशों में जाकर शरण लेने की कवायद में लगाया गया है ताकि वे वहां मुस्लिम ताकत में अपनी ताकत जोड़ सकें और गजवा ए हिंद को दुनिया भर में प्रसारित कर सकें। यह भी एक तरह का जिहाद है जिसे बड़ी चालाकी और करीने से तैयार किया गया है।


ताज्जुब होता है भागने वालों को एकदम खाली हाथ भागते हुए देखकर , किसी के भी हाथ में कुछ भी नहीं है। मैंने तो इतिहास में आज तक ऐसे भगोड़े न देखे हैं और न ही सुने हैं। दूसरी बात इनका देश छोड़कर भागना वैसे भी शक पैदा करता है जबकि यह भागना बिना किसी मारकाट, लूट खसोट और ब्लातकारों के भी हुआ है। देखा जाए तो तालिबान ने अफगान पर कब्जा किया नहीं है बल्कि साफ साफ दिख रहा है कि अफगानिस्तान सरकार ने अफगान को तालिबान के हाथों में सौंप दिया है, बिना किसी लड़ाई के बिना किसी फसाद के। तालिबानियों ने भी ज्यादा कहर तो अफगानिस्तान पर ढहाए ही नहीं, औरतों को घसीटा ही नहीं, उनकी आबरू लूटी ही नहीं , बच्चों को काटा ही नहीं, औरतों के बाजार सजाए ही नहीं,मर्दों गले रेते ही नहीं, उन्हें चौराहों पर लटकाया ही नहीं तब ऐसा क्या कारण हुआ कि ये अफगानी पठान अचानक भगोड़े शरणार्थी बनकर अफगान छोड़ कर भागने लगे।


साजिश है बहुत बड़ी साजिश है और यह साजिश भारत के दुश्मन देशों ने मिलकर पाकिस्तान की अगुवाई में भारत के खिलाफ की है और इसमें अहम भूमिका उनकी भी है जो लोग जमीन से भारतीय हैं किंतु जमीर से पाकिस्तानी हैं। 


भारत के हर एक हिंदू और गैर मुस्लिम को इस साजिश को समझना होगा और साथ ही साथ समझना यह भी होगा कि अब हाथ पर हाथ धरे बैठे रहना बहुत खतरनाक होगा, अब अहिंसा के साधक बने रहना बहुत घातक होगा, अब इंतजार करना बहुत जौखिमपूर्ण होगा। 


हिंदुओं को अब पूरी सामर्थ्य के साथ भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का विप्लव आरंभ कर देना चाहिए और इस क्रांति में हमें एक बार अपना तन, मन और धन न्योछावर करना चाहिए। भारत के उन बुद्धि जीवियों के संदेश जरा ध्यान से पढ़िए जो तालिबान को अफगान की आजादी की लड़ाई जीतने की बधाई दे रहे हैं।तब क्या हम हिंदुओं को हिंदुस्तान की आजादी की लड़ाई नहीं लगनी चाहिए। जब वे लोग एक लोकतंत्र अफगानिस्तान को खत्म कर शरिया कानून को वहां लागू करने को वहां की स्वतंत्रता कह रहे हैं तब हिंदू क्यों नहीं इस तथाकथित लोकतंत्र को हिंदू तंत्र में बदल सकता?


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🙏*संत की संगति🙏

 ‼️🙏जय श्री हरि 🙏‼️


🙏*संत की संगति🙏


एक जंगल में एक संत अपनी कुटिया में रहते थे।

एक किरात (शिकारी), जब भी वहाँ से निकलता संत को प्रणाम ज़रूर करता था।

एक दिन किरात संत से बोला की बाबा मैं तो मृग का शिकार करता हूँ,

आप किसका शिकार करने जंगल में बैठे हैं.?

संत बोले - श्री कृष्ण का, और फूट फूट कर रोने लगे।

किरात बोला अरे, बाबा रोते क्यों हो ?

मुझे बताओ वो दिखता कैसा है ? मैं पकड़ के लाऊंगा उसको।

संत ने भगवान का वह मनोहारी स्वरुप वर्णन कर दिया....कि वो सांवला सलोना है, मोर पंख लगाता है, बांसुरी बजाता है।

किरात बोला: बाबा जब तक आपका शिकार पकड़ नहीं लाता, पानी भी नही पियूँगा।

फिर वो एक जगह जाल बिछा कर बैठ गया...

3 दिन बीत गए प्रतीक्षा करते करते, दयालू ठाकुर को दया आ गयी, वो भला दूर कहाँ है,

बांसुरी बजाते आ गए और खुद ही जाल में फंस गए।

किरात तो उनकी भुवन मोहिनी छवि के जाल में खुद फंस गया और एक टक शयाम सुंदर को निहारते हुए अश्रु बहाने लगा,

जब कुछ चेतना हुयी तो बाबा का स्मरण आया और जोर जोर से चिल्लाने लगा शिकार मिल गया, शिकार मिल गया, शिकार मिल गया,और ठाकुरजी की ओर देख कर बोला,

अच्छा बच्चु .. 3 दिन भूखा प्यासा रखा, अब मिले हो,

और मुझ पर जादू कर रहे हो।

कृष्ण उसके भोले पन पर रीझे जा रहे थे एवं मंद मंद मुस्कान लिए उसे देखे जा रहे थे।

किरात, कृष्ण को शिकार की भांति अपने कंधे पे डाल कर और संत के पास ले आया।

बाबा,

आपका शिकार लाया हुँ... बाबा ने जब ये दृश्य देखा तो क्या देखते हैं किरात के कंधे पे श्री कृष्ण हैं और जाल में से मुस्कुरा रहे हैं।

संत के तो होश उड़ गए, किरात के चरणों में गिर पड़े, फिर ठाकुर जी से कातर वाणी में बोले -

हे नाथ मैंने बचपन से अब तक इतने प्रयत्न किये, आप को अपना बनाने के लिए घर बार छोडा, इतना भजन किया आप नही मिले और इसे 3 दिन में ही मिल गए...!!

भगवान बोले - इसका तुम्हारे प्रति निश्छल प्रेम व कहे हुए वचनों पर दृढ़ विश्वास से मैं रीझ गया और मुझ से इसके समीप आये बिना रहा नहीं गया

भगवान तो भक्तों के,संतों के आधीन ही होतें हैं

जिस पर संतों की कृपा दृष्टि हो जाय उसे तत्काल अपनी सुखद शरण प्रदान करतें हैं। किरात तो जानता भी नहीं था की भगवान कौन हैं,

पर संत को रोज़ प्रणाम करता था संत प्रणाम और दर्शन का फल ये है कि 3 दिन में ही ठाकुर मिल गए

यह होता है संत की संगति का परिणाम!!,

जय श्री राधे राधे 🙏🌹🌹

*जय श्री राम*

Thursday, September 19, 2024

मुझे पता है मेरी पोस्ट कुछ मेरे मित्रो को अच्छी नहीं लगती,

 देखो दोस्तों


मुझे पता है मेरी पोस्ट कुछ मेरे मित्रो को अच्छी नहीं लगती,


मैं उनसे यही कहना चाहता हूँ!


ना मै डरपोक हूँ , ना मैं  बाहुबली हूँ ,ना मै घमंडी हूँ 

और ना ही मेरा राजनीती से कोई लेना देना है!


लेकिन मेरे देश और मेरे हिन्दू धर्म के प्रति बहुत साजिसे चल रही है!

देश के बहुत से गद्दार और कुछ महत्वकांशी नेता और  कुछ  हिन्दू चापलूस लोग देश मे शान्ति , देश मे उन्नति और

देश का विकास नहीं देख पा रहे है!


मैं कुछ दिनों से देख रहा हूँ

जो भी अच्छा हो रहा है देश मे उसका विरोध करना

इस सबकी आदत पड़ गई है!


सब महान हस्ती कहती है देश मे मुस्लिम अल्पसंख्यक खतरे मे है , बेरोजगार  है

क्या कभी इन महान हस्तियों ने कहा धार्मिक हिन्दुओं की  हत्या हो रही है लव जिहाद करके हिन्दू लड़कियों से निकाह करके उन्हें मार कर फैक देते है!


इन महान हस्तियों को कई बार  दीपावली पर पटाखों पर ज्ञान देते , होली पर रंगों से नुकसान और पानी की बर्बादी पर भी ज्ञान देते सुना , नवरात्री मे मायक से शोर पर भी ज्ञान देते सुना ,

पर कभी इन  महान हस्तियों को मुस्लिम लोगो की अजान से सुबह की नींद ख़राब करने का सुना जो की सुबह 4 बजे से रात तक 5  बार होती है शोर मचाया जाता है!


हमारी गौ माता लाखो की संख्या मे रोज कटती है 

ईद पर बेजुबान जानवरो  का कतल किया जाता है खून ही खून हो जाता है उसमे पानी बर्बाद नहीं होता यह कहते सुना है!


मंदिर मे पुजारी को दान नहीं दे सकते पेटी मे दान करो और पेटी का पैसा सरकार का होगा जब पुजारी को पैसा नहीं मिलेगा तो घर कैसे चलायेगा और जब पुजारी नहीं होगा तो मंदिर मे पूजा कौन करेगा यह सोची समझी साजिश है और मस्जिद मे हाफिज और काजी को सरकारी तनख्वाह मिलती है और इनकी दरगह , मस्जिद सब सरकार से मुक्त है!हर जुम्मे को मस्जिद मे देश विरोधी और हिन्दू विरोधी बातो पर अमल होता है 


सब देख और सुनकर मेरा दिल भी देश की ऐसी दशा देखकर बदल गया है!  मुझे अब ना किसी से कुछ लेना है और ना देना है जो देश और हिंदुत्व का सोचेगा वही मेरा मित्र और भाई है और किसी को बुरा लगे 100 बार लगे 

जो सत्य है सही है वही पोस्ट करूँगा,


मरे हिन्दुओं के ज़मीर को जगाता रहूँगा 

देशहित की बात करता रहूँगा!

इन महान हस्तियों और अल्पसंख्यक लोगो का जो अब बहुसंख्यक हो कर भी 

सब कुछ रियायत,कानून और रोजगार चाहते है!


इन सबका विरोध और बहिष्कार करता हूँ , करता रहूँगा


यह मुस्लिम खाने मे थूक कर,मूत कर खिलाते है

हिन्दू लड़कियों को भगा कर लें जा रहे है

हमारी धार्मिक आस्था को ठेस पंहुचा रहे है


कश्मीर मे आंतकवादीयों को पैसो से मदद कर रहे है!

हिन्दू विरोधी  साजिसे कर रहे है

फिर भी कियूं मर रहे हो इनसे रिश्ता रखने को 


जाग जाओ मेरे हिन्दू दोस्तों अभी भी समय है अपने हिंदुत्व का स्वभिमान बनाये रखो!


वरना  अपनी आने वाली पीढ़ी हिन्दू नहीं रह पायेगी!


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हिंदू क्यों गुलाम हुआ ?

 हिंदू क्यों गुलाम हुआ ?


समय न हो तो भी, एक बार तो अवश्य पढें ।


मुग़ल बादशाह शाहजहाँ लाल किले में तख्त-ए-ताऊस पर बैठा हुआ था । 


तख्त-ए-ताऊस काफ़ी ऊँचा था । उसके  एक तरफ़ थोड़ा नीचे अग़ल-बग़ल दो और छोटे-छोटे तख्त लगे हुए थे । एक तख्त पर मुगल वज़ीर दिलदार खां बैठा हुआ था और दूसरे तख्त पर मुगल सेनापति सलावत खां बैठा था । सामने सूबेदार, सेनापति, अफ़सर और दरबार का खास हिफ़ाज़ती दस्ता मौजूद था । 


उस दरबार में इंसानों से ज्यादा क़ीमत बादशाह के सिंहासन तख्त-ए-ताऊस की थी । तख्त-ए-ताऊस में 30 करोड़ रुपए के हीरे और जवाहरात लगे हुए थे । इस तख्त की भी अपनी कथा व्यथा थी । 


तख्त-ए-ताऊस का असली नाम मयूर सिंहासन था । 300 साल पहले यही मयूर सिंहासन देवगिरी के यादव राजाओं के दरबार की शोभा था । यादव राजाओं का सदियों तक गोलकुंडा के हीरों की खदानों पर अधिकार रहा था । यहां से  निकलने वाले बेशक़ीमती हीरे, मणि, माणिक, मोती मयूर सिंहासन के सौंदर्य को दीप्त करते थे । 


समय चक्र पलटा, दिल्ली के क्रूर सुल्तान अलाउदद्दीन खिलजी ने यादव राज रामचंद्र पर हमला करके उनकी अरबों की संपत्ति के साथ ये मयूर सिंहासन भी लूट लिया । इसी मयूर सिंहासन को फारसी भाषा में तख्त-ए-ताऊस कहा जाने लगा ।

 

दरबार का अपना सम्मोहन होता है और इस सम्मोहन को राजपूत वीर अमर सिंह राठौर ने अपनी पद चापों से भंग कर दिया । अमर सिंह राठौर शाहजहां के तख्त की तरफ आगे बढ़ रहे थे । तभी मुगलों के सेनापति सलावत खां ने उन्हें रोक दिया । 


सलावत खां - ठहर जाओ अमर सिंह जी, आप 8 दिन की छुट्टी पर गए थे और आज 16वें दिन तशरीफ़ लाए हैं । 


अमर सिंह - मैं राजा हूँ । मेरे पास रियासत है फौज है, मैं किसी का गुलाम नहीं । 


सलावत खां - आप राजा थे ।अब सिर्फ आप  हमारे सेनापति हैं, आप मेरे मातहत हैं । आप पर जुर्माना लगाया जाता है । शाम तक जुर्माने के सात लाख रुपए भिजवा दीजिएगा । 


अमर सिंह - अगर मैं जुर्माना ना दूँ  ।


सलावत खां- (तख्त की तरफ देखते हुए) हुज़ूर, ये काफि़र आपके सामने हुकूम उदूली कर रहा है । 


अमर सिंह के कानों ने काफि़र शब्द सुना । उनका हाथ तलवार की मूंठ पर गया,  तलवार बिजली की तरह निकली और सलावत खां की गर्दन पर गिरी ।


मुगलों के सेनापति सलावत खां का सिर जमीन पर आ गिरा । अकड़ कर बैठा सलावत खां का धड़ धम्म से नीचे गिर गया ।  दरबार में हड़कंप मच गया । वज़ीर फ़ौरन हरकत में आया और शाहजहां का हाथ पकड़कर उन्हें सीधे तख्त-ए-ताऊस के पीछे मौजूद कोठरीनुमा कमरे में ले गया । उसी कमरे में दुबक कर वहां मौजूद खिड़की की दरार से वज़ीर और बादशाह दरबार का मंज़र देखने लगे ।


दरबार की हिफ़ाज़त में तैनात ढाई सौ सिपाहियों का पूरा दस्ता अमर सिंह पर टूट पड़ा था । देखते ही देखते अमर सिंह ने शेर की तरह सारे भेड़ियों का सफ़ाया कर दिया ।


बादशाह - हमारी 300 की फौज का सफ़ाया हो गया्,  या खुदा ।


वज़ीर - जी जहाँपनाह ।


बादशाह - अमर सिंह बहुत बहादुर है, उसे किसी तरह समझा बुझाकर ले आओ । कहना, हमने माफ किया ।


वज़ीर - जी जहाँपनाह ।


हुजूर, लेकिन आँखों पर यक़ीन नहीं होता । समझ में नहीं आता, अगर हिंदू इतना बहादुर है तो फिर गुलाम कैसे हो गया ? 


बादशाह - सवाल वाजिब है, जवाब कल पता चल जाएगा ।


अगले दिन फिर बादशाह का दरबार सजा ।


शाहजहां - अमर सिंह का कुछ पता चला ।


वजीर- नहीं जहाँपनाह, अमर सिंह के पास जाने का जोखिम कोई नहीं उठाना चाहता है ।  


शाहजहां - क्या कोई नहीं है जो अमर सिंह को यहां ला सके ?


दरबार में अफ़ग़ानी, ईरानी, तुर्की, बड़े बड़े रुस्तम-ए-जमां मौजूद थे, लेकिन कल अमर सिंह के शौर्य को देखकर सबकी हिम्मत जवाब दे रही थी । 


आखिर में एक राजपूत वीर आगे बढ़ा,  नाम था अर्जुन सिंह । 


अर्जुन सिंह - हुज़ूर आप हुक्म दें, मैं अभी अमर सिंह को ले आता हूँ । 


बादशाह ने वज़ीर को अपने पास बुलाया और कान में कहा, यही तुम्हारे कल के सवाल का जवाब है ।


हिंदू बहादुर है लेकिन वह इसीलिए गुलाम हुआ । देखो, यही वजह है ।


अर्जुन सिंह अमर सिंह के रिश्तेदार थे । अर्जुन सिंह ने अमर सिंह को धोखा देकर उनकी हत्या कर दी । अमर सिंह नहीं रहे लेकिन उनका स्वाभिमान इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में प्रकाशित है । इतिहास में ऐसी बहुत सी कथाएँ हैं जिनसे सबक़ लेना आज भी बाकी है । 


शाहजहाँ के दरबारी, इतिहासकार और यात्री अब्दुल हमीद लाहौरी की किताब बादशाहनामा से ली गईं ऐतिहासिक कथा ।


कृप्या इस संदेश को अपने मित्रों को शेयर करें ।


70 साल में हिंदू नहीं समझा कि एक परिवार देश को मुस्लिम राष्ट्र बनाना चाहता है

😡

 5 साल में मुसलमान समझ गया कि मोदी हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहता हैं।

😷😷


 देश के दो टुकड़े कर दिए गये, मगर कही से कोई आवाज नहीं आई?😒


आधा कश्मीर चला गया कोई शोर नहीं?😒


तिब्बत चला गया कही कोई विद्रोह नहीं हुआ?😒आरक्षण, एमरजेंसी, ताशकंद, शिमला, सिंधु जैसे घाव दिए गये मगर किसी ने उफ्फ नहीं की ?😒


2G स्पेक्ट्रम, कोयला, CWG, ऑगस्टा वेस्टलैंड, बोफोर्स जैसे कलंक लगे मगर किसी ने चूँ नहीं की?😒


वीटो पावर चीन को दे आये कही ट्रेन नहीं रोकी.😒


लाल बहादुर जैसा लाल खो दिया किसी ने मोमबत्ती जलाकर सीबीआई जाँच की मांग नहीं की?😒


माधवराव, राजेश पायलट जैसे नेता मार दिये, कोई फर्क नहीं?😒


परन्तू जैसे ही गौ मांस बंद किया, प्रलय आ गई..🙁


जैसे ही राष्ट्रगान अनिवार्य किया चींख पड़े..😕


वंदे मातरम्, भारत माता की जय बोलने को कहा तो जीभ सिल गई..🙁


नोटबंदी, GST पर तांडव करने लगे..🙁


आधार को निराधार करने की होड़ मच गई..😕


अपने ही देश में शरणार्थी बने कश्मीर के पंडितो पर किसी को दर्द नहीं हुआ..☹️


रोहिंग्या मुसलमानो के लिये दर्द फूट रहा हैं।😠


किसी ने सच ही कहा था:

देश को डस लिया ज़हरीले नागो ने, घर को लगा दी आग घर के चिरागों ने।


विचार करना...... काग्रेस ने हिन्दूओ को नामर्द बना दिया है👆


आतंकवाद के कारण कश्मीर में बंद हुए व तोड़े गए कुल 50 हजार मंदिर खोले व बनवाये जाएंगे*

- केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी


बहुत अच्छी खबर है, 

पर 50 हजार? 😳

ये आंकड़ा सुनकर ही मन सुन्न हो गया

एक चर्च की खिड़की पर पत्थर पड़े या मस्जिद पर गुलाल पड़ जाए

तो मीडिया सारा दिन हफ्तों तक बताएगी

पर एक दो एक हजार नहीं,,,

बल्कि पूरे 50 हजार मंदिर बंद हो गए

इसकी भनक तक किसी हिन्दू को न लगी ? 😒


पहले हिन्दुओ को घाटी से जबरन भगा देना,

फिर हिंदुत्व के हर निशान को मिटा देना,

सोचिए कितनी बड़ा षड्यंत्र था..

पूरी घाटी से पूरे धर्म को जड़ से खत्म कर देने का ? 😕🙁


अगर मोदी सरकार न आती तो शायद ही ये बात किसी को पता चलती !😞


वामपंथी पत्रकारों, मुस्लिम बुद्धिजीवियों और कांग्रेस और उसके चाटुकारो ने कभी इस मुद्दे को देश के समक्ष क्यो नही रखा?🙁


*यह है कांग्रेस की उपलब्धि और वामपंथी पत्रकारों और मुस्लिम बुद्धिजीवियों की चतुराई कि आम हिन्दू अपने इतिहास से अनभिज्ञ रहा.🙁*


ऐसा लगता है की पूरी कायनात जैसे साज़िशें कर रही थी और इतनी शांति से कि हमें पता न चले।।


🙏जय भारत महान  

झुकेगा सारा जहान🙏

🙏 हर हर महादेव🙏

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Tuesday, September 17, 2024

हम जुठा व बासी नही खाते.....!!

 हम जुठा व बासी नही खाते.....!!


 अगली बार ये कहने से पहले सोचियेगा..!!


कुछ दिन पहले एक परिचित मित्र मुझे पार्टी के लिये एक मशहूर रेस्टोरेंट में ले गये।


मैं अक़्सर बाहर खाना खाने से कतराता हूँ किन्तु मित्र का सामाजिक दबाव तले जाना पड़ा।


आजकल पनीर खाना रईसी की निशानी है इसलिए उन्होंने कुछ डिश पनीर की ऑर्डर की।


 प्लेट में रखे पनीर के अनियमित टुकड़े मुझे कुछ अजीब से लगे। ऐसा लगा की उन्हें कांट छांट कर पकाया है।


मैंने वेटर से कुक को बुलाने के लिए कहा, कुक के आने पर मैंने उससे पूछा पनीर के टुकड़े अलग अलग आकार के व अलग रंगों के क्यों हैं तो उसने कहा ये स्पेशल डिश है।


मैंने कहा की मैँ एक और प्लेट पैक करवा कर ले जाना चाहता हूं लेकिन वो मुझे ये डिश बनाकर दिखाये।


सारा रेस्टोरेंट अकबका गया...?


बहुत से लोग थे जो खाना रोककर मुझे  देखने लगे...


स्टाफ तरह तरह के बहाने करने लगा। आखिर वेटर ने पुलिस के डर से बताया की अक्सर लोग प्लेटों में खाना,सब्जी सलाद व रोटी इत्यादी छोड़ देते हैं।


 रसोई में वो फेंका नही जाता। पनीर व सब्जी के बड़े टुकड़ों को इकट्ठा कर दुबारा से सब्जी की शक्ल में परोस दिया जाता है।

 

प्लेटों में बची सलाद के टुकड़े दुबारा से परोस दिए जाते है । प्लेटों में बचे सूखे  चिकन व मांस के टुकड़ों को काटकर करी के रूप में दुबारा पका दिया जाता है। बासी व सड़ी सब्जियाँ भी करी की शक्ल में छुप जाती हैं...


ये बड़े बड़े होटलों का सच है। अगली बार जब प्लेट में खाना बचे तो उसे इकट्ठा कर एक प्लास्टिक की थैली में साथ ले जाएं व बाहर जाकर उसे या तो किसी जानवर को दे दें या स्वयं से कचरेदान में फेकेँ 


वरना क्या पता आपका जुठा खाना कोई और खाये या आप किसी और कि प्लेट का बचा खाना खाएं।


एक बार मैं दिल्ली गया था एक यजमान के बुलाने पर उनके साथ.....


लंबी यात्रा के बाद हम सभी को कड़ाके की भूख लगी थी सो एक साफ से दिखने वाले  रेस्टोरेंट पर रुक गये । समय नष्ट ना करने के लिए खाना मंगाई गया....


एक साफ से ट्रे में दाल, सब्जी,चावल, रायता व साथ एक टोकरी में रोटियां आई।


पहले कुछ कौर में ध्यान नही गया फिर मुझे कुछ ठीक नही लगा। मुझे रोटी में खट्टेपन का अहसास हुआ, फिर सब्जी की ओर ध्यान दिया तो देखा सब्जी में हर टुकड़े का रंग अलग अलग सा था। चावल चखा तो वहां भी माजरा गड़बड़ था।


सारा खाना छोड़ दिया।


फिर काउंटर पर बिल पूछा यो 650 का बिल थमाया।


मैंने कहा 'भैया! पैसे तो दूँगा लेकिन एक बार आपके रसोई देखना चाहता हूं" वो अटपटा गया और पूछने लगा "क्यों?"*


मैंने कहा "जो पैसे देता है उसे देखने का हक़ है कि खाना साफ बनता है या नहीँ?


इससे पहले की वो कुछ समझ पाता मैंने होटल की रसोई की ओर रुख किया।


आश्चर्य की सीमा ना रही जब देखा रसोई में कोई खाना नहीं पक रहा था। एक टोकरी में कुछ रोटियां पड़ी थी। फ्रिज खोला तो खुले डिब्बों में अलग अलग प्रकार की पकी हुई सब्जियां पड़ी हुई थी।


कुछ खाने में तो फफूंद भी लगी हुई थी।*


फ्रिज से बदबू का भभका आ रहा था।


डांटने पर रसोइये ने बताया की सब्जियां करीब एक हफ्ता पुरानी हैं। परोसने के समय वो उन्हें कुछ तेल डालकर कड़ाई में तेज गर्म कर देता है और धनिया टमाटर से सजा देता है।


रोटी का आटा 2 दिन में एक बार ही गूंधता है।


कई कई घण्टे जब बिजली चली जाती है तो खाना खराब होने लगता है तो वो उसे तेज़ मसालों के पीछे छुपाकर परोस देते हैं। रोटी का आटा खराब हो तो उसे वो नॉन बनाकर परोस देते हैं।


मैंने रेस्टोरेंट मालिक से कहा कि "आप भी कभी यात्रा करते होंगे, इश्वेर करे जब अगली बार आप भूख से बिलबिला रहे हों तो आपको बिल्कुल वैसा ही खाना मिले जैसा आप परोसते हैं


उसका चेहरा स्याह हो गया....


आज आपको खतरो, धोखों व ठगी से सिर्फ़ जागरूकता ही बचा सकती है क्योंकी भगवान को भी दुष्टों ने घेर रखा है।


भारत से सही व गलत का भेद खत्म होता जा रहा है....


हर दुकान व प्रतिष्ठान में एक कोने में भगवान का बड़ा या छोटा मंदिर होता है, व्यपारी सवेरे आते ही उसमे धूप दीप लगाता है, गल्ले को हाथ जोड़ता है और फिर सामान के साथ आत्मा बेचने का कारोबार शुरू हो जाता है!!!


भगवान से मांगते वक़्त ये नही सोचते की वो स्वयं दुनिया को क्या दे रहे हैं....!!


जागरूक बनिये...!!

और कोई चारा नही है...!!

Monday, September 16, 2024

✅डीप स्टेट अपने दलालों को बड़ी प्लानिंग के साथ प्रोजेक्ट करता है

 ✅✅डीप स्टेट अपने दलालों को बड़ी प्लानिंग के साथ प्रोजेक्ट करता है


जेलेन्सकी  को भी डीप स्टेट और कैंब्रिज एनालिटिका ने बड़ी प्लानिंग के साथ यूक्रेन की राजनीति में प्रोजेक्ट किया 


जेलेन्सकी कॉमेडियन थे फिर उनका इमेज मेकओवर किया गया 


वह अक्सर जिम में जाते थे आम लोगों से मिलते थे कभी बस में सफर करते थे कभी ट्रेन में सफर करते थे इस तरह उनकी एक छवि बनाई गई और इस काम में कुछ यूट्यूबर चैनल और कुछ पत्रकारों को खरीदा गया 


और आज जेलेन्सकी ने  यूक्रेन का क्या हाल कर दिया वह पूरी दुनिया देख रही है 


बस एक जिद की यूक्रेन NATO में जाएगा जैसे राहुल गांधी की  सोच की जातिगत जनगणना करने से भारत की सभी समस्याएं खत्म हो जाएंगे


 वैसे ही जेलेन्सकी  की  सोच की यूक्रेन के नाटो में जाने से यूक्रेन की सारी समस्याएं खत्म हो जाएगी


और यूक्रेन का हालत देखीये


 ना माया मिली ना राम 


ना नाटो में गया कोई सुरक्षा मिली क्रीमिया  पहले ही चला गया तीन और प्रदेश रूस ने ले लिए पूरे यूक्रेन को खंडहर बना दिया


आज जो आप शहजादे का जगह-जगह एक्टिविटी देख रहे हैं कि कभी डीटीसी बस में कभी जिम में कभी लोकल ट्रेन में यह सब ब्रिटेन की वही इमेज बिल्डिंग एजेंसी कैंब्रिज एनालिटिका और जॉर्ज सोरेस  की संस्था के साथ मिलकर किया जा रहा है


 आखिर आप खुद सोचिए जब 10 साल ये सत्ता में थे तब क्या आपको  कभी बस में ट्रेन में जिम में या सड़क पर नजर आए थे ?


और तो और जब मुंबई में 26/ 11 का भीषण हमला हुआ था उसे दिन खुलासा हुआ कि  अपने दोस्तों के साथ पार्टी कर रहे थे वह घटनास्थल पर गए ही नहीं 


यह सब एक बड़ी प्लानिंग के साथ किया जा रहा है यह साइकोलॉजी का खेल है इसमें यह दिखाने की कोशिश की जाती है कि यह व्यक्ति आप लोगों से जुड़ा हुआ है जबकि हकीकत बिल्कुल उल्टा है आप कभी इसके घर में जाने की हिम्मत भी नहीं कर सकते आप कभी उनसे यूं ही बात करने की हिम्मत नहीं कर सकते क्योंकि उनके आसपास कोई आम व्यक्ति जा ही नहीं सकता और यह जो तथाकथित वीडियो रिलीज किया जाता है यह सब एक प्री प्लांड होता है एक्टिंग होता है  पहले से कैमरा सेटअप सब तैयार रहता है और यह पूरा एक विदेशी मीडिया एजेंसी के सलाह के साथ हो रहा है


 वरना आप खुद सोचिए जब मोनी बाबा प्रधानमंत्री थे तब ये कभी आम लोगों के बीच कभी डीटीसी की बस में कभी ट्रेन में कभी खेतों में क्यों नहीं नजर आते थे ?


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