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Monday, August 26, 2024

Excellent information about Bhagwan Shri Krishna on this Auspicious Day

 Excellent information about Bhagwan Shri Krishna on this Auspicious Day- 


1) Krishna was born *5252 years  ago* 

2) Date of *Birth* : *18 th July,3228 B.C*

3) Month : *Shravan*

4) Day :  *Ashtami*

5) Nakshatra : *Rohini*

6) Day : *Wednesday*

7) Time : *00:00 A.M.*

8) Shri Krishna *lived 125 years, 08 months & 07 days.*

9) Date of *Death* : *18th February 3102BC.*

10) When Krishna was *89 years old* ; the mega war *(Kurukshetra war)* took place. 

11) He died *36 years after the Kurukshetra* war.

12) Kurukshetra War was *started on Mrigashira Shukla Ekadashi, BC 3139. i.e "8th December 3139BC" and ended on "25th December, 3139BC".*  

12) There was a *Solar eclipse between "3p.m to 5p.m on 21st December, 3139BC" ; cause of Jayadrath's death.*

13) Bhishma died on *2nd February,(First Ekadasi of the Uttarayana), in 3138 B.C.*


14) Krishna  is worshipped as:

(a)Krishna *Kanhaiyya* : *Mathura*

(b) *Jagannath*:- In *Odisha*

(c) *Vithoba*:- In *Maharashtra*

(d) *Srinath*:  In *Rajasthan*

(e) *Dwarakadheesh*: In *Gujarat*

(f) *Ranchhod*: In *Gujarat*

(g) *Krishna* : *Udupi in Karnataka*

h) *Guruvayurappan in Kerala*


15) *Bilological Father*: *Vasudeva*

16) *Biological Mother*: *Devaki*

17) *Adopted Father*:- *Nanda*

18) *Adopted Mother*: *Yashoda*

19 *Elder Brother*: *Balaram*

20) *Sister*: *Subhadra*

21) *Birth Place*: *Mathura*

22) *Wives*: *Rukmini, Satyabhama, Jambavati, Kalindi, Mitravinda, Nagnajiti, Bhadra, Lakshmana*

23) Krishna is reported to have *Killed only 4 people* in his life time. 

(i) *Chanoora* ; the Wrestler

(ii) *Kansa* ; his maternal uncle

(iii) & (iv) *Shishupaala and Dantavakra* ; his cousins. 

24) Life was not fair to him at all. His *mother* was from *Ugra clan*, and *Father* from *Yadava clan,* inter-racial marriage. 

25) He was *born dark skinned.* He was not named at all throughout his life. The whole village of Gokul started calling him the black one ; *Kanha*. He was ridiculed and teased for being black, short and adopted too. His childhood was wrought with life threatening situations.

26) *'Drought' and "threat of wild wolves" made them shift from 'Gokul' to 'Vrindavan' at the age 9.*

27) He stayed in Vrindavan *till 10 years and 8 months*. He killed his own uncle at the age of  10 years and 8 months at Mathura.He then released  his biological mother and father. 

28) He *never returned to Vrindavan ever again.*

29) He had to *migrate to Dwaraka from Mathura due to threat of a Sindhu King ;  Kala Yaavana.*

30) He *defeated 'Jarasandha' with the help of 'Vainatheya' Tribes on Gomantaka hill (now Goa).*

31) He *rebuilt Dwaraka*. 

32) He then *left to Sandipani's Ashram in Ujjain* to start his schooling at age 16~18. 

33) He had to *fight the pirates from Afrika and rescue his teachers son ;  Punardatta*;  who *was kidnapped near Prabhasa* ; a sea port in Gujarat. 

34) After his education, he came to know about his cousins fate of Vanvas. He came to their rescue in ''Wax house'' and later his cousins got married to *Draupadi.* His role was immense in this saga. 

35) Then, he helped his cousins  establish Indraprastha and their Kingdom.


36) He *saved Draupadi from embarrassment.*


37) He *stood by his cousins during their exile.*

38) He stood by them and *made them win the Kurushetra war.*


39) He *saw his cherished city, Dwaraka washed away.* 

40) He was *killed by a hunter (Jara by name)* in nearby forest. 

41) He never did any miracles. His life was not a successful one. There was not a single moment when he was at peace throughout his life. At every turn, he had challenges and even more bigger challenges. 

42) He *faced everything and everyone with a sense of responsibility and yet remained unattached.*


43)  He is the *only person, who knew the past and future ; yet he lived at that present moment always.*


44) He and his life is truly *an example for every human being.*

अजमेर_सेक्स_स्कैंडल

 एक पीढ़ी बदल गई इन 32 सालों में



आज ज्यादातर लोगों को #अजमेर_सेक्स_स्कैंडल के बारे में मालूम ही नहीं होगा

ये भारत का सबसे बड़ा बलात्कार काण्ड था

जिसमें सकड़ों लड़कियों का बलात्कार किया गया था 

शुरुवात #सोफिया_गर्ल्स_कॉलेज से हुई

बलात्कार करने वालों में शामिल थे अजमेर #चिश्ती_की_दरगाह के सदस्य

सोफिया गर्ल्स कॉलेज के अधिकारी और स्थानीय कांग्रेस का एक वरिष्ठ नेता

पहले बलात्कार किया और लड़की की नग्न अवस्था में ही फोटो खींची

फिर लड़की को ब्लैकमेल किया गया

उस लड़की के पूरे परिवार की लड़कियों के साथ बलात्कार हुआ

उनकी फोटो खींचकर उन्हें भी ब्लैकमेल किया गया

ये फोटो जिस जिस के हांथ लगी सबने लड़कियों को ब्लैकमेल किया

उस दौरान अजमेर में शादी विवाह बंद हो गए थे

#अजमेर की हर लड़की को शक की निगाह से देखा जाने लगा था

बलात्कार करने वालों में सभी #मुस्लिम थे

और सभी लड़कियां चिश्ती की दरगाह पर माथा फोड़ने वाले हिन्दू परिवारों से थीं 

लेकिन अंधे और दोगले हिन्दू आज भी #अजमेर_की_दरगाह पर जाते हैं 

इस गिरफ्तारी के बाद भी जाएंगे

क्योंकि उनका जमीर मर चुका है

भगवान श्री कृष्ण जी की सोलह कला

 भगवान श्री कृष्ण जी की सोलह कला 


भगवान श्री कृष्ण जी की सोलह कला 

इन कलाओं के नाम निम्नलिखित हैं।

१. श्री धन संपदा : प्रथम कला धन संपदा नाम से जानी जाती हैं है। इस कला से युक्त व्यक्ति के पास अपार धन होता हैं और वह आत्मिक रूप से भी धनवान हो। जिसके घर से कोई भी खाली हाथ वापस नहीं जाता, उस शक्ति से युक्त कला को प्रथम कला! श्री-धन संपदा के नाम से जाना जाता हैं।

२. भू अचल संपत्ति : वह व्यक्ति जो पृथ्वी के राज भोगने की क्षमता रखता है; पृथ्वी के एक बड़े भू-भाग पर जिसका अधिकार है तथा उस क्षेत्र में रहने वाले जिसकी आज्ञाओं का सहर्ष पालन करते हैं वह कला! भू अचल संपत्ति कहलाती है।

३. कीर्ति यश प्रसिद्धि : जिस व्यक्ति का मान-सम्मान और यश की कीर्ति चारों ओर फैली हुई हो, लोग जिसके प्रति स्वतः ही श्रद्धा और विश्वास रखते हैं, वह कीर्ति यश प्रसिद्धि कला से संपन्न माने जाते हैं।

४. इला वाणी की सम्मोहकता : इस कला से संपन्न व्यक्ति मोहक वाणी से युक्त होता है; व्यक्ति की वाणी सुनकर क्रोधी व्यक्ति भी अपना सुध-बुध खोकर शांत हो जाता है तथा मन में भक्ति की भावना भर उठती हैं।

५. लीला आनंद उत्सव : इस कला से युक्त व्यक्ति अपने जीवन की लीलाओं को रोचक और मोहक बनाने में सक्षम होता है। जिनकी लीला कथाओं को सुनकर कामी व्यक्ति भी भावुक और विरक्त होने लगता है।

६. कांति सौंदर्य और आभा : ऐसे व्यक्ति जिनके रूप को देखकर मन स्वतः ही आकर्षित होकर प्रसन्न हो जाता है, वे इस कला से युक्त होते हैं। जिसके मुखमंडल को देखकर बार-बार छवि निहारने का मन करता है वह कांति सौदर्य और आभा कला से संपन्न होता है।

७. विद्या मेधा बुद्धि : सभी प्रकार की विद्याओं में निपुण व्यक्ति जैसे वेद-वेदांग के साथ युद्ध और संगीत कला इत्यादि में पारंगत व्यक्ति इस काला के अंतर्गत आते हैं।

८. विमला पारदर्शिता : जिसके मन में किसी प्रकार का छल-कपट नहीं होता वह विमला पारदर्शिता कला से युक्त होता हैं। इनके लिए सभी एक समान होते हैं, न तो कोई बड़ा है और न छोटा।

९. उत्कर्षिणि प्रेरणा और नियोजन : युद्ध तथा सामान्य जीवन में जी प्रेरणा दायक तथा योजना बद्ध तरीके से कार्य करता हैं वह इस कला से निपुण होता हैं। व्यक्ति में इतनी शक्ति व्याप्त होती हैं कि लोग उसकी बातों से प्रेरणा लेकर लक्ष्य भेदन कर सकें।

१०. ज्ञान नीर क्षीर विवेक : अपने विवेक का परिचय देते हुए समाज को नई दिशा प्रदान करने से युक्त गुण ज्ञान नीर क्षीर विवेक नाम से जाना जाता हैं। वह सत्य और असत्य को भलीभांति जानकर उनमें भेद करना जानते हो ।

११. क्रिया कर्मण्यता : जिनकी इच्छा मात्र से संसार का हर कार्य हो सकता है तथा व्यक्ति सामान्य मनुष्य की तरह कर्म करता हैं और लोगों को कर्म की प्रेरणा देता हैं।

१२. योग चित्तलय : जिनका मन केन्द्रित है, जिन्होंने अपने मन को आत्मा में लीन कर लिया है वह योग चित्तलय कला से संपन्न होते हैं; मृत व्यक्ति को भी पुनर्जीवित करने की क्षमता रखते हैं।

१३. प्रहवि अत्यंतिक विनय : इसका अर्थ विनय है, मनुष्य जगत का स्वामी ही क्यों न हो, उसमें कर्ता का अहंकार नहीं होता है।

१४. सत्य यथार्य : व्यक्ति कटु सत्य बोलने से भी परहेज नहीं रखता और धर्म की रक्षा के लिए सत्य को परिभाषित करना भी जनता हैं यह कला सत्य यथार्य के नाम से जानी जाती हैं।

१५. ईशानः आधिपत्य : व्यक्ति में वह गुण सर्वदा ही व्याप्त रहती हैं, जिससे वह लोगों पर अपना प्रभाव स्थापित कर पाता है, आवश्यकता पड़ने पर लोगों को अपना प्रभाव की अनुभूति करता है। वह ईश्वर के समान शक्तिशाली एवं सर्व लोकोंके अधिपति होते है।

१६. अनुग्रह उपकार : निःस्वार्थ भावना से लोगों का उपकार करना अनुग्रह उपकार है।

मुस्लिमो का गैर इस्लामिक देश में महत्वपूर्ण योगदान

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मुस्लिमो का गैर इस्लामिक देश में महत्वपूर्ण योगदान  

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१. मुस्लिम आबादी दर हर गैर इस्लामिक देश में गैर मुसलमानों की तुलना में दुगनी रफ़्तार से बच्चे पैदा करते हैं | जिससे अर्थव्यवस्था गड़बड़ा जाती हैं |


२. मुस्लिम आबादी पढाई लिखाई में कोई रूचि नहीं रखती | अंग्रेजी, गणित, विज्ञानं आये ना आये कुरान जरुर बच्चों को पढाई जाती है |


३. मुस्लिम जो व्यवसाय करते हैं वो भी समाज हित के नहीं होते | जैसे बड़े व्यवसायी जो टेनरी चलाते हैं उसकी गंदगी नदियों में बहाते हैं जिस से पानी में आर्सेनिक जैसे जहर की मात्रा बढती जाती हैं |


४. मुस्लिमो की गोस्त की दुकाने आसपास बिमारियां लाती हैं | जानवरों की हत्या अन्न-जल संकट का प्रमुख कारण हैं |


५. जहा मुस्लिम अधिक होते हैं वह संगठित तरीके से रहते हैं और आसपास किसी गैर मुस्लिम को बसने नहीं देते | १०० हिन्दुओ के बीच एक मुस्लिम रह सकता हैं पर १०० मुसलमानों के बीच हिंदू नहीं रह सकता |


६. मुस्लिम संगठित होने की वजह से गैर मुसलमानों से बेवजह झगडा करते हैं, अगर आस पास उनकी संपत्ति होती हैं तो उस पर कब्ज़ा कर लेते हैं जैसा की कश्मीर में हुआ |


७. परिवार में अधिक सदस्य होने से और अशिक्षित होने से छोटे संगठित अपराध करते हैं | जैसे की अनाधिकृत कब्जे, बिजली चोरी, नशीले पदार्थो का धंधा करते हैं |


८. ये छोटे अपराधी जल्द ही बड़े अपराधियों से जा मिलते हैं और ये बड़े अपराधी भी कभी ना कभी उन्ही मुस्लिम बस्तियों से निकल कर आये होते हैं | टाइगर मेनन और दाउद इब्राहीम कासकर और ना जाने कितने अपराधी ऊपर उठे |


९. बड़े अपराधी देश की अर्थ व्यवस्था को बिजली चोरी या अतिक्रमण की तरह छोटा मोटा नुक्सान नहीं पहुचाते बल्कि हजारो करोडो का नुक्सान पहुचाते हैं | जैसे स्टाम्प घोटाले व हवाला कांड का प्रमुख अब्दुल करीम तेलगी १०,००० करोड़ व हसन अली ३६,००० करोड़ इत्यादि रकम कमाते हैं और इसे इस्लामिक मुल्को से गैर इस्लामिक देशो में आतंक हत्या के लिए हथियार प्रशिक्षण पर प्रयोग किया जाता हैं |


१०. वे मुस्लिम जो काफ़िर देश में किये गए अपराध लूट पाट को धार्मिक कृत्य मानते हैं वे और भी तरीको से मुस्लिम लड़के गैर-इस्लामिक देश में जंग के लिए तैयार करते हैं | उनमे से एक सरलतम रास्ता जेहाद का हैं काफ़िर का क़त्ल हर मुस्लिम पर अनिवार्य हैं |


११. कुरान पढ़े बेरोजगार लड़के जेहाद के लिए आसानी से तैयार हो जाते हैं बल्कि अपना सौभाग्य समझते हैं और इस्लामिक देशो में मौजूद अपने रहनुमाओ की मदद से जेहादी बनते हैं |


१२. ये जेहादी देश में समय समय पर बम विस्फोट सामूहिक हत्याए वा दंगे करते हैं | दंगो को कुछ लोगो की शरारत कहा जाता हैं जबकि बम विस्फोट पर कहा जाता हैं की इसका इस्लाम और मुसलमानों से कोई लेना देना नहीं जबकि दोनों ही जेहाद अर्थात धर्मं युद्ध का हिस्सा हैं |


१३. यदि गैर इस्लामी कौमे संगठित होकर धर्मं युद्ध का जवाब देती हैं तो मुस्लिम जोर जोर से हल्ला करना चालु करते हैं के हम पर जुल्म और अत्याचार हो रहा हैं, हम सुरक्षित नहीं इस मुल्क में |


१४. मुसलमानों के संगठित होने की वजह से और हमलावर होने की वजह से नास्तिक राजनैतिक दल मुसलमानों का पक्ष लेने में ही अपनी भलाई समझते हैं जैसे की भारत में कांग्रेस, समाजवादी, कमुनिस्ट दल इत्यादि |


१५. क्योंकि इन दलों का धर्म से, संस्कृति से कोई लेना देना नहीं होता और मुस्लिम समर्थन मिलने पर इन्हें सत्ता का और लालच आ जाता हैं ये मुस्लिम आबादी के बढने में और सहायता करते हैं उनके हर काम में चाहे वो गलत हो या सही, साथ देते हैं |


१६. बंगलादेश से आये ४ करोड़ मुस्लिमो को कांग्रेस ने ना केवल बसाया अपितु उनको जिस कानून (आई. ऍम. टी. डी. एक्ट) की सहायता से निकाला जा सकता था उसे भी खत्म कर दिया |


१७. आतंकवाद के खिलाफ कानून (पोटा एक्ट) बनाना तो दूर रहा, जो कानून था उसको भी खत्म कर दिया |


१८. मुस्लिम नाराज ना हो इस लिए जेहादियों को उच्चतम न्यायालय से दी हुयी को सजा को भी रोके रखते हैं | जैसा की कांग्रेस ने अफजल गुरु की फ़ासी रोक रखी हैं |


१९. गैर मुस्लिमो के इस कथित सेकुलर वर्ग की इस मूर्खता से मुस्लिम खुश होते हैं और और तेजी से आबादी बढ़ाने का उपाए सोचते हैं


२०. इन उपायों में गैर मुस्लिम सम्प्रदाये की लड़कियों को प्यार के झूठे जाल में फसाना होता हैं और उनसे बच्चे पैदा करने होते हैं इन्हें लव जेहादी कहते हैं |


२१. अगर ये लव जेहादी ३-४ हिंदू या ईसाई लडकियो को जिन्हें ये वर्गला-फुसला के भगा लाए थे, खिला (वहन) नहीं कर पाते हैं, तो भोग करने के बाद किसी अधेड उम्र के मुस्लिम को बेच देते हैं अधिकतर वह मुस्लिम बदसूरत ही होते हैं इसीलिए उन्हें इस उम्र तक औरते नहीं मिल पाती |२२.मुस्लिम आबादी बढ़ने के साथ-साथ छोटे-छोटे इस्लामिक क्षेत्रो का भी निर्माण करते हैं | जैसे हिंदू इलाके में अधिक दामों पर कोई एक इमारत खरीद कर लेते हैं और फिर वहा बड़े मुस्लिम परिवार बसा दिए जाते हैं |


२३. ये मुस्लिम लोग आसपास लोगो से आये दिन झगडा करते हैं और धीरे धीरे पडोसियो को अपने घर सस्ते दामों पर किसी मुस्लिम को ही बेचने को मजबूर कर देते हैं इस प्रकार इनकी एक मकान पर खर्च की गयी अतिरिक्त रकम से कही अधिक मुनाफा निकल आता हैं |


२४. मुसलमानों की मस्जिद अक्सर शहर के बीचों-बीच होती हैं ताकि किसी तरह की व्यवस्था बिगडने पर मीनारो की आड़ से पुलिस को देख सके | और जरुरत पड़ने पर खुद पुलिस व्यवस्था पर हमला कर सके |


२५. छोटी मुस्लिम बस्तियाँ ना केवल संगठित होती हैं अपितु हमलावर लोगो से भरी होती हैं | हर घर में देसी तमंचे मिलना सामान्य बात होती हैं |


२६. भारत में नव-निर्मित मुस्लिम बस्तियाँ अक्सर या तो राजमार्गो के किनारे होती हैं या ट्रेन लाइनों के किनारे | राजमार्गो के किनारे बनी मजारो में जिनमे से अधिकतार कुत्ते बिल्लियो की या खाली ही होती हैं हथियार छुपाये रहने की संभावनाओ से इंकार नहीं किया जाता |


२७. यदि गैर-इस्लामिक देश के अगल-बगल में इस्लामिक देश हैं तो समय-समय पर इस्लामिक देश हमला करते रहेंगे जैसा की भारत का पडोसी पाकिस्तान करता रहता है |


२८. ऐसे पडोसी इस्लामिक मुल्क प्रत्यक्ष जीत ना पाने की स्थिति में छदम युद्ध प्रारंभ करते हैं | गैर इस्लामिक मुल्क में मौजूद मुस्लिमो की मदद लेते हैं इस्लामिक एकता के नाम पर |


२९. आबादी में ३० प्रतिशत तक पहुचने पर समय आ जाता मुस्लिमो के लिए के वो काफ़िर देश पर कब्ज़ा कर ले क्यों की संगठित ३०% मत किसी भी लोकतान्त्रिक देश में काफी है सरकार बनाने के लिए या ग्रह युद्ध के माध्यम से कब्ज़ा करने के लिए |


३०. इस सम्भावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता के मुस्लिम पडोसी देश के साथ मिल जाये और बाहर से हमले के समय अंदर से भी हमला कर दे | युद्ध के समय रेल लाइन उखाड दे, तेल पाइपलाइन तोड़ दे राज मार्ग जाम कर दें इत्यादि ताकि सेना को समय पर रसद ना मिले और वो हार जाये |


३१. सेना के हारते ही विदेशी मुस्लिम गैर-इस्लामिक देश में आ जायेंगे और योगदान के अनुसार देसी मुस्लिमो को सत्ता में हिस्सेदारी दे देंगे क्यों की उनकी जीत में उनका भी बड़ा योगदान होगा |


३२. देश को दारुल हरब से दारुल इस्लाम घोषित कर दिया जायेगा | यानि गैर इस्लामिक देश इस्लामिक देशो में से एक हो जायेगा | गैर इस्लामिक देश में क्या क्या होता हैं ये हमें लिखने की जरुरत नहीं फिर भी हम आगे के लेख में बताएँगे |


लेख समीक्षा : आप उपरोक्त लेख पढ़ कर समझ ही चुके होंगे की भारत इस्लामिक देश बनने की कगार पर हैं | सबसे मूल करण मुस्लिम आबादी का हिन्दुओ ईसाइयों और अन्य सभी से दोगुनी रफ़्तार से बढ़ना हैं | इसका दूसरा प्रमुख कारण है भारत का फर्जी सेकुलरवाद जो भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की ओर अग्रसर हैं |


आप ये कहे सकते हैं के घोटाले अपराध भ्रष्टाचार में तो हिंदू भी आंगे हैं तो मुस्लिमो को दोष क्यों देना | हमारा उत्तर हैं के हिंदू भ्रष्टाचार कर के हथियार नहीं खरीदते, ना ही उन हथियारों से वो पाकिस्तान में बम विस्फोट करते हैं ना ही राष्ट्र का ख्याल ना कर के आबादी बढ़ाते हैं | मुस्लिम हर कदम अपनी कौम को ध्यान में रख के उठाते हैं और उनका अंतिम लक्ष्य होता हैं देश का इस्लामीकरण जबकि भ्रष्ट हिंदू को हिंदू राष्ट्र से कोई लेना देना नहीं होता |


आप ये भी सोच रहे होंगे के मुस्लिमो ने देश में बड़ा योगदान किया हैं | जब हम उन गिने चुने लोगो को जानते हैं तो पता चलता हैं वो मुस्लिम हैं ही नहीं | जैसे की अब्दुल कलाम अग्नोस्टिक हैं, अज़ीम प्रेमजी का भी यही हाल हैं, अशफाक उल्ला खान आर्य समाजी थे व हिंदू राष्ट्र का समर्थन करते थे |

मुस्लिमो ने जितना योगदान नहीं किया था, उस से ज्यादा बटवारे के तौर पर ले लिया |


" हिन्दुओ आप अपने आस-पास मुस्लिम गतिविधियाँ देख कर लेख की सत्यता परख सकते हैं ! "

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योगीराज श्री कृष्ण के जीवन चरित्र

 आओ जानें अपने महान पूर्वज योगीराज श्री कृष्ण के जीवन चरित्र को।


 इतिहास में कोई दूसरा व्यक्ति इतना महान नही हुआ जिसे योगेश्वर पुकारा जाता हो। श्री कृष्ण के जन्म के समय भारत खण्ड-खण्ड में विभक्त था।

'गृहे गृहे ही राजानं: स्वस्य स्वस्य प्रियं करा:' अर्थात घर घर राजा हैं और अपने ही हित में लगे हुए हैं।

सम्पूर्ण राष्ट्र को एक सूत्र में बाँधने वाला कोई ना था। कंस, जरासन्ध, शिशुपाल, दुर्योधन आदि जैसे दुराचारी व विलासियों का वर्चस्व बढ़ रहा था। राज्य के दैवीय सिद्धान्त से भीष्म जैसे योद्धा तक बंधे हुए थे।

ऐसी घोर अन्धकार पूर्ण रात्रि में श्री कृष्ण का जन्म हुआ। अपने अद्भुत चातुर्य एवं कौशल से श्रीकृष्ण ने इन राजाओं का विनाश करवाकर युधिष्ठिर को चक्रवर्ती सम्राट बनवाया।


 श्री कृष्ण का चरित्र चित्रण-


1 -  जन्म व छात्रावस्था - श्री कृष्ण का जन्म लगभग 5252  वर्ष पूर्व हुआ। वेद-वेदांग, धनुर्वेद, स्मृति, मीमांसा, न्यायशास्त्र व सन्धि, विग्रह, यान, आसन, द्वैत व आश्रय इन छः भेदों से युक्त राजनीति उनके अध्ययन के विषय थे।


2 - लोकनायकत्व - अरिष्ट नामक पागल बैल व कैशी नामक दुर्दम्य घोड़े को मारकर वे बचपन से ही गौकुल वासियों के नायक बन गए थे।


3 -  संघ राज्य के समर्थक - कंस का वध कर पुनः संघ राज्य की स्थापना की।


4 - अर्ध्यदान के पात्र युगपुरुष - राजसूर्य यज्ञ की समाप्ति पर भीष्म ने युधिष्ठिर से ये कह कर अर्ध्य दिलवाया कि, समस्त पृथिवी पर मानव जाति में अर्ध्य प्राप्त करने के सबसे उत्तम अधिकारी श्री कृष्ण ही हैं, क्योकि  वेद-वेदांग का ज्ञान व बल सम्पूर्ण पृथिवी पर इनके समान किसी और में नही है।


5 - संयम एवं ब्रह्मचर्य की साधना - विवाह के 12 वर्ष बाद तक ब्रह्मचर्य की साधना की  और प्रदुमन नामक पुत्र रत्न को प्राप्त किया। 

 नोट:-ऐसे महात्मा के लिए 8-8 पटरानियां व 16000 रानियां होने के दोष लगाना श्री कृष्ण को अपमानित करना है। सुतपत्नी रूकमणी को छोड़कर महाभारत या श्रीमद्भागवत में राधा नाम का कोई दूसरा पात्र नही है फिर भी उनके साथ जोड़ना बहुत बड़ा पाप करने समान है। ब्रह्मवैतादि पुराणकारों ने उनके उज्जवल चरित्र को कलंकित करने की कुत्सित चेष्टा की।


6 - ज्ञान के क्षेत्र में श्रीकृष्ण - ज्ञान के क्षेत्र में श्रीकृष्ण अप्रतिम थे। गीता का ज्ञान संसार का सर्वोच्च उदाहरण है। वे शास्त्रों में पारंगत, शस्त्रों में निपुण व राजनीति के बृहस्पति थे।


7 - महान योगी - श्रीकृष्ण महान योगी थे। महाभारत में श्रीकृष्ण ने तीन बार दृष्टि अनुबन्ध का प्रयोग किया। दुर्योधन के समक्ष राजदरबार में, युद्ध के समय अर्जुन को और तीसरी बार कौरवों को सूर्यास्त के भान कराया।

 

8 - कूटनीतिज्ञ - शुक्राचार्य ने अपने नीतिसार में लिखा है कि," कृष्ण के समान कुटनीतिज्ञ कोई इस पृथिवी पर नही हुआ।


9 -  मनोविज्ञानी - कर्ण से हारने के बाद युधिष्ठिर का मनोबल गिर गया था। पुनः शल्य के साथ युद्ध करने की अनुमति देकर उसका मनोबल बढ़ाया।


10 - पाखण्ड का विरोध - धर्म के नाम पर ढोंग फैलाने वालों को श्रीकृष्ण मिथ्याचारी तथा विमूढ़ कहकर भर्त्सना करते हैं।

 कर्मेन्द्रियणि संयम्य य आस्ते मन्सास्मरन्।

इन्द्रीयर्थानिविमूढात्मा मिथ्याचारः स उच्यते।। ( गीता ३/१३ ) 

कर्म ब्रह्मोदभवम विद्वि ब्रह्माक्षर समुद्र भवम। ( गीता ३/१४ ) 

अर्थात - *कर्म को तू वेद से उत्पन्न जान। और वेद परमात्मा से उतपन्न हुआ है*। अतः श्रीकृष्ण वेद को ही सर्वोपरि मानते हैं।


श्रीकृष्ण को भगवान क्यों कहते हैं ?


सम्पूर्ण ऐश्वर्य, धर्म, यश, श्री, ज्ञान, और वैराग्य इन छः का नाम 'भग' है। जिसके पास इनमें से एक वान भी हो वह भगवान कहलाता है*। इसीलिए हम श्रीकृष्ण जैसे महापुरुषों को भगवान कहा जाता है।

(ईश्वर के पास भी ये सभी गुण है इसीलिए ईश्वर भी भगवान है । किन्तु भगवान ईश्वर नहीं है।क्योंकि ईश्वर निराकार अजन्मा सर्वव्यापक सर्वशक्तिमान है )

  श्रीकृष्ण स्वयं कहते है कि मैं ईश्वर नही हूँ। महाभारत में वे कहते है कि, मैं यथासाध्य मनुष्योचित प्रयत्न कर सकता हूँ, किन्तु देव ( ईश्वर ) के कार्यो में मेरा कोई वश नहीं*।

इस प्रकार यह स्पस्ट है कि *श्रीकृष्ण महान योगी,महान राजनीतिज्ञ, महान कूटनीतिज्ञ, महान योद्धा, महान विद्वान तथा एक आप्त पुरुष थे।

आओ हम सब उनके जीवन से प्रेरणा लें। दुष्टों का दमन करके धर्म की स्थापना करें और धर्म कर्म करते हुए फल की इच्छा न करें निःस्वार्थ भाव से समाज को उन्नत करें। और हम बुद्धि व बल प्रप्त कर अपने राष्ट्र व मनुष्य जाति का कल्याण करें*। हम मूढ़ बनकर उनका अपमान ना करें, अपितु उनके जीवन चरित्र का अधिक से अधिक प्रचार व प्रसार करें।

*श्रीकृष्ण* (जन्माष्टमी पर विशेष)

 *श्रीकृष्ण* 

(जन्माष्टमी पर विशेष)

    आइए श्री कृष्ण के महान चरित्र को जानकर हम भी अपने जीवन मे अपनाने का संकल्प लें।

*श्रीकृष्ण का महान व्यक्तित्व*

*१.जुए के विरोधी:-*

वे जुए के घोर विरोधी थे। जुए को एक बहुत ही बुरा व्यसन मानते थे। जब वे काम्यक वन में युधिष्ठिर से मिले तो उन्होनें युधिष्ठिर को कहा-

*आगच्छेयमहं द्यूतमनाहूतोsपि कौरवैः।*

*वारयेयमहं द्यूतं दोषान् प्रदर्शयन्।।*

-(वनपर्व १३/१-२)

अर्थ:-हे राजन्! यदि मैं पहले द्वारका में या उसके निकट होता तो आप इस भारी संकट में न पड़ते। मैं कौरवों के बिना बुलाये ही उस द्यूत-सभा में जाता और जुए के अनेक दोष दिखाकर उसे रोकने की पूरी चेष्टा करता।

*२. मदिरा(शराब) के विरोधी:-*

वे मदिरापान के घोर विरोधी थे। उन्होंने यादवों के मदिरापान पर प्रतिबन्ध लगा दिया था और उसका सेवन करने वाले के लिए मृत्युदण्ड की व्यवस्था की थी।

*अद्यप्रभृति सर्वेषु वृष्ण्यन्धककुलेष्विह।*

*सुरासवो न कर्त्तव्यः सर्वैर्नगरवासिभिः।।* 

मौसलपर्व

*यश्च नोsविदितं कुर्यात्पेयं कश्चिन्नरः क्वचित्।*

*जीवन् स कालमारोहेत् स्वयं कृत्वा सबान्धवः।।*

-(मौसलपर्व १/२९,३०,३१)

अर्थ:-आज से समस्त वृष्णि और अन्धकवंशी क्षत्रियों के यहाँ कोई भी नगरवासी सुरा और आसव तैयार न करे।

यदि कोई मनुष्य हम लोगों से छिपकर कहीं भी मादक पेय तैयार करेगा तो वह अपराधी अपने बन्धु-बान्धवोंसहित जीवित अवस्था में सूली पर चढ़ा दिया जाएगा।

*३. गोभक्ति:-* वे गोभक्त थे। गोपों के उत्सव में हल और जुए की पूजा होती थी। श्रीकृष्ण ने गोपों को समझाया कि वे इसके स्थान पर गोपूजन करें। हमारे देवता तो अब गौएँ हैं,न कि गोवर्धन पर्वत। गोवर्धन पर घास होती है। उसे गौएँ खाती हैं और दूध देती हैं। इससे हमारा गुजारा चलता है। चलो गोवर्धन और गौओं का यज्ञ करें। गोवर्धन का यज्ञ यह है कि उत्सव के दिन सारी बस्ती को वहीं ले चलें। वहाँ होम करें। ब्राह्मणों को भोजन दें। स्वयं खाएँ औरों को खिलाएँ। इससे पता चलता है कि वे परम गोभक्त थे।

*४.ब्रह्मचर्य का पालन (एक पत्नीव्रत):-*

महाभारत का युद्ध होने से पहले श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा से कहा था-

*ब्रह्मचर्यं महद् घोरं तीर्त्त्वा द्वादशवार्षिकम्।*

*हिमवत्पार्श्वमास्थाय यो मया तपसार्जितः।।*

*समानव्रतचारिण्यां रुक्मिण्यां योsन्वजायत।*

*सनत्कुमारस्तेजस्वी प्रद्युम्नो नाम में सुतः।।*

-(सौप्तिकपर्व १२/३०,३१)

अर्थ:- मैंने १२ वर्ष तक रुक्मिणी के साथ हिमालय में ठहरकर महान् घोर ब्रह्मचर्य का पालन करके सनत्कुमार के समान तेजस्वी प्रद्युम्न नाम के पुत्र को प्राप्त किया था। विवाह के पश्चात् १२ वर्ष तक घोर ब्रह्मचर्य को धारण करना उनके संयम का महान् उदाहरण है।

*ऐसे संयमी और जितेन्द्रिय पुरुष को पुराणकारों ने कितना बीभत्स और घृणास्पद बना दिया है।*

*राधा कौन थी? 😘

*वृषभानोश्च वैश्यस्य सा च कन्या बभूव ह।*

*सार्द्धं रायणवैश्येन तत्सम्बन्धं चकार सः।।*

*कृष्णमातुर्यशोदाया रायणस्तत्सहोदरः।*

*गोकोले गोपकृष्णांश सम्बन्धात्कृष्णमातुलः।।*

-(ब्रह्म० प्रकृति ४९/३२,३७,४०)

अर्थ:- राधा वृषभानु वैश्य की कन्या थी। रायण वैश्य के साथ उसका सम्बन्ध किया गया। वह रायण यशोदा का भाई था और कृष्ण का मामा था। राधा उसकी पत्नि थी। सो राधा तो कृष्ण की मामी ठहरी।

मामी और भांजे का प्रेम-व्यापार कहाँ तक उचित है?

पुराणकारों ने कृष्ण के स्वरुप को बिगाड़ दिया। उनके पवित्र व्यक्तित्व को घृणित और बीभत्स बना दिया।

*योगेश्वर श्री कृष्ण महाराज की जय*

*सत्य सनातन वैदिक धर्म की जय हो*

*आप सभी को जन्माष्टमी की बहुत-बहुत शुभकामनाएं*

Sunday, August 25, 2024

*मैं हिंदू हूँ !!*

 🙈🙉🙊

*मैं हिंदू हूँ !!*

ओशो ने कहा -

जब से मैंने होश संभाला है लगातार सुनता आ रहा हूँ कि-

बनिया कंजूस होता है !!

नाई चतुर होता है !!

ब्राह्मण धर्म के नाम पर सबको बेवकूफ बनाता है !!

यादव की बुद्धि कमजोर होती है !!

राजपूत अत्याचारी होते हैं !!

दलित गंदे होते हैं !!

जाट, गडरिया और गुर्ज्जर बेवजह लड़ने वाले होते हैं !!

मारवाड़ी लालची होते हैं !! 

और ना जाने ऐसी कितनी असत्य परम ज्ञान की बातें सभी हिन्दुओं को आहिस्ते-आहिस्ते सिखाई गयी ...!!

नतीजा! 

हीन भावना ...!!

 एक दूसरे की जाति पर शक और द्वेष धीरे-धीरे आपस में टकराव होना शुरू हुआ और अंतिम परिणाम हुआ कि मजबूत, कर्मयोगी और सहिष्णु हिन्दू समाज आपस में ही लड़कर कमजोर होने लगा .....!!

उनको उनका लक्ष्य प्राप्त हुआ ! हजारों साल से आप साथ थे! आपसे लड़ना मुश्किल था !!

अब आपको मिटाना आसान है !!

आपको पूछना चाहिए था कि अत्याचारी राजपूतों ने सभी जातियों की रक्षा के लिए हमेशा अपना खून क्यों बहाया

आपको पूछना था कि अगर दलित को ब्राह्मण इतना ही गन्दा समझते थे तो बाल्मीकि रामायण जो एक दलित ने लिखा उसकी सभी पूजा क्यों करते हैं। 

माता सीता क्यों महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में रहती। 

आपने नहीं पूछा कि आपको सोने का चिड़ियाँ बनाने में मारवाड़ियों और बनियों का क्या योगदान था। 

सभी मंदिर स्कूल हॉस्पिटल बनाने वाले लोक कल्याण का काम करने वाले बनिया होते हैं! सभी को रोजगार देने वाले बनिया होते हैं! सबसे ज्यादा आयकर देने वाले बनिया होते हैं । 

जिस डोम को आपने नीच मान लिया, उसी के हाथ से दी गई अग्नि से आपको मुक्ति क्यों मिलती है। 

जाट  ,गडरिया और गुर्जर अगर मेहनती लड़ाके नहीं होते तो आपके लिए अन्न का उत्पादन कौन करता, सेना में भर्ती कौन होता। 

जैसे ही कोई किसी जाति की, कोई मामूली सी भी, बुरी बात करे, उसे टोकिये और ऐतराज़ कीजिये

याद रहे!

आप सिर्फ हिन्दू हैं। हिन्दू वो जो हिन्दूस्तान में रहते आये हैं ...!!

हमने कभी किसी अन्य धर्म का अपमान नहीं किया तो फिर अपने हिन्दू भाइयों को कैसे अपमानित करते हो और क्यों 

अब न अपमानित करेंगे और न होने देंगे! एक रहें सशक्त रहें ...!!

मिलजुल कर मजबूत भारत का निर्माण करें !!

*मैं ब्राम्हण हूँ*

*जब मै पढ़ता हूँ और पढ़ाता हूँ !!*

*मैं क्षत्रिय हूँ*

*जब मैं अपने परिवार की रक्षा करता हूँ !!*

*मैं वैश्य हूँ*

*जब मैं अपने घर का प्रबंधन करता हूँ !!*

*मैं शूद्र हूँ*

*जब मैं अपना घर साफ रखता हूँ !!*

*ये सब मेरे भीतर है इन सबके संयोजन से मैं बना हूँ !!*


*क्या मेरे अस्तित्व से किसी एक क्षण भी इन्हें अलग कर सकते हैं*

क्या किसी भी जाति के हिन्दू के भीतर से ब्राहमण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र को अलग कर सकते हैं। 

*वस्त्तुतः सच यह है कि हम सुबह से रात तक इन चारों वर्णों के बीच बदलते रहते हैं !!*

*मुझे गर्व है कि मैं एक हिंदू हूँ !!*

मेरे टुकड़े-टुकड़े करने की कोई कोशिश न करें ...!!

*मैं हिन्दू हूँ हिन्दुस्तान का*

*मैं पहचान हूँ हिन्दुस्तान का ...!!!*

*जय हिंद.. वन्दे मातरम्..* 🇮🇳🇮🇳

साभार एक विमर्श.... यूं तो #भारत ने दुनिया को बहुत कुछ दिया है

 साभार एक विमर्श.... यूं तो #भारत ने दुनिया को बहुत कुछ दिया है।लेकिन आज #योग और #आयुर्वेद पर चर्चा कर रहे हैं।ऐसे माहौल में जब #एलोपैथी ने ...