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Wednesday, August 28, 2024

क्या हम तीसरी बार भी बंटेंगे भी और कटेंगे भी ?

 क्या हम तीसरी बार भी 

बंटेंगे भी और कटेंगे भी ?!

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योगी जी,आपकी चेतावनी सुनने वाले नहीं हैं वे।

जब मध्य युग में नहीं सुने,ब्रिटिश काल में नहीं 

सुने तो आज कैसे सुन लेंगे ?ं!

यदि सुन लें तो देश बच जाएगा ।

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योगी जी, यदि नहीं सुनेंगे तो आप ही जैसे नेताओं को देश और लोगों को बचाने का कोई दूसरा उपाय करना पड़ेगा। वह भी जल्द ही करना पड़ेगा।क्योंकि खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है।

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एक उपाय यहां पेश है-मंदिरों की आय से देश भर में बड़े पैमाने पर

आत्म सुरक्षा या आत्म बलिदानी दस्ते बनवाइए।

साथ ही,देश के सभी मंदिरों पर से सरकारी कब्जे को हटवाइए।उनसे हो रही भारी आय को इसी काम में लगाइए।

क्योंकि अन्य धर्मों के पूजा स्थलों पर सरकारी कब्जा नहीं है।

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उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ ने कल आगरा में कहा कि 

‘‘राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता है।

यह तब होगा जब हम एक रहेंगे।

हम बटंेगे तो कटेंगे।’’

मुख्य मंत्री ने यह भी कहा कि ‘‘बांग्ला देश देख रहे हो न,क्या हो रहा है।

ऐसी गलती यहां नहीं होनी चाहिए।

हम एक रहेंगे तो सुरक्षित रहेंगे।’’  

  योगी जी ने समयोचित बातें कही हैं।

आज इसीलिए योगी देश के सर्वाधिक लोकप्रिय मुख्य मंत्री हैं।

इंडिया टूडे ं(4 सितंबर 2024)के ताजा सर्वे (देश का मिजाज) की चर्चा करूं।

उसके तहत योगी जी के बारे में देश भर के (सिर्फ उत्तर प्रदेश के नहीं)एक लाख 36 हजार 463 मतदाताओं से राय पूछी गई।

उनमें से 46 दशमलव 30 प्रतिशत लोगों ने मुख्य मंत्री के रूप में योगी को देश में पहले स्थान पर रखा।

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क्योंकि लोगों का मानना है कि यू.पी.की जो मुख्य समस्याएं हैं,उन्हें योगी जी अच्छी तरह समझते हैं और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारी खतरा उठाकर भी उनके निदान की गंभीर कोशिश में लगे रहते हैं।

काश ! विभिन्न राज्यों के अन्य सत्ताधारी नेता भी ऐसा ही करते !

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खैर, अब मुख्य बात पर आते हैं।

 हम कब नहीं बंटे थे ?!

ब्रिटिश इतिहासकार सर जे.आर.सिली (1834-1895)ने लिखा है कि ब्रिटिशर्स ने भारत को कैसे जीता।

मशहूर किताब ‘‘द एक्सपेंसन आॅफ इंगलैंड’’ के लेखक सिली  की स्थापना थी कि 

‘‘हमने (यानी अंग्रेजों ने) नहीं जीता,बल्कि खुद भारतीयों ने ही भारत को जीतकर हमारे प्लेट पर रख दिया।’’

पुस्तक की सिर्फ एक पंक्ति यहां प्रस्तुत है--

‘‘भारत को जीतने की दिशा में जिस समय हमने पहली सफलता प्राप्त की थी,उसी समय हमने अमेरिका में बसी अपनी जाति के तीस लाख लोगों को ,जिन्होंने इंगलैंड के ताज के प्रति अपनी भक्ति को उतार फेंका था,अनुशासन के तहत लाने में पूरी तरह विफलता का मुंह देखा था।’’

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यानी,ब्रिटिश काल में भी हम बंटे हुए ही थे।

इस बात के बावजूद हम ब्रिटिश काल में भी बंटे रहे कि उससे पहले के मुस्लिम शासकों ने यहां की बहुसंख्यक आबादी के साथ लगभग वैसा ही सलूक किया जैसा सलूक आज बांग्ला देश के जेहादी तत्व वहां के अल्पसंख्यकों के साथ कर रहे हैं।

हम तब भी बंटे थे।राणा प्रताप एक तरफ थे तो मान सिंह दूसरी तरफ।अधिकतर आम लोगों को भी यह पढ़ा दिया गया था--‘‘को नृप होहिं हमें का हानि ?’’

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आज इस देश के बहुसंख्यक समाज के जो लोग बांग्ला देशियों और रोहिंग्याओं के समर्थक दलों की मदद कर रहे हैं,उन्हें वोट दे रहे हैं,वे लोग वही पुरानी गलती दोहरा रहे हैं।

इस गलती का नतीजा भी पहले जैसा ही खतरनाक होगा।

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इसलिए हमारे राष्ट्र की रक्षा हमारी गैर राजनीतिक सेना,अर्ध सैनिक बल और राज्यों की पुलिस तो करेगी ही।

पर,उनकी संख्या पर्याप्त साबित नहीं होगी।

इनके अलावा आत्म बलिदानी लोगों की बड़ी फौज भी तैयार करनी पड़ेगी।वे गांव -गांव में फैलेंगे।

  जिस तरह निजी सुरक्षा संगठनों को काम करने की अनुमति सरकार देती है,उसी तरह ‘‘आत्म बलिदानी दस्तें’’ तैयार करने वालों को सरकार मान्यता दे ही सकती है।

हमारे आधुनिक कानून के किताब में भी यह दर्ज है कि हमें आत्म रक्षा के लिए हमलावर पर आक्रमण करने का कानूनी अधिकार हासिल है।

आत्म बलिदानी दस्तों को मंदिरों की भारी आय से प्रशिक्षित किया जा सकता है।

चाहे तो सरकार ‘‘देश सुरक्षा कर’’ लगा सकती है।उसके जरिए आए पैसों से हम अपनी सेना,अर्धसैनिक बल और पुलिस की संख्या बढ़ा सकते हैं।आधुनिक हथियारों से वे लैस हों।

यह सब तैयारी अभी से नहीं होगी तो हम अचानक बड़ी भारी मुसीबत में फंस सकते हैं।

फिर तो योगी जी की चेतावनी निरर्थक जाएगी कि ‘‘बंटेंगे तो कटेंगे।’’

जिस तरह की तैयारी दूसरे देसी-विदेशी भारत द्रोही पक्ष की ओर से इस देश को बर्बाद करने के लिए हो रही है,उसके अनुपात में ही और उससे कहीं अधिक मजबूत तैयारी हमारी भी होनी चाहिए।

तभी हम इस मिश्रित संस्कृति वाले लोकतांत्रिक देश को मौजूदा स्वरूप में बचा सकेंगे जहां संविधान का शासन चलता है।

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27 अगस्त 2024

Tuesday, August 27, 2024

*यह अवश्य पढ़ें और सत्य को जानें*

 *यह अवश्य पढ़ें और सत्य को जानें*          

                        किसी ने मुसलमानों के बारे में 

एक बात कह दी कि ये बहुत कट्टर होते हैं, इनको किसी को जान से मारने काटने में 

कोई झिझक नहीं होती।


उसी ट्रेन में संघ के एक 

वयोवृद्ध प्रचारक जी भी बैठे थे, 

वे बड़े मृदुभाषी और आराम से 

रुक रुक कर बोलने वाले व्यक्ति थे।


शुरू में वे चुप रहे पर धीरे धीरे चर्चा में 

सम्मिलित हो गए।


 *मियों के कट्टर होने की बात पर 

वे मुस्कुराने लगे !* 

और जो बताया उसे आज 

*30 साल बाद भी नहीं भूल* सका।


उन्होंने कहा कि यह झूठ है

अर्धसत्य है कि मिएं कट्टर होते हैं ,

 *सच यह है कि ये अंदर से 

बहुत बड़े कायर होते हैं।* 


 *ये समूह में जमा हो सकते हैं* 

सियारों की तरह हुआं हुआँ कर सकते हैं।

पर जैसे ही इनको लगता है

अब तो मार पड़ेगी या गोली चलेगी ,

ये भाग खड़े होते हैं।


दंगों में अक्सर देखा गया है

*हिन्दू का एक लड़का 

बीस मुसलमानों पर भारी पड़ता है* 

अगर मरने मारने पर उतर जाये।


 *इसका कारण केवल इनका मांसाहार है,* 

कभी भी मांसाहारी जीव 

साहसी हो नहीं सकते।


शेर हो ..बाघ हो ..बिल्ली हो.. 

तेंदुआ कुत्ता.. 

कोई भी मांसाहारी जीव हो

वह घात लगाकर *पीछे से छिपकर .. 

चोरी से ही हमला* करता है


 *वह सामने से लड़कर जीत नहीं सकता,* 

उसे पता होता है!


आमने सामने के युद्ध में जंगल में ,

एक शाकाहारी भैंसा हो

एक गैंडा हो 

वह भी बाघ पर भारी पड़ता है।


हाथी तो शुद्ध शाकाहारी है

वह बाघ से बिल्कुल नहीं डरता

आमने सामने का युद्ध बाघ हाथी से 

कभी नहीं करना चाहता,

वह भाग जाता है!


मिएं भी आमने सामने की चुनौती 

स्वीकार नहीं करते,

ये बहुत बड़े भगोड़े होते हैं!


इतिहास उठा कर देख लीजिए -

पूरे विश्व में

इन्होंने *एक भी युद्ध 

सामने लड़कर नहीं जीता है* 


 *इन्होंने हर युद्ध कुछ दिनों के लिए 

छल से कपट से जीते*   

फिर कुछ दिनों बाद 

सीधे युद्ध में भाग खड़े हुए!


इसलिए आप भी ये सोच 

दिल से निकाल दीजिए कि

ये कट्टर होते हैं

ये वो होते हैं ..

ये वैसे हैं!


युद्ध टालिए

संघर्ष से बचिए

पर जब इनके बीच घिर गए

तो पूरी ताकत से एक लाठी ...

एक पत्थर लेकर भी ...

हिन्दू का एक लड़का 

अड़ गया ..

तो बीसों भाग खड़े हुए हैं,

ऐसी अनेक घटनाएं बता देंगे!


*इसलिए वीर बनिए*

*साहसी होना वीर होना खून में होता है* 

और हिन्दू विश्व की सबसे वीर प्रजाति है!

*यही सनातन सत्य है* 

जो सदियों से लगातार युध्द कर रही है,

पर हार नहीं मानती।

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Monday, August 26, 2024

अगर आपने अबतक इस्लाम कबूल नहीं किया है तो इस्लाम के अनुसार आपने इस्लाम पर हमला बोला हुआ है!

 अगर आपने अबतक इस्लाम कबूल नहीं किया है तो इस्लाम के अनुसार आपने इस्लाम पर हमला बोला हुआ है! 


जी हुजूर, यही सही है है। इसलिए ग़ैर-इस्लामी देशों को दारुल हरब (युद्धस्थल) कहा गया है और इस्लामी देशों को दारुल इस्लाम(शांति-स्थल)।


मतलब यह कि इस्लामी मान्यता के अनुसार दुनिया की

लगभग 600 करोड़ ग़ैर-मुस्लिम आबादी ने दुनियाभर के लगभग 160 करोड़ मुसलमानों के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ा हुआ है!


किसी और मजहबी ग्रन्थ में ऐसा है क्या?

कितने मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने इसकी आलोचना करने की अबतक हिम्मत दिखाई है?


इससे साबित होता है कि आतंकवादियों का इस्लाम ही असली इस्लाम है, बाक़ी सब अलतकिया (मजहब सम्मत धोखा) है।


इस दृष्टि से तो भारत में इस्लामी आतंकवाद की जड़ में मदरसा या मुसलमान नहीं बल्कि इस्लाम है जो ग़ैर-मुसलमानों को वध्य (हत्या योग्य) मान उनकी ज़र-जोरू-ज़मीन पर अपना मजहबी हक़ समझता है।


"क़ुरआन पढ़ने के बाद भी कोई मुसलमान बना रहे तो वह मनोरोगी है" या अव्वल कायर और धूर्त।

इसीलिए कबीर और कलाम मुसलमानों के नायक नहीं हैं।


उनके नायक हैं:ओसामा बिन लादेन, मुल्ला उमर,

बग़दादी, याकूब मेमन,अफ़ज़ल गुरु,बुरहान वानी,

मुहम्मद ग़ोरी, मुहम्मद बिन क़ासिम,औरंगज़ेब...


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इस्लामिक जिहाद

 ज़रुर पढ़े 👇


इस्लामिक जिहाद,


एक एसा शब्द जिसमे भ्रम है,

इसका भ्रम समझने की कोशिश करते है,


असल मे इस्लामिक जिहाद जो है यह, सत्य शब्द के विरुद्ध एक लडाई है,

इस्लाम मे सत्य शब्द का एक विलोम शब्द बनाया गया है, इसका नाम रखा गया है ईमान,

जी हा सही समझा आपने ईमान शब्द सत्य शब्द का विलोम है,

और यह मानवता के विरुद्ध भी है


यदि इसका प्रत्यक्ष देखना हो तो

किसी भी मुसलमान को, सत्य

और मानवता वादी शब्द बोलकर देखो , जैसे कि, मांसाहार मत करो, वहु विवाह , मत करो, बहनो से विवाह मत करो, लूटमार मत करो, आदि आदि. तो वह तुरंत, आपसे जिहाद करने लगेगा.

लगेगा. असल मे वह लड रहा है, अपने झूठ अपनी कुरीतियो के लिए, जिसे उसने एक अच्छा सा नाम दिया है, = ईमान


मुस्लिम बोलेगा कि भाई हम तो ईमान वाले है,

दरअसल उसका रियल मतलब यह होता है कि, हम सत्य मानवता आदि को नही मानते,

हम तो ईमान वाले है,

मतलब जिसमे हमारा स्वार्थ सिद्ध होता है हम वह मानते है,


यह है ईमान शब्द की परिभाषा

प्रत्यक्ष देख लीजिए, दुनिया मे इस्लाम के द्वारा यही हो रहा है.

सारी दुनिया मे आतंकवाद फैलाने के बाद भी मुसलमान बोलता है कि उसके उपर अत्याचार हो रहा है, इसके पीछे कारण यह है कि,

मुस्लिम रियल मे यह बोलना चाहता है कि, सत्य और मानवता अभी मिटी क्यो नही है,

मुस्लिम तभी अपने-आप को सुरक्षित मानता है, जब चारो तरफ

इस्लामिक आतंकवाद का राज हो, और सत्य मानवता मिट जाये , ,,


अतः साफ है कि जब तक दुनिया मे मानवता, सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, जैसे शब्द रहेगे, इनका अस्तित्व रहेगा तब तक इस्लामिक जिहाद, मतलब सत्य के विरुद्ध लड़ाई जारी रहेगी


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सेकुलरिज्म क्या है ?

 सेकुलरिज्म क्या है ?👇👇👇👇


एक मुस्लिम बच्चे ने अपनी माँ से पूछा-


*"अम्मी, ये सेकुलरिज्म (धर्म निरपेक्षता) क्या होता है?"*


*बुर्के में लिपटी महिला ने अपने बेटे को बताया-

"बेटे! सेकुलरिज्म इस देश का वह सिस्टम है

जिसमें हिन्दू करदाता जी-तोड़ मेहनत कर

सरकार को इतना टैक्स चुकाता है,


जिससे कि हम जैसे


*अल्पसंख्यकों*

को फ्री आवास,

मदरसों में फ्री शिक्षा,

फ्री मेडिकल ट्रीटमेंट

आदि सुविधाएँ मिलती रहें,

मंदिरों की हुंडियों का धन

हमारे लिए प्रयोग किया जा सके!

किन्तु......

मस्जिदों में क्या हो रहा है,

उस तरफ कोई आँख उठाकर देखने की भी

हिम्मत ना कर सके!

हमें कानून का संरक्षण तो मिले किन्तु कोई कानून हम पर लागू नहीं हो!


*इस प्रकार के जन्नतनुमा माहौल को ही सेकुलरिज्म कहते हैं!!!"*

*“लेकिन अम्मी, इससे हिन्दू करदाता नाराज नहीं होते"- बच्चे ने पूछा।*

*"होते हैं बेटा"!*

किन्तु

उनके गुस्से को कुंद करने के लिए हम उनको


*साम्प्रदायिक*

बताना शुरू कर देते हैं

ताकि उनको शर्मिंदगी महसूस हो!

इस तरह कुछेक अड़ियल हिंदुओं को छोड़कर,

बाक़ी सभी हिन्दू इस

सेकुलरता नाम के जहर को प्रसाद समझ कर

ना केवल ख़ुशी ख़ुशी स्वीकार कर लेते हैं बल्कि

उन्हें अपने आपको सेक्युलर कहलवाने में गर्व भी महसूस होता है

तथा

वे अपने आपको सेक्युलर सिद्ध करने के प्रयास में

हमारे सब कर्मों का आँख मूंदकर समर्थन करते हैं!"

बच्चे ने कहा-


*इसका मतलब हिन्दू तो बहुत अच्छे हैं!*

बुर्के वाली महिला ने कहा,

*अच्छे नहीं बेवकूफ हैं *

जो अपना हक छोड़कर हमारे बोझ को उठाते हैं!

बच्चे ने अपनी समझ से कहा- "लेकिन अम्मी वे

हमें अल्पसंख्यक कहते हैं जो

सुनने में अच्छा नहीं लगता!"

महिला ने कहा-

"तू चिंता मत कर बेटे!

इसी सेक्युलरिज्म की बदौलत हम बहूसंख्यक हो जाएँगे।

हमारे लिए कोई रोकटोक नहीं

जितने भी पैदा करो

और हम

एक दिन हिन्दुस्तान में ही नहीं,

पूरी दुनिया में राज करेंगे!

मैंने तेरे 12 भाई बहन यूँ ही थोड़े न पैदा किए हैं!!!

*बच्चे ने कहा-

"हाँ अम्मी! मैं समझ गया।

जब हिन्दू बोझ उठाते हैं

तो पैदा करने में क्या दिक्कत है!!!*


*सेकुलरिज्म को इससे आसान शब्दों में आज तक किसी ने नहीं समझाया होगा! भारत के सभी हिन्दूओ को एक होकर रहना है

🚩🇮🇳🇮🇳

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एक 8 साल का लडका

 एक 8 साल का लडका 


सिनेमाघर में राजा हरिशचन्द्र फिल्म देखने गया और फिल्म से प्रेरित होकर उसने सत्य का मार्ग चुना और वो बड़ा होकर महान व्यक्तित्व से जाना गया।


परन्तु आज आठ साल का लडका टीवी पर क्या देखता है ?

सिर्फ नंगापन और अश्लील वीडियो और फोटो,

मैग्जीन में अर्धनग्न फोटो, 

पड़ोस में रहने वाली भाभी/आंटी के छोटे कपड़े !!


लोग कहते हैं कि दुष्कर्म का कारण बच्चों की मानसिकता है।

पर वो मानसिकता आई कहाँ से ?

उसके जिम्मेदार कहीं न कहीं हम खुद हैं। 

क्योंकि अब अधिकतर हम संयुक परिवार में नहीं रहते।

हम अकेले रहना पसंद करते हैं। और अपना परिवार चलाने के लिए माता पिता को बच्चों को अकेला छोड़कर काम पर जाना है और बच्चे अपना अकेलापन दूर करने के लिये टीवी और इन्टरनेट का सहारा लेते हैं।

और उनको देखने के लिए क्या मिलता है सिर्फ वही अश्लील वीडियो और फोटो तो वो क्या सीखेंगे यही सब कुछ ना ?

अगर वही बच्चा अकेला न रहकर अपने दादा दादी के साथ रहे तो कुछ अच्छे संस्कार सीखेगा।

कुछ हद तक ये भी जिम्मेदार है।


2) जब पूरा देश दुष्कर्म पर उबल जाता है, 

छोटी छोटी बच्चियो से जो दरिंदगी हो रही उस पर सबके मन में गुस्सा होता है।

कोई सरकार को कोस रहा होता है, तो

कोई समाज को तो कई feminist सारे लड़को को बलात्कारी घोषित कर चुकी होती है।


लेकिन आप सुबह से रात तक

कई बार su.nny le.on के कंडोम के add देखते है ..!!

फिर दूसरे add में  रण.वीर सिंह शैम्पू के ऐड में लड़की पटाने के तरीके बताता है...!!

ऐसे ही Close up, 

लिम्का, 

Thumsup भी दिखाता है।

लेकिन तब आपको गुस्सा नहीं आता है है ना ???


आप अपने छोटे बच्चों के साथ music चैनल पर सुनते ही हैं 

दारू बदनाम कर दी,

कुंडी मत खड़काओ राजा,

मुन्नी बदनाम,

चिकनी चमेली,

झण्डू बाम,

तेरे साथ करूँगा गन्दी बात,

और न जाने ऐसी कितनी मूवीज गाने देखते सुनते है।

तब आपको गुस्सा नहीं आता ??


मम्मी बच्चों के साथ Star Plus, जी TV, सोनी TV देखती है जिसमें एक्टर और एक्ट्रेस सुहाग रात मनाते हैं..

किस करते हैं..

आँखों में आँखें डालते हैं..

और तो और भाभीजी घर पर हैं, जीजाजी छत पर हैं, 

टप्पू के पापा और बबिता जिसमें एक व्यक्ति दूसरे की पत्नी के पीछे घूमता लार टपकता नज़र आएगा पूरे परिवार के साथ देखते हैं..

इन सब serial को देखकर आपको गुस्सा नही आता ??


फिल्म्स आती है जिसमें किस (चुम्बन, आलिंगन), रोमांस से लेकर गंदी कॉमेडी आदि सब कुछ दिखाया जाता है।

पर आप बड़े मजे लेकर देखते है, इन सब को देखकर आपको गुस्सा नहीं आता..


खुलेआम TV- फिल्म वाले आपके बच्चों को बलात्कारी बनाते है। 

उनके मन मे जहर घोलते है।

तब आपको गुस्सा नहीं आता ?

क्योकि आपको लगता है कि

रेप रोकना सरकार की जिम्मेदारी है । 

पुलिस, 

प्रशासन, 

न्यायव्यवस्था की जिम्मेदारी है..

लेकिन क्या समाज और मीडिया की कोई जिम्मेदारी नहीं??

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में कुछ भी परोस दोगे क्या ?


आप तो अखबार पढ़कर।

News देखकर बस गुस्सा निकालेंगे।

कोसेंगे सिस्टम को, 

सरकार को, 

पुलिस को, 

प्रशासन को, 

DP बदल लेंगे, 

सोशल मीडिया पे खूब हल्ला मचाएंगे, 

बहुत ज्यादा हुआ तो कैंडल मार्च या धरना कर लेंगे लेकिन....


TV चैनल्स, मीडिया को कुछ नहीं कहेंगे। क्योकि वो आपके मनोरंजन के लिए है। 

सच पूछिए तो TV Channels अश्लीलता परोस रहे है ...

पाखंड परोस रहे हैं

झूंठे विषज्ञापन परोस रहे हैं

झूंठेऔर सत्य से परे ज्योतिषी पाखंड से भरी कहानियां एवं मंत्र, ताबीज आदि परोस रहे हैं

उनकी भी गलती नहीं है।

क्योंकि आप खरीददार हो .....??

बाबा बंगाली, तांत्रिक बाबा, स्त्री वशीकरण के जाल में खुद फंसते हो ।


3) अभी टीवी का खबरिया चैनल किसी घटना पर समाचार चला रहा है।

जैसे ही ब्रेक आए......

पहला विज्ञापन बोडी स्प्रे का जिसमें लड़की आसमान से गिरती है,

दूसरा कंडोम का,

तीसरा नेहा स्वाहा-स्नेहा स्वाहा वाला,

और चौथा प्रेगनेंसी चेक करने वाले मशीन का......

जब हर विज्ञापन, हर फिल्म में नारी को केवल भोग की वस्तु समझा जाएगा तो बलात्कार के ऐसे मामलों को बढ़ावा मिलना निश्चित है।


क्योंकि

"हादसा एक दम नहीं होता,

वक़्त करता है परवरिश बरसों....!"

ऐसी निंदनीय घटनाओं के पीछे निश्चित तौर पर भी बाजारवाद ही ज़िम्मेदार है ..


4) आज सोशल मीडिया, इंटरनेट और फिल्मों में पोर्न परोसा जा रहा है। तो बच्चे तो बलात्कारी ही बनेंगे ना।

😢😢😢


ध्यान रहे समाज और मीडिया को बदले बिना ये आपके कठोर सख्त कानून कितने ही बना लीजिए, ये घटनाएँ नहीं रुकने वाली है।अगर अब भी आप बदलने की शुरुआत नहीं करते हैं तो समझिए कि .........आपको आपकी बेटियाँ बचाना है तो सरकार कानून पुलिस के भरोसे से बाहर निकलकर समाज मीडिया और सोशल मीडिया की गंदगी साफ करने की आवश्यकता है।


साभार/संशोधित

😠😠😠😠

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भारतीय संस्कृति के आधार पुरुष श्री कृष्ण का आज प्राकट्य दिवस है। कृष्ण एक ऐसे विराट व्यक्तित्व का नाम है जिसने

 भारतीय संस्कृति के आधार पुरुष श्री कृष्ण का आज प्राकट्य दिवस है। कृष्ण एक ऐसे विराट व्यक्तित्व का नाम है जिसने वैश्विक चेतना को प्राख्यापित किया है। कृष्ण के एक एक कर्म में मानवीय सरोकार विद्यमान रहे हैं और आज जन्माष्टमी के पावन पर्व पर मैं राष्ट्रीय कवि श्री रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियों का उल्लेख करना समीचीन समझता हूं जो कृष्ण के संदर्भ में संरचित की गई हैं:-

" वर्षों तक वन में घूम-घूम 

  बाधा -विघ्नों को चूम चूम 

  सह धूम -घाम, पानी पत्थर 

   पांडव आए कुछ और निखर 

   सौभाग्य न सब दिन सोता है 

   देखें आगे क्या होता है।

 

   मैत्री की राह बताने को 

   सबको सुमार्ग पर लाने को 

   दुर्योधन को समझाने को 

   भीषण विध्वंस बचाने को 

    भगवान हस्तिनापुर आए

     पांडव का संदेशा लाये।


      यह देख गगन मुझमें लय है 

      यह देख पवन मुझमें लय है 

       मुझमें विलीन झंकार सकल 

       मुझमें लय है संसार सकल 

        अमरत्व फूलता है मुझमें 

        संघार झूलता है मुझमें।


       दृग हों तो दृश्य अकांड देख

       मुझमें सारा ब्रह्माण्ड देख

       चर-अचर जीव,जग,क्षर- अक्षर 

नश्वर मनुष्य सुर जाति अमर

शत कोटि सूर्य,शत कोटि चंद्र 

शत कोटि सरित, सर, सिन्धु -मन्द्र।

  

शत कोटि विष्णु, ब्रह्मा, महेश 

शत कोटि विष्णु, जलपति धनेश

शत कोटि रुद्र,शत कोटि काल

शत कोटि दंडधर लोकपाल 

जंजीर बढ़ाकर साध इन्हें 

हां हां दुर्योधन बांध इन्हें।


भूलोक अतल पाताल देख 

गत और अनागत काल देख 

यह देख जगत का आदि सृजन 

यह देख महाभारत का रण

मृतकों से पटी हुई भू है 

पहचान, कि इसमें कहां तू है।


 विश्व मानव महामना कृष्ण को उनके प्राकट्य दिवस पर सादर नमन।🙏🙏

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साभार एक विमर्श.... यूं तो #भारत ने दुनिया को बहुत कुछ दिया है

 साभार एक विमर्श.... यूं तो #भारत ने दुनिया को बहुत कुछ दिया है।लेकिन आज #योग और #आयुर्वेद पर चर्चा कर रहे हैं।ऐसे माहौल में जब #एलोपैथी ने ...