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Sunday, September 15, 2024

आज की कहानी : #दो_कुत्ते...!?

 आज की कहानी : #दो_कुत्ते...!?


एक गांव में एक किसान रहता था।

उसके पास  "दो-बैल" और "दो-कुत्ते" थे।

एक बार उसे किसी बेहद जरूरी काम के लिए गांव से बाहर जाना था किंतु उसकी समस्या यह थी कि खेत जोतने का भी समय हो गया था...!


तब किसान ने उस समस्या का समाधान निकाला, उसने अपने बैलों और कुत्तों को बुलाकर कहा कि,

"मैं कुछ दिनों के लिए गांव से बाहर जा रहा हूं,

मेरे लौटने तक तुम लोग सारे खेत जोतकर रखना ताकि लौटने पर खेतों में बीज बो सकूं...!"


बैलों और कुत्तों ने स्वीकृति में सिर हिलाया।


किसान चला गया और बैलों ने किसान के कहे अनुसार खेत जोतना शुरू कर दिया, लेकिन कुत्ते आवारागर्दी करते हुए पूरे गाँव में घूम-घूम कर समय बिताते रहे।


बैलों ने किसान के लौटने से पहले पूरा खेत जोत दिया।


जब कुत्तों ने देखा कि खेतों की जुताई हो गई है और मालिक के लौटने का समय हो गया है

तब कुत्तों ने बैलों से कहा कि तुम दोनों इतने दिनों से खेत जोत रहे हो और काफी थक गए हो इसलिए घर जाकर आराम करो और हम लोग खेतों की रखवाली करेंगे।


कुत्तों की बात मानकर दोनों बैल घर चले गए और आराम करने लगे।

इधर कुत्तों ने सारे खेतों में दौड़-दौड़ करके अपने पैरों के निशान बना दिए, और खेत के किनारे बैठकर किसान का इंतजार करने लगे।

थोड़ी देर में किसान भी वापस गांव आ गया और सीधा खेतों पर पहुंचा तो देखा ...दोनों कुत्ते वहां पर बैठे हैं, खेतों की जुताई भी हो गई है, परंतु बैल कहीं नजर नहीं आ रहे हैं...!


किसान ने कुत्तों से पूछा कि, "बैल कहां हैं ?"


कुत्तों ने कहा, "मालिक! आप जबसे गए हैं, तभी से हम लोग खेत जोत रहे हैं और अभी काम पूरा करके आपका इंतजार कर रहे हैं। जबकि, बैल घर से बाहर निकलकर खेतों की ओर झांकने भी नहीं आए, वह घर पर ही आराम से सो रहे हैं।"


मालिक ने खेतों में जाकर देखा तो उसे हर तरफ कुत्तों के पैरों के निशान मिले, वह कुत्तों के उपर बहुत प्रसन्न हुआ और कुत्तों के साथ घर लौटा तो देखा कि बैल घर के बाहर बैठे हुए आराम कर रहे थे।


किसान बैलों के उपर बहुत क्रोधित हुआ और बैलों को रस्सी से बांध कर उनकी पिटाई कर दी। 

कुत्तों को खाने के लिए दूध रोटी और मांस के टुकड़े दिए और बैलों को खाने के लिए सुखा हुआ भूसा दिया।


इतिहास के जानकार बताते हैं कि,

यह जो

महात्मा गांधी रोड,

नेहरू युनिवर्सिटी,

इंदिरा एयरपोर्ट और ऐसे अनेकों जगह नेहरू और गांधी का नाम देखते हो ये कुछ वैसे ही कुत्तों के पैरों के निशान हैं और वे आजादी के बाद से ही दूध मलाई खा रहे हैं।


जबकि रानी लक्ष्मी बाई, तात्या टोपे, लाला लाजपत राय, वीर सावरकर, महारानी अवंतीबाई लोधी, सुभाष चन्द्र बोस, रामप्रसाद बिस्मिल, भगतसिंह, चंद्रशेखर आजाद, खुदीराम बोस...!

जैसे "सात लाख बहत्तर हजार असली सेनानियों"

के परिवार को रुखी-सूखी घास ही मिली है ।


बस यही है स्वाधीनता संग्राम में गांधी-नेहरू का योगदान।

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एक जमाना था...

 एक जमाना था...


खुद ही स्कूल जाना पड़ता था क्योंकि साइकिल बस आदि से भेजने की रीत नहीं थी, स्कूल भेजने के बाद कुछ अच्छा बुरा होगा ऐसा हमारे मां-बाप कभी सोचते भी नहीं थे... 

उनको किसी बात का डर भी नहीं होता था,

🤪 पास/नापास यही हमको मालूम था... *%* से हमारा कभी भी संबंध ही नहीं था...

😛 ट्यूशन लगाई है ऐसा बताने में भी शर्म आती थी क्योंकि हमको ढपोर शंख समझा जा सकता था...

🤣🤣🤣

किताबों में पीपल के पत्ते, विद्या के पत्ते, मोर पंख रखकर हम होशियार हो सकते हैं ऐसी हमारी धारणाएं थी...

☺️☺️ कपड़े की थैली में...बस्तों में..और बाद में एल्यूमीनियम की पेटियों में...

किताब कॉपियां बेहतरीन तरीके से जमा कर रखने में हमें महारत हासिल थी.. .. 

😁 हर साल जब नई क्लास का बस्ता जमाते थे उसके पहले किताब कापी के ऊपर रद्दी पेपर की जिल्द चढ़ाते थे और यह काम...

एक वार्षिक उत्सव या त्योहार की तरह होता था..... 

🤗  साल खत्म होने के बाद किताबें बेचना और अगले साल की पुरानी किताबें खरीदने में हमें किसी प्रकार की शर्म नहीं होती थी..

क्योंकि तब हर साल न किताब बदलती थी और न ही पाठ्यक्रम...

🤪 हमारे माताजी पिताजी को हमारी पढ़ाई  बोझ है..

ऐसा कभी  लगा ही नहीं....  

😞  किसी एक दोस्त को साइकिल के अगले डंडे पर और दूसरे दोस्त को पीछे कैरियर पर बिठाकर गली-गली में घूमना हमारी दिनचर्या थी....

इस तरह हम ना जाने कितना घूमे होंगे....


🥸😎 स्कूल में मास्टर जी के हाथ से मार खाना, पैर के अंगूठे पकड़ कर खड़े रहना, और कान लाल होने तक मरोड़े जाते वक्त हमारा ईगो कभी आड़े नहीं आता था.... सही बोले तो ईगो क्या होता है यह हमें मालूम ही नहीं था...

🧐😝  घर और स्कूल में मार खाना भी हमारे दैनंदिन जीवन की एक सामान्य प्रक्रिया थी.....


मारने वाला और मार खाने वाला दोनों ही खुश रहते थे... 

मार खाने वाला इसलिए क्योंकि कल से आज कम पिटे हैं और मारने वाला  इसलिए कि आज फिर हाथ धो लिए 😀......


😜 बिना चप्पल जूते के और किसी भी गेंद के साथ लकड़ी के पटियों से कहीं पर भी नंगे पैर क्रिकेट खेलने में क्या सुख था वह हमको ही पता है... 


😁 हमने पॉकेट मनी कभी भी मांगी ही नहीं और पिताजी ने कभी दी भी नहीं....

.इसलिए हमारी आवश्यकता भी छोटी छोटी सी ही थीं....साल में कभी-कभार दो चार बार सेव मिक्सचर मुरमुरे का भेल, गोली टॉफी खा लिया तो बहुत होता था......उसमें भी हम बहुत खुश हो लेते थे.....

😲 छोटी मोटी जरूरतें तो घर में ही कोई भी पूरी कर देता था क्योंकि परिवार संयुक्त होते थे ..

🥱 दिवाली में लगी पटाखों की लड़ी को छुट्टा करके एक एक पटाखा फोड़ते रहने में हमको कभी अपमान नहीं लगा...


😁  हम....हमारे मां बाप को कभी बता ही नहीं पाए कि हम आपको कितना प्रेम करते हैं क्योंकि हमको आई लव यू कहना ही नहीं आता था...

😌 आज हम दुनिया के असंख्य धक्के और टाॅन्ट खाते हुए......

और संघर्ष करती हुई दुनिया का एक हिस्सा है..किसी को जो चाहिए था वह मिला और किसी को कुछ मिला कि नहीं..क्या पता.. 

😀 स्कूल की डबल ट्रिपल सीट पर घूमने वाले हम और स्कूल के बाहर उस हाफ पेंट मैं रहकर गोली टाॅफी बेचने वाले की  दुकान पर दोस्तों द्वारा खिलाए पिलाए जाने की कृपा हमें याद है.....

वह दोस्त कहां खो गए , वह बेर वाली कहां खो गई....

वह चूरन बेचने वाली कहां खो गई...पता नहीं.. 


😇  हम दुनिया में कहीं भी रहे पर यह सत्य है कि हम वास्तविक दुनिया में बड़े हुए हैं हमारा वास्तविकता से सामना वास्तव में ही हुआ है...


🙃 कपड़ों में सलवटें ना पड़ने देना और रिश्तों में औपचारिकता का पालन करना हमें जमा ही नहीं......

सुबह का खाना और रात का खाना इसके सिवा टिफिन में अखबार में लपेट कर रोटी ले जाने का सुख क्या है, आजकल के बच्चों को पता ही नही  ...

😀 हम अपने नसीब को दोष नहीं देते....जो जी रहे हैं वह आनंद से जी रहे हैं और यही सोचते हैं....और यही सोच हमें जीने में मदद कर रही है.. जो जीवन हमने जिया...उसकी वर्तमान से तुलना हो ही नहीं सकती ,,,,,,,,


😌  हम अच्छे थे या बुरे थे नहीं मालूम , पर हमारा भी एक जमाना था


🙏 और Most importantly , आज संकोच से निकलकर , दिल से अपने साक्षात देवी _देवता तुल्य , प्रात स्मरणीय , माता  _ पिता , भाई एवं बहन को कहना चाहता हूं कि मैं आपके अतुल्य लाड, प्यार , आशीर्वाद , लालन पालन व दिए गए संस्कारो का ऋणी हूं 🙏,

🙏🏻☺😊

एक बात तो तय मानिए को जो भी👆🏻 पूरा पढ़ेगा उसे अपने बीते जीवन के कई पुराने सुहाने पल अवश्य याद आयेंगे।🙏🏻

Saturday, September 14, 2024

एक बार एक विमान का एक सफाईकर्मी सफाई कर रहा था

 एक बार एक विमान का एक सफाईकर्मी सफाई कर रहा था .


विमान में उसके अलावा कोई नहीं था.सफाई के दौरान उसके हर्ष का ठिकाना ना रहा, जब उसने विमान के कॉकपिट में एक किताब देखी, जिसका शीर्षक था,


* मात्र एक दिन मे प्लेन उड़ाना कैसे सीखें *


उसकी बचपन की दबी इच्छा शायद आज पूरी होने वाली थी.


उसने पहला पृष्ठ खोला:


"इंजन स्टार्ट करने के लिए, लाल बटन दबाएं .."


उसने ऐसा ही किया, और हवाई जहाज का इंजन चालू हो गया ..


वह खुश हुअा और अगले पृष्ठ को खोला ...


"हवाई जहाज को चलाने के लिए, नीला बटन दबाएं .."


उसने ऐसा किया और विमान ने एक अद्भुत, अविश्वसनीय गति से आगे बढ़ना शुरू कर दिया ...


मगर वह तो उड़ना चाहता था उड़ना, इसलिए उसने तीसरा पृष्ठ खोला जिसमें कहा गया था:


*हवाई जहाज को उडा़ने के लिए, कृपया हरा बटन दबाए.*


उसने ऐसा किया और विमान उड़ने लगा। वह उत्साहित था ... !!


उड़ान भरने के 20 मिनट बाद, वह संतुष्ट था और अब उतरना चाहता था इसलिए उसने चौथे पेज पर जाने का फैसला किया ...


चौथे पेज मे लिखा था,


*आप विमान उड़ाने मे पारंगत हो चुके हैं. अब अगर आप यह भी सीखना चाहते हों कि किसी उड़ते विमान को उतारा कैसे जाए, तो कृपया किसी पास वाली पुस्तक की दुकान से इस किताब का द्वितीय पार्ट ( वॉल्यूम 2 ) खरीद लें!"


.


.


.


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सीख :: जिसका काम उसी को साजे...* कभी भी पूरी जानकारी के बिना कोई पंगा नहीं लेना चाहिए .

*महिला सम्मान* *( पुनः प्रेषित)*

 *महिला सम्मान* *( पुनः प्रेषित)*

******************

_साल था 1959 जगह थी अमृतसर, जब भारतीय सेना के कुछ अधिकारी और उनकी पत्नियाँ अपने एकसहकर्मी को छोड़ने के लिए रेलवे स्टेशन गए हुए थे।  कुछ मनचलों ने महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी की औरउनके साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की। सेना के अधिकारियों ने उन गुंडों का पीछा किया जो पास केसिनेमा थिएटर में शरण लिए हुए थे !


 _मामले की सूचना कमांडिंग ऑफिसर कर्नल ज्योति मोहन सेन को दी गई थी, घटना के बारे में जानने परकर्नल ने सिनेमा हॉल को सैनिकों से घेरने का आदेश दिया,  सभी गुंडों को घसीट कर बाहर निकाला गयाऔर गुंडों का सरदार इतना मदमस्त और सत्ता के नशे में चूर था...  जो कोई और नहीं बल्कि तत्कालीनप्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के करीबी सहयोगी और पंजाब के मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरों के बेटे थे !_


 सभी गुंडों को उनके अंडरवियर उतारकर अमृतसर की सड़कों पर घुमाया गया और बाद में छावनी में नजरबंदकर दिया गया,  अगले दिन मुख्यमंत्री क्रोधित हो गए और उन्होंने अपने बेटे को भारतीय सेना की कैद सेछुड़ाने की कोशिश की !


            तुम्हें पता है क्या हुआ?


 उनके वाहन को वीआईपी वाहन के रूप में छावनी में जाने की अनुमति नहीं दी गई, उन्हें कर्नल से मिलने केलिए पूरे रास्ते पैदल चलने के लिए मजबूर किया गया...  क्रोधित मुख्यमंत्री कैरों ने पूरे मामले की शिकायतप्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से की !_


 _वे दिन अलग थे जब लोकतंत्र नवजात अवस्था में था, शक्तिशाली होते हुए भी नेताओं में कुछ संकोच औरनैतिकता थी..._

 हैरान तथाकथित भारत रत्न प्रधान मंत्री नेहरू ने अपने विश्वासपात्र प्रताप सिंह कैरों से सवाल करने केबजाय अपने अधिकारियों के आचरण के लिए सेना प्रमुख जनरल थिमय्या से स्पष्टीकरण मांगा...


        तुम्हें पता है क्या उत्तर दिया?


“यदि हम अपनी महिलाओं के सम्मान की रक्षा नहीं कर सकते तो आप हमसे अपने देश के सम्मान की रक्षाकी उम्मीद कैसे कर सकते हैं?"


_नेहरू अवाक रह गये,  वह एक बहादुर सैनिक की कहानी थी जिसने प्रधान मंत्री को चुनौती दी थी।_

यह लेख   "भारतीय सैनिक को सलाम"  पत्रिका में मेजर जनरल ध्रुव सी कटोच द्वारा योगदान दिया गयाथा। 

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Friday, September 13, 2024

मूर्खता की कोई सीमा नही !!

 त्रेता युग में क्षत्रियों का शासन था ! महाभारत काल मे यादव क्षत्रियों का शासन था !!उसके बाद दलित-मौर्य और बौद्धो का राज था !उसके बाद 600 साल मुसलमान बादशाह (अरबी लुटेरों) का राज था  फिर 300 साल अंग्रेज राज था,पिछले 71 वर्षों से अंबेडकर का संविधान राजकाज चला रहा है लेकिन फिर भी सब पर अत्याचार ब्राह्मणों द्वारा किया गया... आश्चर्य किंतु सत्य !!


         मूर्खता की कोई सीमा नही !!


         ब्राह्मणों को गाली देना , कोसना , उन्हें कर्मकांडी , पाखंडी , लालची , भ्रष्ट, ढोंगी जैसे विशेषणों के द्वारा अपमानित करना आजकल ट्रेंड में है !


कुछ लोग ब्राह्मणों को सबक सिखाना चाहते हैं , कुछ उन्हें मंदिरों से बाहर कर देना चाहते हैं


. वगैरह-वगैरह !!


         कुछ कथित रूप से पिछड़े लोगों को लगता है कि ब्राह्मणों की वजह से ही वो 'पिछड़े' रह गये, दलितों की अपनी दलीलें हैं , कभी - कभी अन्य जातियों के लोगों के श्रीमुख से भी इस तरह की बातें सुनने को मिल जाती हैं !!


         आमतौर से ये धारणा फैलाई जा रही है कि ब्राह्मणों की वजह से समाज पिछड़ा रह गया , लोग अशिक्षित रह गये, समाज जातियों में बंट गया, देश में अंधविश्वासों को बढ़ावा मिला .. वगैरह - वगैरह !!


         आज , ऐसे सभी माननीयों को हृदय से धन्यवाद देते हुए हम आपको जवाब दे रहे हैं ... हम वैधानिक चेतावनी के साथ कि , हम किसी प्रकार की जातीय श्रेष्ठता में विश्वास नहीं रखते !!


         लेकिन आप जान लीजिये , - वो कौटिल्य , जिसने संपूर्ण मगध साम्राज्य को संकटों से मुक्ति दिलाई , देश में जनहितैषी सरकार की स्थापना कराई , भारत की सीमाओं को ईरान तक पहुंचा दिया और कालजयी ग्रन्थ


 'अर्थशास्त्र' की रचना की (जिसे आज पूरी दुनिया पढ़ रही है) वो कौटिल्य ब्राह्मण थे !!

          आदि शंकराचार्य जिन्होंने संपूर्ण हिंदू समाज को एकता के सूत्र में बांधने के प्रयास किये, 8वीं सदी में ही पूरे देश का भ्रमण किया , विभिन्न विचारधाराओं वाले तत्कालीन विद्वानों-मनीषियों से शास्त्रार्थ कर उन्हें हराया, देश के चार कोनों में चार मठों की स्थापना कर हर हिंदू के लिए चार धाम की यात्रा का विधान किया , जिससे आप इस देश को समझ सकें वो शंकराचार्य ब्राह्मण थे !!


         कर्नाटक के जिन लिंगायतों को कांग्रेसी हिंदूओं से अलग करना चाहतें हैं , उनके गुरु और लिंगायत के संस्थापक - बसव - भी ब्राह्मण थे !!


         भारत में सामाजिक - वैचारिक उत्थान , विभिन्न जातियों की समानता , छुआछूत - भेदभाव के खिलाफ समाज को एक करने वाले भक्ति आंदोलन के प्रमुख संत रामानंद , (जो केवल "कबीर" के ही नहीं बल्कि "संत रैदास" के भी "गुरु" थे) ब्राह्मण थे !!


आज 


दिल्ली में जिस भव्य अक्षरधाम मंदिर के दर्शन करके दलितों समेत सभी जातियों के लोग खुद को धन्य मानते हैं, उस मंदिर की स्थापना करने वाला स्वामीनारायण संप्रदाय है जिसके जनक घनश्याम पांडेय भी ब्राह्मण थे !!


         वक्त के अलग-अलग कालखंड मे 

हिंदू समाज में व्याप्त हो चुकी बुराईयों को दूर करने के लिए 'आर्य समाज' व 'ब्रह्म समाज' के रूप में जो दो बड़े आंदोलन देश में खड़े हुए , इन दोनों के ही जनक क्रमश: "स्वामी दयानंद सरस्वती व राजा राममोहन राय" ( जिन्होंने हमें सती प्रथा से मुक्ति दिलाई ) ब्राह्मण थे !


भारत में विधवा विवाह की शुरुआत कराने वाले "ईश्वरचंद्र विद्यासागर" भी ब्राह्मण थे,


 इन सभी संतों ने जाति - पांति , छुआछूत, भेदभाव के खिलाफ समाज को जागरुक करने में अपना जीवन खपा दिया - लेकिन समाज नहीं सुधरा !!


         भगवान श्रीराम  की महिमा को ' " रामचरित मानस " ' के जरिये घर-घर में पहुंचाने वाले "तुलसीदास" और भगवान श्रीकृष्ण  की भक्ति की लहर पैदा करने वाले वल्लभाचार्य भी ब्राह्मण थे !


 ये भी याद रखिये - मंदिरों में ब्राह्मणों का वर्चस्व था , जैसा कि आप लोग कहते हैं,फिर भी भारत में भगवान परशुराम (ब्राह्मण) के मंदिर सामान्यत: नहीं मिलते ये है ब्राह्मणों की भावना !!


         विदेशी आधिपत्य के खिलाफ सबसे पहले विद्रोह का बिगुल बजाने संन्यासियों में से अधिकांश लोग ब्राह्मण थे ,


 अंग्रेजों की तोपों के सामने सीना तानने वाले


मंगल पांडेय , रानी लक्ष्मीबाई


अंग्रेज अफसरों के लिए दहशत का पर्याय बन चुके चंद्रशेखर आजाद , फांसी के फंदे पर झूलने वाले राजगुरु - ये सभी ब्राह्मण थे !!


         वंदेमातरम जैसी कालजयी रचना से पूरे देश में देशभक्ति का ज्वार पैदा करने वाले बंकिमचंद्र चटर्जी , जन-गण-मन के रचयिता रविंद्रनाथ टैगोर ब्राह्मण , देश के पहले आईएएस (तत्कालीन ICS) सत्येंद्रनाथ टौगोर भी ब्राह्मण


 स्वतंत्रता आंदोलन के नायक गोपालकृष्ण गोखले ( गांधी जी के गुरु ), बाल गंगाधर तिलक, राजगोपालाचारी ब्राह्मण। भारत के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्रियों में स्वर्गीय " श्री अटल बिहारी वाजपेयी "  भी ब्राह्मण !!


         नेहरु सरकार से त्यागपत्र देने वाले पहले मंत्री , जिन्होंने पद की बजाय जनहित के लिए संघर्ष का रास्ता चुना और कश्मीर के सवाल पर अपने प्राणों की आहुति दी - वो डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी ब्राह्मण बीजेपी के सबसे बड़े सिद्धांतकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय हिंदू समाज की एकता , जातिविहीन समाज की स्थापना और सांस्कृतिक गौरव की पुनर्स्थापना के लिए खड़ा हुआ दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ - की नींव एक गरीब ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखने वाले पूज्य *डॉ. हेडगेवार जी ने डाली थी उन्होंने अपने खून का कतरा-कतरा हिंदूओं को ताकत देने और उन्हें एकसूत्र में पिरोने में खपा दिया , केवल ब्राह्मणों की चिंता नहीं की संघ के दूसरे सरसंघचालक - डॉ. गोलवलकर -जिन्होंने संपूर्ण हिंदू समाज को ताकत देने के लिए सारा जीवन समर्पित कर दिया - वो भी ब्राह्मण !!

         यही नहीं , देश में पहली कम्यूनिस्ट सरकार केरल में बनाने वाले नंबूदरीपाद* समेत मार्क्सवादी आंदोलन के कई प्रमुख रणनीतिकार ब्राह्मण ही थे। समकालीन नेताओं की बात करें तो तमिलनाडु में *जयललिता ब्राह्मण थीं ,


         मायावती , जिन्होंने 'तिलक-तराजू और तलावर, इनको मारो जूते चार' जैसा अपमानजनक नारा बार-बार लगवाया , उन पर जब लखनऊ के गेस्ट हाउस में सपा के गुंडों ने जानलेवा हमला किया , उन्हें मारा-पीटा, उनके कपड़े फाड़े , और शायद उनकी हत्या करने वाले थे , उस समय जान पर खेलकर उन गुंडों से लड़ने वाले और


 मायावती को सुरक्षित वहां से निकालने वाले " स्वर्गीय ब्रह्मदत्त द्विवेदी " भी ब्राह्मण थे !!


         फिर भी , जिन्हें लगता है कि ब्राह्मण केवल मंदिर में घंटा बजाना जानता है - वो ये भी जान लें कि 


भारत के इतिहास का सबसे महान घुड़सवार योद्धा और सेनानायक - जो 20 साल के अपने राजनीतिक जीवन में कभी कोई युद्ध नहीं हारा , जिसने मुस्लिम शासकों के आंतक से कराहते देश में भगवा पताकाओं को चारों दिशाओं में लहरा दिया और जिसे बाजीराव-मस्तानी फिल्म में देखकर आपने भी तालियां ठोंकी होंगी , - वो बाजीराव बल्लाल भी ब्राह्मण था !!


         तो , ब्राह्मणों को कोसने वाले इतिहास को ठीक से पढ़ लो..!!


         सभी ब्राह्मण बन्धुओं से निवेदन किया जाता है कि अपने पूर्वजों का इतिहास बच्चों को  अवश्य / जरूर बताएं !!


*निवेदक आपका अपना हितैषी* 

*अगर आप ब्राह्मण समाज के सच्चे सपूत हितैषी हो तो ज्यों कि त्यों पोस्ट  ब्राह्मण बन्धुओं को शेयर जरुर करें*

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उत्तराखंड

उत्तराखंड डेमोग्राफी चेंज : देहरादून के 28 हिंदू बाहुल्य गांवों में अल्पसंख्यक हुए हिंदू, तेजी से बढ़ गई मुस्लिम आबादी

दिनेश मानसेरा

Aug 28, 2024, 03:33 pm IST

उत्तराखंड डेमोग्राफी चेंज : देहरादून के 28 हिंदू बाहुल्य गांवों में अल्पसंख्यक हुए हिंदू, तेजी से बढ़ गई मुस्लिम आबादी

 

देहरादून । जिले के पछुवा इलाके के गांव के गांव जो कभी हिंदू बाहुल्य हुआ करते थे अब मुस्लिम बाहुल्य हो गए है।देवभूमि उत्तराखंड में डेमो ग्रैफी चेंज का सबसे बड़ा उदाहरण ,हिमांचल ,हरियाणा और उत्तर प्रदेश के जुड़े इस सीमांत क्षेत्र में प्रवेश लेते ही दिखाई देने लगा है। ऊंची ऊंची मस्जिदों को मिनारे,बड़े बड़े मदरसे यहां की पहचान होते जा रहे है।


उत्तराखंड के देहरादून जिले के  पछुआ यानि पश्चिम क्षेत्र विकासनगर, हरबर्टपुर, सहसपुर, सेलाकुई आदि क्षेत्रों में  कट्टर मुस्लिम संगठनों की सक्रियता भविष्य के लिए चिंता पैदा करने के लिए काफी है। मस्जिदों मदरसों की बढ़ती संख्या और वहां चल रही मुस्लिम संगठनों की गतिविधियां शासन प्रशासन के लिए चुनौतियां पैदा करने लगी है।


हिमाचल यूपी हरियाणा के साथ लगी उत्तराखंड सीमा के पछुवा देहरादून इलाके में योजनाबद्ध तरीके से मुस्लिम आबादी  बढ़ रही है। यहां गांव के गांव मुस्लिम बाहुल्य हो चुके है जबकि बीस साल पहले यहां इक्का दुक्का मुस्लिम परिवार ही रहा करते थे।


28 गांव हिंदू से मुस्लिम बाहुल्य हुए


पछुवा देहरादून के 28 गांव ऐसे है जो राज्य बनने तक  तक हिंदू बाहुल्य थे और अब मुस्लिम बाहुल्य हो चुके है। इनमे ढकरानी, ढालीपुर, कुंजा, कुँजा ग्रंट, कुल्हाल, धर्मावाला, तिमली, बैरागीवाला, जमनीपुर, केदारा वाला, बुलाकीवाला,मेहूवाला खालसा,जीवनगढ़,नवाब गढ़,जसोवाला, माजरी, आमवाला पौंधा, जाटों वाला, सभावाला, कल्याणपुर हसनपुर, शेरपुर,सिंहनीवाला, शीश मबाडा, खुशहालपुर, ढाकी, सहसपुर, लक्ष्मी पुर, रामपुर कलां, शंकर पुर।


इनमे ढकरानों का एक उदाहरण ले तो  1991 में यहां हिंदू आबादी 80 फीसदी थी और 20 प्रतिशत मुस्लिम आबादी थी, 2023 में  यहां 60 फीसदी मुस्लिम और 40 प्रतिशत हिंदू और अन्य की बसावट हो गई है। जो हिंदू नाम के गांव थे और वहां हिंदू ही ज्यादा रहते थे जैसे शंकरपुर, लक्ष्मी पुर, रामपुर ये अब मुस्लिम गांव है।


इन 28 गांवों के अलावा  मुख्य शिमला बाई पास मार्ग,  आसन बैराज मार्ग के दोनो तरफ सरकारी जमीनों पर मुस्लिम आबादी ने अवैध कब्जे कर रखे है। अमलावा ,नौरा, जमुना, कालसी, टोंस आदि नदियों के किनारे जमीनों पर मुस्लिमो के अवैध कब्जे चिन्हित हुए है।


मानसिक अस्पताल, फ्लाई ओवर के नीचे की सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे करने वाले सहारनपुर,मुजफ्फरनगर, बिजनौर आदि जिलों से आए मुस्लिम लोगो ने स्थानीय जन प्रतिनिधियों के संरक्षण में कब्जे किए है। जनप्रतिनिधियों का नाम इस लिए लिया जा रहा है क्योंकि इनके ग्राम प्रधानों ने ग्राम समाज की भूमि पर अवैध रूप से बसावट करवाई है। इनमे से दो ग्राम प्रधानों की प्रशासनिक जांच भी चल रही है।


बताया गया है कि जनसंख्या असंतुलन के ये मामले कांग्रेस शासनकाल में शुरू हुए थे और अब तक जारी है।


पछुवा देहरादून में सौ से ज्यादा मस्जिदें, 46 अवैध मदरसे पिछले कुछ सालो में खड़े हो गए है। इनकी न तो प्रशासन से अनुमति है और न ही प्रशासन ने इन्हे रोकने के लिए कोई जरूरी कदम उठाए है। जबकि सुप्रीम कोर्ट के ये आदेश है कि 2009 के बाद बिना जिलाधिकारी के कोई भी नया धार्मिक स्थल नही बनाया जा सकता और यदि किसी पुराने की मरम्मत भी होगी तो भी उसके लिए अनुमति आवश्यक है। लेकिन यहां बिना किसी रोक टोक आलीशान इमारतें मस्जिदों , मदरसों की बनाई जा रही है।


यहां इस्लामिक कट्टरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मस्जिदों में परिवार रजिस्टर रखे हुए है जिनमे जुम्मे के दिन आने वालों की बकायदा हाजिरी लगाई जाती है जो नही आया तो उसकी पूछताछ की जाती है।


हिंदू विरोधी गतिविधियां


पिछले साल कांवड़ यात्रा के दौरान पथराव, नाबालिग लड़कियों के साथ मुस्लिम युवकों की हरकतों के मामलो में जिस तरह से मुस्लिम सेवा संगठनों और भीम आर्मी से जुड़े मुस्लिम युवकों ने इस्लामिक धार्मिक नारे लगाए उससे ये बात साबित हो जाती है कि यहां अब मुस्लिम कट्टरपंथी अपना स्थान बना रहे है और हिंदू  लोग यहां अल्पसंख्यक हो रहे है और उन्हे प्रताड़ित भी किया जा रहा है।


यहां ढकरानी, सहसपुर हरबर्टपुर रामपुर मंडी सेलाकोई जैसे बड़े बड़े गांव में मुस्लिम समुदाय का राजनीतिक सामाजिक और धार्मिक वर्चस्व हो चुका है।


ये मुस्लिम जनप्रतिनिधि बनकर अपने धर्म के लोगो को यूपी से लाकर यहां ग्राम समाज  की भूमि ,वन भूमि, नदी श्रेणी की भूमि और अन्य सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे करवा कर बसा रहे है, जिनकी जांच हुई तो उसके प्रमाण जिला प्रशासन और विकासनगर प्रशासन को भी मिले है। फर्जी दस्तावेजों से आधारकार्ड बना कर इन्हे सरकारी जमीनों पर कब्जे दिलाए जा रहे है।


ये वही क्षेत्र है जहां से मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाए जाने की मांग उठी थी। जानकारी के मुताबिक कांग्रेस केंद्र साल के शासन काल में यहां की डेमोग्राफी ही बदल गई है। यहां के विधायको, ब्लाक प्रमुखों के कार्यकाल में मुस्लिम तुष्टिकरण,वोट बैंक की राजनीति ने  यहां मुस्लिम आबादी को बढ़ने दिया और अब हालात बेकाबू होते जा रहे है।खनन ,भू संपत्ति कब्जाने ,ड्रग्स और अन्य गैर कानूनी गतिविधियों में लगे मुस्लिम युवाओं को राजनीतिक संरक्षण बेखौफ मिल रहा है।


लव जिहाद की बढ़ती घटनाएं


पिछले दिनों लव जिहाद की घटनाओं में जिस तरह से यहां के मुस्लिम जिहादियों की तरह पेश आए उसे देख पुलिस महकमा भी अचंभित था।


खुले आम पुलिस के अधिकारियों के सम्मुख रॉड तलवार डंडे लेकर मस्जिद में और बाहर सड़क पर जिहादी नारे लगाए गए। पुलिस ने अपनी जांच पड़ताल मे राशिद कबाड़ी और उसके गिरोह की संलिप्तता पाई।यहां मुस्लिम सेवा संगठन ने अपनी जड़े जमा ली है जोकि कथित रूप से  हिंदू जनमानस के खिलाफ माहौल बनाने का काम करता रहा है।


बरहाल पछुवा देहरादून ,जिहादी बारूद के ढेर पर बैठा हुआ बन चुका है। जिसे लेकर हिंदू संगठन बार बार पुलिस प्रशासन को भी चेता रहे है कि यहां अवैध रूप से बसे लोगो को तुरंत हटाया जाए अन्यथा ये लोग एक दिन ऐसा कुछ कर देंगे जिसे लेकर शासन प्रशासन को पछताना पड़ जाएगा।

Take two minutes to read for a brighter future for your next generation

 

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Acharya Rajneesh was questioned by one of his followers.

 👉Question - Please tell what should we do when houses and property are burnt, killings are done by Jihadis? Should we promote Hindu Muslim brotherhood or take any step for our own security? Please guide.👌

 👉Answer - 🙏 Your question is telling your stupidity, 

You don't seem to have learned anything from history.?

When Mahmud Ghaznavi attacked the temple of Somnath, Somnath was the largest and richest temple in India at that time. The 1200 Hindu priests worshiping in that temple thought that God would protect us if we were engaged in meditation-bhakti-puja day and night. He made no arrangements for protection, on the contrary, even the Kshatriyas, who could defend themselves, refused.

As a result, Mahmud killed thousands of unarmed Hindu priests, smashed idols and temples and ran away with much wealth, diamonds, jewels, gold and silver.

Meditation and devotional worship of God could not protect him.

👉Today, hundreds of years later, the same folly continues, you don't seem to have learned anything from the lives of your great men.


👉If meditation was so powerful that it could change the hearts of evil people, then why did Ramachandraji need to carry a bow and arrow with him all the time? By the power of meditation, could he have changed the heart of the demon Ravana?

 Would he have explained Sur-Asura as brothers and the feud would have ended?

But even Rama could not convince anyone and the battle of Rama-Ravana was decided by the weapon itself

 👉If there is so much power in the mind that it can change the mind of others then why did Purnavatar Shri Krishna need to kill Kansa and Jarasangha! He could only change them carefully.

👉If meditation had the power to change the mind of others, the war of Mahabharata would not have happened, Krishna could have replaced Duryodhana with his power of meditation and the war could have been avoided but on the contrary, Krishna stopped Arjuna from wanting to meditate and engaged him in the war.

👉Mahabharata war is the biggest war in history in which crores of people were killed, how many Maharishi saints were there in India in last 1200 years, Shakti from Gorakhnath to Raidas and Kabir to Guru Nanak to Guru Gobind Singh all these Muslim invaders and Britishers attention. During this time millions of Hindus were killed and their religion was forcibly converted at the point of sword.

 He was killed and converted to Islam

 The preaching of those saints could not convert the invaders. Guru Nanak presented his philosophy of religion in such a way that Muslims could easily understand and assimilate it. But in the same Guru tradition, Guru Gobind Singh had to take up the sword against the Muslims, to protect Hinduism, the unarmed Sikhs had to take up arms.

 From this it is clear that through meditation a person can change his consciousness.

 👉But we have to protect ourselves in this matter (physical body), for that we have to take help of science and technology.

Solving more than 70% of the country's problems.👌

Lord Shri Krishna asked for 5 villages!

 We are asking for 5 laws in the interest of the country!!

 👉Equal education👌

 👉Uniform Civil Code👌

 👉Conversion Control👌

 👉Intrusion Control👌

 👉Population control👌

If these five laws do not come, Sanatanadharma will be completely destroyed from the whole world like the nine states of India now.

 Save India Movement

 Movement to save our country and our sisters/daughters

 I know you won't forward this, you'll leave after reading it. I urge you to send a message to at least one person, if you're embarrassed send it back to me, just don't break the chain.

*read if u agree please forward ***🙏🏽


 

 😡🚩😠🚩😡 Today you will know how many Hindus are united!!!!

 Vande Mataram🇮🇳🇮🇳

 Wake up...Hindu.....Wake up.....

 I swear I will send this message to at least ten people.

 Bharat Mataki Jai🙏🏽

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साभार एक विमर्श.... यूं तो #भारत ने दुनिया को बहुत कुछ दिया है

 साभार एक विमर्श.... यूं तो #भारत ने दुनिया को बहुत कुछ दिया है।लेकिन आज #योग और #आयुर्वेद पर चर्चा कर रहे हैं।ऐसे माहौल में जब #एलोपैथी ने ...