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Sunday, September 1, 2024

जब इजराइल नहीं होगा तब हिंदुस्तान का क्या होगा ?

 जब इजराइल नहीं होगा तब हिंदुस्तान का क्या होगा ?


- हिंदुओं को अपने दैनिक कामकाज से फुर्सत नहीं मिलती है... देश के लिए उनके पास वक्त नहीं होता है...  मंदिरों में आजकल घंटा बजाने वाली मशीनें लग गई हैं... क्योंकि हिंदू काफी बिज़ी रहने लगा है... फिर भी अगर फुर्सत मिले तो ये जरूर सोचना कि आज जब इजराइल की रियासत मिडिल ईस्ट में मौजूद है तो इसका भारत पर क्या असर है ? और जब मिडिल ईस्ट में इजराइल की रियासत नहीं रहेगी तो फिर इसका क्या असर होगा ? 


-ये सवाल बहुत लंबे अर्से से मेरे मन में रहा है और मैंने इसका जवाब भी तलाशा है लेकिन आज ये सवाल मैं आप सब से पूछ रहा हूं क्योंकि आज समय बहुत प्रासंगिक है... क्योंकि आज अमेरिका अफगानिस्तान से बोरिया-बिस्तर समेटकर चल दिया है... और आपके पड़ोस में पाकिस्तान के अलावा एक और शत्रु देश पैदा हो चुका है जिसका नाम है... तालिबान नियंत्रित इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान.... अब यहां पर एक मध्ययुगीन मानसिकता वाली इस्लामी सरकार बन चुकी है जो काफिरों को अपना परम शत्रु मानती है और भारत ही तालिबान के सबसे नजदीक काफिर मुल्क है । 


-अफगानिस्तान के अफगान जनरलों और सैनिकों की ये परंपरा रही है कि वो लुटेरों की तरह भारत में दाखिल होते थे.... मंदिरों को लूटते थे... मूर्तियों को तोड़ते थे... औरतों को उठाकर ले जाते थे । कहते हैं कि अफगानिस्तान की आबादी का एक हिस्सा... हिंदू महिलाओं के बलात्कार द्वारा पैदा हुआ है ।  ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि जब महमूद गजनवी और मुहम्मद गौरी भारत से हजारों लाखों हिंदू महिलाओं को यौन दासी बनाकर अफगानिस्तान ले गए थे तब अफगानिस्तान में बहुत लंबे समय तक हिंदू यौन दासियां दो दो टके से भी कम मूल्य पर बिक रही थीं । इन यौन दासियों में ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य सभी की महिलाएं शामिल थीं । 


-एक अफगान जनरल ने तो कश्मीर में इतना यौन  व्याभिचार किया था कि कश्मीरी पंडितों ने अपनी सुंदर बेटियों के सिर को मूंड दिया यानी बाल छिलवा दिए और मुंह पर कालिख पोत दी थी । इस अफगान जनरल का नाम था अता मोहम्मद खान.... इस विधर्मी अत्याचारी के अत्याचारों का वर्णन आगे के आर्टिकल्स में करूंगा (सोर्स... कम्युनिस्ट इतिहासकार अशोक कुमार पाण्डेय की किताब कश्मीरनामा से)


- आज देश की कमान मोदी के हाथ में है इसलिए भारत पर तिरछी नजर से देखने की हिम्मत शायद ही किसी में हो । लेकिन वक्त कभी एक जैसा नहीं रहता है हमारे देश में पेट्रोल और तेल की कीमतों पर आंसू बहाने वाले हिंदुओं की कमी नहीं है । दुनिया में सबसे उच्च कोटि के गद्दार भारत में ही पाए जाते हैं  । यूं कहें कि भारत में तो गद्दारों की एक पूरी फौज रहती है जो हर वक्त राष्ट्रवादी ताकतों को गरियाना अपना परम कर्तव्य समझती है 


- खैर अब बात इजराइल की करते हैं । इजराइल 1947 में स्थापित हुआ और तब से आज तक उसने मिडिल ईस्ट के 50 से ज्यादा देशों को उलझा कर रखा हुआ है । आज मुसलमान अपना सबसे बड़ा दुश्मन इजराइल को मानते हैं । हर मुसलमान के दिमाग में यही रहता है कि किसी तरह इजराइल को खत्म किया जाए । हर जुम्मे को मुसलमान दुआ करते हैं कि यहूद का राज खत्म हो । 


-मुसलमानों ने इजराइल से दो जंगें भी लड़ी हैं लेकिन हर जंग में उनको मुंह की खानी पड़ी है इसीलिए मुसलमानों का मनोबल भी काफी हद तक इजराइल ने तोड़ दिया है । यही वजह हे कि जिहादियों कट्टरपंथियों की सारी ताकत अभी इजराइल पर ही लगी हुई है । कैसे भी इजराइल को खत्म करने के मंसूबे ये लोग बनाते रहते हैं । 


- लेकिन सोचिए जब इजराइल नहीं रहेगा तब क्या होगा ? ऐसी स्थिति में एशिया के अंदर मुसमलानों का नंबर वन दुश्मन हिंदुस्तान होगा । दुनिया के 57 मुस्लिम देश भारत में गजवा ए हिंद के लिए आर्थिक से लेकर शारिरिक मदद तक करेंगे । जिहादियों के पास ना मनी पावर की कमी होगी और ना ही मैन पावर की कमी होगी । क्योंकि इजराइल से मुक्ति पाने के बाद उनके निशाने पर सिर्फ और सिर्फ भारत ही होगा


- ये आज नहीं तो कल होगा जरूर । लेकिन क्या हम इसके लिए तैयार हैं ? क्या हमने अपने बच्चों को इस परिस्थिति के लिए तैयार किया है ? सेना के भरोसे मत रहिए... सेना बॉर्डर पर अपना काम कर रही है लेकिन आप अंदर से कितनी सुरक्षित हैं इस पर भी गौर कीजिए और आप अपने देश की सुरक्षा के प्रति कितने जागरूक हैं । जरा इस बात पर भी गौर कीजिए । 


 लोगों को जाग्रत कीजिए और आर्टिकल ग्रुप्स में शेयर कर दीजिए


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*मित्रों 'धारा 370 की वापसी'..*

 *मित्रों 'धारा 370 की वापसी'..* 

*'आतंकियों’ को नौकरी..*

*चुनाव जम्मू-कश्मीर का..*

*वादे पाकिस्तान वाले..*

*कॉन्ग्रेस+नेशनल कॉन्फ्रेंस का इरादा क्या..*

*चुनाव जीतना..*

*या पत्थरबाजी का वही दौर लाना?*

*राहुल गाँधी, अब्दुल्ला परिवार..*

*कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के युवराज की मुलाकात..* 

*संजय अग्रवाल 'हाईवे'*

*मित्रों, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में साल 2019 में लगातार दूसरी बार एनडीए ने प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए केंद्र में सरकार बनाई..*

*और सबसे पहला बड़ा काम किया था..* *जम्मू-कश्मीर पर लागू होने वाले आर्टिकल 370 को रद्द करने का..*

*जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में करके..*

*केंद्र शासित प्रदेश बनाने का..*

*मोदी सरकार ने ऐसा कारनामा कर दिखाया..* 

*जिसे अब कोई सरकार नहीं हटा पाई..*

*ये अलग बात है कि कॉन्ग्रेस आर्टिकल 370 को हटाने का पुरजोर विरोध करती रही..*

*खैर, अब कॉन्ग्रेस ने, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू एवँ कश्मीर के विधानसभा चुनाव के लिए, फिर से अपने ऐसे पुराने सहयोगी के साथ ‘हाथ’ मिलाया है..* 

*जो जम्मू-कश्मीर को लेकर अलगाववादी शक्तियों की मदद करती है..*

*अलगाववाद को बढ़ावा देती है..* 

*भारत के दुश्मन पाकिस्तान से दोस्ती की वकालत करती है..*

*और कश्मीरियों को भारतीयों से अलग बताती है.*


*जी हाँ, कॉन्ग्रेस के ‘बिना राजतिलक’ वाले युवराज राहुल गाँधी ने श्रीनगर का दौरा किया..*

*वहाँ उन्होंने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की बात कही..*

*और कश्मीर से अपना ‘खून का रिश्ता’ बताया..*

*उसके बाद राहुल गाँधी अपने ‘मुखौटे’ के साथ, जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक़ अब्दुल्ला से मिले..*

*और फिर दोनों तरफ ये घोषणा की गई..*

*कि, कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कॉन्ग्रेस पार्टी साथ चुनाव लड़ेंगी..*

*इसमें माकपा भी सहयोगी रहेगी..*


*खैर, ये रिश्ता पहले भी रहा है..*

*इस रिश्ते पर सवाल पहले नहीं उठते थे..*

*खासकर 2019 से पहले तो बिल्कुल भी नहीं..*

*चूँकि कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस की सोच कमोवेश एक जैसी ही रही है..*

*बात, चाहे पड़ोसी पाकिस्तान से रिश्तों को लेकर हो..* 

*या आतंकवाद से निपटने को लेकर..*

*लेकिन इस बार सारी हदें पार कर दी गई हैं..*

*हम ये बात यूँ ही नहीं कह रहे हैं..*

*बल्कि, ये बाते कह रही है..* 

*कॉन्ग्रेस की रिश्तेदार, 'नेशनल कॉन्फ्रेंस' ही..*

*दरअसल, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने बीते सोमवार..* 

*(19 अगस्त 2024)*

*को पार्टी का घोषणा पत्र जारी किया है..*

*उन्होंने घोषणापत्र को NC का विजन डॉक्यूमेंट और शासन का रोडमैप बताया..*

*घोषणापत्र में 12 व्यापक वादे किए गए हैं..*

*जिनमें 2000 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा द्वारा पारित स्वायत्तता प्रस्ताव के पूर्ण कार्यान्वयन के लिए प्रयास करना शामिल है..*

*संजय अग्रवाल 'हाईवे'*

*नेशनल कॉन्फ्रेंस का घोषणा पत्र देखकर लगता ही नहीं, कि ये किसी भारतीय राजनीतिक पार्टी का घोषणा पत्र है..*

*ये बात सुनी-सुनाई सी लग रही होंगी..*

*लेकिन इन्हें हल्के में मत लीजिए..*

*हल्के में लेने की जगह जरा नेशनल कॉन्फ्रेंस के घोषणा पत्र की हाईलाइट्स पढ़ लीजिए*


*नेशनल कॉन्फ्रेंस के घोषणा पत्र की 12 गारंटियों मे..*


*हम (अनुच्छेद) 370-35ए को बहाल करने..*

*और 5 अगस्त, 2019 से पहले की स्थिति में राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रयास करते हैं..*

*हम जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 और केंद्र शासित प्रदेश, जम्मू और कश्मीर सरकार के कामकाज के नियम, 2019 को फिर से तैयार करने का प्रयास करेंगे..*

*जम्मू और कश्मीर के लोगों के भूमि और रोजगार के अधिकारों की रक्षा करेंगे..*

*यानी पहले की तरह बाहरी (भारतीयों) लोगों पर बैन..*

*भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत को प्रोत्साहित करेंगे..*

*जो कि मोदी सरकार नहीं कर रही है..*

*राजनीतिक कैदियों को एमनेस्टी देना..*

*पीएसए व यूएपीए हटाना..*

*(जिन पर आतंकवादी कृत्यों के आरोप हैं)*

*यानी माफी देकर जेल से रिहा करेंगे..*

*कर्मचारियों की "अन्यायपूर्ण”* 

*(आतंकवाद के समर्थन की वजह)*

*बर्खास्तगी की बहाली की जाएगी..*

*और राजमार्गों पर लोगों के उत्पीड़न..*

*(सेना की कड़ाई, पूछताछ) को समाप्त करेंगे..*


*अब अगर इन बातों पर गौर करें तो, आर्टिकल 370 को फिर से लागू करना ?*

*ये कैसे करेंगे, किसी को नहीं पता है..*

*वो फिर से, कश्मीरियों और पाकिस्तानी नागरिकों तक ही, कश्मीर की जमीन को सीमित करने का प्रयास करेंगे..*

*मानों पूरा भारत, कश्मीर में बस ही गया हो..* 

*और जो रोजगार, कामधंधे, निवेश आया है..*

*वो फिर से शून्य हो जाएगा..*


*ये पाकिस्तान के साथ बातचीत को बढ़ावा देंगे ?*

*क्यों भाई ?*

*उस पार से आने वाले आतंकवाद पर, प्रहार हुआ है इसलिए ?*

*क्योंकि इससे आप (कुछ लोगों) का भला होता था ?*

*याद करें, अभी कुछ दिन पहले ही जम्मू-कश्मीर बार एसोसिएशन का 20 साल तक अध्यक्ष रहा, मियाँ अब्दुल कयूम भट्ट, जून महीने में ही गिरफ्तार हुआ है..*

*गिरफ्तार भी क्यों हुआ ?*

*क्योंकि उसने आतंकवादियों की मदद से एक विरोधी वकील को ‘रास्ते से’ हटवाया था..*

*वो कश्मीरी आतंकवादियों का केस भी लड़ता रहा है..* 

*अब नेशनल कॉन्फ्रेंस उसे ‘राजनीतिक कैदी’ बताकर रिहा करेगी..*


*जरा सरकारी कर्मचारियों की अन्यायपूर्ण बर्खास्तगी वाली लाइन समझ लीजिए..* 

*ऐसे लोगों को नेशनल कॉन्फ्रेंस फिर से बहाल करेगी..*

*जो आतंकवाद से जुड़े मामलों की वजह से बर्खास्त कर दिए गए हैं..*

*ये वो लोग हैं, जिनके पति-पत्नी, भाई, पिता घोषित आतंकवादी हैं..*

*सरकार से मिलने वाली सैलरी वो आतंकवादियों को देते हैं..*

*या फिर आतंकवादियों की मदद करने, उन्हें सूचना पहुँचाने, और देश के खिलाफ काम करने के मामले में जिनकी सेवाएँ समाप्त की गई हैं..*

*नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार बनने पर उन्हें माफी दे दी जाएगी..*

*खैर, ये तो तब होगा, जब जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलेगा..*

*और उसके इस लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद देगी, 'कॉन्ग्रेस'..*


*वैसे, एक वादा तो और भी किया है उमर अब्दुल्ला ने..*

*कि साल 2000 में जो रिजोल्यूशन जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार रहते पास किया गया था..*

*जिसमें जम्मू-कश्मीर को स्वायत्तता की माँग थी..*

*उसे तत्कालीन एनडीए सरकार यानी अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने पूरी तरह से खारिज कर दिया था..*

*उसे फिर से पास करके केंद्र सरकार के पास भेजने की..*

*अब ये संविधान के 16वें संसोधन की मजबूरी कहें, या कुछ और..*

*कि नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर को अलग देश बनाने की बात नहीं कर रही..*

*वर्ना वो ये भी कर देती..*

*बाकी उनकी इस माँग में, और पड़ोसी पाकिस्तान की माँग में, कोई खास अंतर रह नहीं गया है..*


*जी हाँ, अगर अब तक आपके मन में ये सवाल आ रहा हो..*

*कि कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस का रिश्ता क्या कहलाता है ?*

*तो ये जवाब है...*

*जवाब है, कॉन्ग्रेस का ऐसी ताकतों के साथ हाथ मिलाना..*

*जो देश को विभाजन की तरफ ढकेलने की कोशिश करते हैं..*

*वैसे, कॉन्ग्रेस खुद आर्टिकल 370 के हटाने का भी विरोध करती रही है..*

*वैसे, राहुल गाँधी के ‘खून वाले रिश्ते’ के बयान के बाद..*

*गाँधी खानदान का, अब्दुल्ला खानदान से, रिश्ता आप भी जानते ही होंगे..*

*अगर नहीं जानतें, तो यहाँ पढ़ लीजिए..*


*बहरहाल, अब जब पूरा देश कॉन्ग्रेस, और नेशनल कॉन्फ्रेंस के ना’पाक’ रिश्ते को जान ही चुका है..*

*तो यहाँ ये भी जानना जरूरी है..*

*कि जिस अखिलेश यादव को इंडी गठबंधन, खास कर सपा कार्यकर्ता देश का अगला ‘रक्षा मंत्री’ बनाने पर तुले हैं..*

*उनके पिता मुलायम सिंह यादव भी रक्षा मंत्री रह चुके हैं..*

*उनका राहुल गाँधी, उमर अब्दुल्ला से कितना याराना है..*

*फिर इस गठबंधन के बाकी साथी, चाहें वो शरद पवार हों, या ममता बनर्जी..* 

*इनके पाकिस्तान और ‘मजहब विशेष’ प्रेम से भी सभी वाकिफ हैं..*

*साथ ही वामपंथी पार्टियों के 1962 से लेकर हमेशा किए जाने वाेल देश से छल से भी..*

*ऐसे में इस गठबंधन को जम्मू-कश्मीर के असली देशवासी ही जवाब देंगे..* 

*इसमें कोई संदेह नहीं है..*

*बता दें कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव, तीन चरणों में..*

*18 सितंबर, 25 सितंबर, और 1 अक्टूबर को होंगे..*

*नतीजे 4 अक्टूबर को घोषित किए जाएँगे..* 

*पहले चरण के लिए नामांकन 27 अगस्त..*

*दूसरे चरण के लिए 5 सितंबर..*

*और तीसरे चरण के लिए 12 सितंबर से दाखिल किए जाएँगे..*

*इस चुनाव में कश्मीरी प्रवासियों के लिए दिल्ली, जम्मू और उधमपुर में स्पेशल पोलिंग बूथ बनाए गए हैं..*


*जम्मू-कश्मीर में कुल 90 निर्वाचन क्षेत्र हैं..* 

*जिनमें से 74 जनरल..*

*9 अनुसूचित जाति..*

*और 7 अनुसूचित जनजाति के लिए हैं..*

*केंद्रशासित प्रदेश में मतदाताओं की संख्या कुल 87.09 लाख हैं..*

*जिसमें 44.46 लाख पुरुष..* 

*और 42.62 लाख महिला मतदाता हैं..*

*जम्मू-कश्मीर में युवा मतदाताओं की संख्या 20 लाख है..*

*पिछले साल दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को 30 सितंबर तक जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने का निर्देश दिया था..*


*1- जम्‍मू-कश्‍मीर से 5 अगस्‍त 2019 को आर्टिकल 370 को हटाया गया था..*


*2- आखिरी विधानसभा चुनाव 2014 में 87 सीटों पर हुआ था..*

*जिनमें 4 सीटें लद्दाख की थीं..*


*3- जम्‍मू-कश्‍मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद, सात विधानसभा सीटें बढ़ गई हैं..*


*4- 90 विधानसभा सीटों में से 74 सामान्‍य, 7 एससी और 9 सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं..*


*5- जम्मू-कश्मीर सरकार का कार्यकाल पहले 6 साल होता था, अब 5 साल का होगा..*


*सवाल ये नहीं है कि कौन सी पार्टी किसके साथ गठबंधन करेगी..*

*सवाल नीतियों का है..*

*एक तरफ कॉन्ग्रेस देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी होने का दंभ भरती है..*

*तो उसके नेता, और कार्यकर्ता, उसके राजनीतिक सहयोगी, देश में सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक स्तर पर तोड़फोड़ और अलगाववादी नीतियाँ अपनाते हैं..*

*दक्षिण में कॉन्ग्रेस की सहयोगी द्रमुक की बात करें..* 

*तो वो सनातन परंपरा को ही मिटाने का संकल्प लेती है..*

*तो उत्तर में नेशनल कॉन्फ्रेंस, भारत की शान जम्मू-कश्मीर को स्वायत्तता दिलाने, पाकिस्तान से बातचीत करने, आतंकवादियों को जेल से रिहा करने की बात करती है..*

*ऐसी दो मुँही बातें कब तक चलेंगी मिस्टर युवराज ?*

*यह है कांग्रेस की कथनी और करनी..*

*राष्ट्रहित सर्वोपरि..*

*संजय अग्रवाल 'हाईवे'*

*भारत माता की जय* 

*वंदे मातरम - जय हिंद*

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*🚩गीता के 18 अध्यायो का संक्षेप सार🚩*

 *🚩गीता के 18 अध्यायो का संक्षेप सार🚩* 

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भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत के युद्ध में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया और इसी उपदेश को सुनकर अर्जुन को ज्ञान की प्राप्ति हुई। गीता का उपदेश मात्र अर्जुन के लिए नहीं था बल्कि ये समस्त जगत के लिए था, अगर कोई व्यक्ति गीता में दिए गए उपदेश को अपने जीवन में अपनाता है तो वह कभी किसी से परास्त नहीं हो सकता है। गीता माहात्म्य में उपनिषदों को गाय और गीता को उसका दूध कहा गया है। इसका अर्थ है कि उपनिषदों की जो अध्यात्म विद्या है,उसको गीता सर्वांश में स्वीकार करती है। गीता के 18 अध्याय में क्या संदेश छिपा हुआ है आइए संक्षिप्त में जाने...

*🪷पहला अध्याय* 

अर्जुन ने युद्ध भूमि में भगवान श्री कृष्ण से कहा कि मुझे तो केवल अशुभ लक्षण ही दिखाई दे रहे हैं, युद्ध में स्वजनों को मारने में मुझे कोई कल्याण दिखाई नही देता है। मैं न तो विजय चाहता हूं, न ही राज्य और सुखों की इच्छा करता हूं, हमें ऐसे राज्य, सुख अथवा इस जीवन से भी क्या लाभ है। जिनके साथ हमें राज्य आदि सुखों को भोगने की इच्छा है, जब वह ही अपने जीवन के सभी सुखों को त्याग करके इस युद्ध भूमि में खड़े हैं। मैं इन सभी को मारना नहीं चाहता हूं, भले ही यह सभी मुझे ही मार डालें लेकिन अपने ही कुटुम्बियों को मारकर हम कैसे सुखी हो सकते हैं। हम लोग बुद्धिमान होकर भी महान पाप करने को तैयार हो गए हैं, जो राज्य और सुख के लोभ से अपने प्रियजनों को मारने के लिए आतुर हो गए हैं। इस प्रकार शोक से संतप्त होकर अर्जुन युद्ध-भूमि में धनुष को त्यागकर रथ पर बैठ गए तब भगवान श्री कृष्ण ने अपने कर्तव्य को भूल बैठे अर्जुन को उनके कर्तव्य और कर्म के बारे में बताया। भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को जीवन के सच के परिचित कराया। कृष्ण ने अर्जुन की स्थिति को भांप लिया भगवान कृष्ण समझ गए की अर्जुन का शरीर ठीक है लेकिन युद्ध आरंभ होने से पहले ही उसका मनोबल टूट चुका है। बिना मन के यह शरीर खड़ा नहीं रह सकता। अत: भगवान कृष्ण ने एक गुरु का कर्तव्य निभाते हुए तर्क, बुद्धि, ज्ञान, कर्म की चर्चा, विश्व के स्वभाव, उसमें जीवन की स्थिति और उस सर्वोपरि परम सत्तावान ब्रह्म के साक्षात दर्शन से अर्जुन के मन का उद्धार किया।

*🪷दूसरा अध्याय* 

दूसरे अध्याय में भगवान श्री कृष्ण ने बताया कि जीना और मरना, जन्म लेना और बढ़ना, विषयों का आना और जाना। सुख और दुख का अनुभव, ये तो संसार में होते ही हैं। काल की चक्रगति इन सब स्थितियों को लाती है और ले जाती है। जीवन के इस स्वभाव को जान लेने पर फिर शोक नहीं होता। काम, क्रोध, भय, राग, द्वेष से मन का सौम्यभाव बिगड़ जाता है और इंद्रियां वश में नहीं रहती हैं ।इंद्रियजय ही सबसे बड़ी आत्मजय है। बाहर से कोई विषयों को छोड़ भी दे तो भी भीतर का मन नहीं मानता। विषयों का स्वाद जब मन से जाता है, तभी मन प्रफुल्लित, शांत और सुखी होता है। समुद्र में नदियां आकर मिलती हैं पर वह अपनी मर्यादा नहीं छोड़ता। ऐसे ही संसार में रहते हुए, उसके व्यवहारों को स्वीकारते हुए, अनेक कामनाओं का प्रवेश मन में होता रहता है। किंतु उनसे जिसका मन अपनी मर्यादा नहीं खोता उसे ही शांति मिलती हैं। इसे प्राचीन अध्यात्म परिभाषा में गीता में ब्राह्मीस्थिति कहा है।

*🪷तीसरा अध्याय* 

तीसरे अध्याय में भगवान श्री कृष्ण ने बताया कि कोई व्यक्ति कर्म छोड़ ही नहीं सकता। कृष्ण ने अपना दृष्टांत देकर कहा कि मैं नारायण का रूप हूं, मेरे लिए कुछ कर्म शेष नहीं है। फिर भी मैं तंद्रारहित होकर कर्म करता हूं और अन्य लोग मेरे मार्ग पर चलते हैं। अंतर इतना ही है कि जो मूर्ख हैं वे लिप्त होकर कर्म करते हैं पर ज्ञानी असंग भाव से कर्म करता हैं। गीता में यहीं एक साभिप्राय शब्द बुद्धिभेद है। अर्थात् जो साधारण समझ के लोग कर्म में लगे हैं उन्हें उस मार्ग से उखाड़ना उचित नहीं, क्योंकि वे ज्ञानवादी बन नहीं सकते और यदि उनका कर्म भी छूट गया तो वे दोनों ओर से भटक जाएँगे। प्रकृति व्यक्ति को कर्म करने के लिए बाध्य करती है। जो व्यक्ति कर्म से बचना चाहता है वह ऊपर से तो कर्म छोड़ देता है पर मन ही मन उसमे डूबा रहता है।

*🪷चौथा अध्याय* 

चौथे अध्याय में बताया गया है कि ज्ञान प्राप्त करके कर्म करते हुए भी कर्मसंन्यास का फल किस उपाय से प्राप्त किया जा सकता है। यह गीता का वह प्रसिद्ध आश्वासन है कि जब जब धर्म की ग्लानि होती है तब तब मनुष्यों के बीच भगवान का अवतार होता है, अर्थात् भगवान की शक्ति विशेष रूप से मूर्त होती है। यहीं पर एक वाक्य विशेष ध्यान देने योग्य है- क्षिप्रं हि मानुषे लोके सिद्धिर्भवति कर्मजा। 'कर्म से सिद्धि'-इससे बड़ा प्रभावशाली सूत्र गीतादर्शन में नहीं है। किंतु गीतातत्व इस सूत्र में इतना सुधार और करता है कि वह कर्म असंग भाव से अर्थात् फलाशक्ति से बचकर करना चाहिए।

*🪷पाँचवा अध्याय* 

पाँचवे अध्याय में भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि कर्म के साथ जो मन का संबंध है, उसके संस्कार पर या उसे विशुद्ध करने पर विशेष ध्यान दिलाया गया है। किसी एक मार्ग पर ठीक प्रकार से चले तो समान फल प्राप्त होता है। जीवन के जितने कर्म हैं, सबको समर्पण कर देने से व्यक्ति एकदम शांति के ध्रुव बिंदु पर पहुँच जाता है। किसी एक मार्ग पर ठीक प्रकार से चले तो समान फल प्राप्त होता है। जीवन के जितने कर्म हैं, सबको समर्पण कर देने से व्यक्ति एकदम शांति के ध्रुव बिंदु पर पहुँच जाता है और जल में खिले कमल के समान कर्म रूपी जल से लिप्त नहीं होता।

*🪷छठा अध्याय* 

भगवान श्री कृष्ण ने छठे अध्याय में कहा कि जितने विषय हैं उन सबसे इंद्रियों का संयम ही कर्म और ज्ञान का निचोड़ है। सुख में और दुख में मन की समान स्थिति, इसे ही योग कहा जाता है। जब मनुष्य सभी सांसारिक इच्छाओं का त्याग करके बिना फल की इच्छा के कोई कार्य करता है तो उस समय वह मनुष्य योग मे स्थित कहलाता है। जो मनुष्य मन को वश में कर लेता है, उसका मन ही उसका सबसे अच्छा मित्र बन जाता है, लेकिन जो मनुष्य मन को वश में नहीं कर पाता है, उसके लिए वह मन ही उसका सबसे बड़ा शत्रु बन जाता है। जिसने अपने मन को वश में कर लिया उसको परमात्मा की प्राप्ति होती है और जिस मनुष्य को ज्ञान की प्राप्ति हो जाती है उसके लिए सुख-दुःख, सर्दी-गर्मी और मान-अपमान सब एक समान हो जाते हैं। ऐसा मनुष्य स्थिर चित्त और इन्द्रियों को वश में करके ज्ञान द्वारा परमात्मा को प्राप्त करके हमेशा सन्तुष्ट रहता है।

*🪷सातवां अध्याय* 

सातवें अध्याय में श्री कृष्ण ने कहा कि सृष्टि के नानात्व का ज्ञान विज्ञान है और नानात्व से एकत्व की ओर प्रगति ज्ञान है। ये दोनों दृष्टियाँ मानव के लिए उचित हैं। इस अध्याय में भगवान के अनेक रूपों का उल्लेख किया गया है जिनका और विस्तार विभूतियोग नामक दसवें अध्याय में आता है। यहीं विशेष भगवती दृष्टि का भी उल्लेख है जिसका सूत्र-वासुदेव: सर्वमिति, सब वसु या शरीरों में एक ही देवतत्व है, उसी की संज्ञा विष्णु है। किंतु लोक में अपनी अपनी रु चि के अनुसार अनेक नामों और रूपों में उसी एक देवतत्व की उपासना की जाती है। वे सब ठीक हैं। किंतु अच्छा यही है कि बुद्धिमान मनुष्य उस ब्रह्मतत्व को पहचाने जो अध्यात्म विद्या का सर्वोच्च शिखर है।

*🪷आठवां अध्याय* 

आठवें अध्याय में श्री कृष्ण ने बताया कि जीव और शरीर की संयुक्त रचना का ही नाम अध्यात्म है। देह के भीतर जीव, ईश्वर तथा भूत ये तीन शक्तियाँ मिलकर जिस प्रकार कार्य करती हैं उसे अधियज्ञ कहते हैं। उपनिषदों में अक्षर विद्या का विस्तार हुआ और गीता में उस अक्षरविद्या का सार कह दिया गया है-अक्षर ब्रह्म परमं, अर्थात् परब्रह्म की संज्ञा अक्षर है। मनुष्य, अर्थात् जीव और शरीर की संयुक्त रचना का ही नाम अध्यात्म है। जीवसंयुक्त भौतिक देह की संज्ञा क्षर है और केवल शक्तितत्व की संज्ञा आधिदैवक है। देह के भीतर जीव, ईश्वर तथा भूत ये तीन शक्तियाँ मिलकर जिस प्रकार कार्य करती हैं उसे अधियज्ञ कहते हैं।

*🪷नवां अध्याय* 

नवें अध्याय में भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि वेद का समस्त कर्मकांड यज्ञ, अमृत, मृत्यु, संत-असंत और जितने भी देवी-देवता हैं सबका पर्यवसान ब्रह्म में है। इस क्षेत्र में ब्रह्मतत्व का निरूपण ही प्रधान है, उसी से व्यक्त जगत का बारंबार निर्माण होता है। वेद का समस्त कर्मकांड यज्ञ, अमृत, और मृत्यु, संत और असंत, और जितने भी देवी देवता है, सबका पर्यवसान ब्रह्म में है। लोक में जो अनेक प्रकार की देवपूजा प्रचलित है, वह भी अपने अपने स्थान में ठीक है, समन्वय की यह दृष्टि भागवत आचार्यों को मान्य थी, वस्तुत: यह उनकी बड़ी शक्ति थी।

*🪷दसवां अध्याय* 

दसवें अध्याय का सार यह है कि लोक में जितने देवता हैं, सब एक ही भगवान की विभूतियाँ हैं, मनुष्य के समस्त गुण और अवगुण भगवान की शक्ति के ही रूप हैं। इसका सार यह है कि लोक में जितने देवता हैं, सब एक ही भगवान, की विभूतियाँ हैं, मनुष्य के समस्त गुण और अवगुण भगवान की शक्ति के ही रूप हैं। बुद्धि से इन देवताओं की व्याख्या चाहे न हो सके किंतु लोक में तो वह हैं ही। कोई पीपल को पूज रहा है। कोई पहाड़ को कोई नदी या समुद्र को, कोई उनमें रहनेवाले मछली, कछुओं को। यों कितने देवता हैं, इसका कोई अंत नहीं। विश्व के इतिहास में देवताओं की यह भरमार सर्वत्र पाई जाती है। भागवतों ने इनकी सत्ता को स्वीकारते हुए सबको विष्णु का रूप मानकर समन्वय की एक नई दृष्टि प्रदान की। इसी का नाम विभूतियोग है। जो सत्व जीव बलयुक्त अथवा चमत्कारयुक्त है, वह सब भगवान का रूप है। इतना मान लेने से चित्त निर्विरोध स्थिति में पहुँच जाता है।

*🪷11वां अध्याय* 

11वें अध्याय में अर्जुन ने भगवान का विश्वरूप देखा। विराट रूप का अर्थ है मानवीय धरातल और परिधि के ऊपर जो अनंत विश्व का प्राणवंत रचनाविधान है, उसका साक्षात दर्शन। विष्णु का जो चतुर्भुज रूप है, वह मानवीय धरातल पर सौम्यरूप है। विष्णु का जो चतुर्भुज रूप है, वह मानवीय धरातल पर सौम्यरूप है। जब अर्जुन ने भगवान का विराट रूप देखा तो उसके मस्तक का विस्फोटन होने लगा। 'दिशो न जाने न लभे च शर्म' ये ही घबराहट के वाक्य उनके मुख से निकले और उसने प्रार्थना की कि मानव के लिए जो स्वाभाविक स्थिति ईश्वर ने रखी है, वही पर्याप्त है।

*🪷बारहवां अध्याय* 

बारहवें अध्याय में श्री कृष्ण ने बताया कि जो भगवान के ध्यान में लग जाते हैं वे भगवन्निष्ठ होते हैं अर्थात भक्ति से भक्ति पैदा होती है। नौ प्रकार की साधना भक्ति हैं तथा इनके आगे प्रेमलक्षणा भक्ति साध्य भक्ति है जो कर्मयोग और ज्ञानयोग सबकी साध्य है। भगवान कृष्ण ने कहा जो मनुष्य अपने मन को स्थिर करके निरंतर मेरे सगुण रूप की पूजा में लगा रहता है, वह मेरे द्वारा योगियों में अधिक पूर्ण सिद्ध योगी माने जाते हैं। वहीं जो मनुष्य परमात्मा के सर्वव्यापी, अकल्पनीय, निराकार, अविनाशी, अचल स्थित स्वरूप की उपासना करता है और अपनी सभी इन्द्रियों को वश में करके, सभी परिस्थितियों में समान भाव से रहते हुए सभी प्राणीयों के हित में लगा रहता है वह भी मुझे प्राप्त करता है। भगवान कृष्ण ने अर्जुन से कहा की तू अपने मन को मुझमें ही स्थिर कर और मुझमें ही अपनी बुद्धि को लगा, इस प्रकार तू निश्चित रूप से मुझमें ही सदैव निवास करेगा। यदि तू ऐसा नही कर सकता है, तो भक्ति-योग के अभ्यास द्वारा मुझे प्राप्त करने की इच्छा उत्पन्न कर। अगर तू ये भी नही कर सकता है, तो केवल मेरे लिये कर्म करने का प्रयत्न कर, इस प्रकार तू मेरे लिये कर्मों को करता हुआ मेरी प्राप्ति रूपी परम-सिद्धि को प्राप्त करेगा।

*🪷तेरहवां अध्याय* 

तेरहवें अध्याय में एक सीधा विषय क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ का विचार है। यह शरीर क्षेत्र है, उसका जानने वाला जीवात्मा क्षेत्रज्ञ है। गुणों की साम्यावस्था का नाम प्रधान या प्रकृति है। गुणों के वैषम्य से ही वैकृत सृष्टि का जन्म होता है। अकेला सत्व शांत स्वभाव से निर्मल प्रकाश की तरह स्थिर रहता है और अकेला तम भी जड़वत निश्चेष्ट रहता है। किंतु दोनों के बीच में छाया हुआ रजोगुण उन्हें चेष्टा के धरातल पर खींच लाता है। गति तत्व का नाम ही रजस है। भगवान् कृष्ण ने कहा कि मेरे अतिरिक्त अन्य किसी वस्तु को प्राप्त न करने का भाव, बिना विचलित हुए मेरी भक्ति में स्थिर रहने का भाव, शुद्ध एकान्त स्थान में रहने का भाव, निरन्तर आत्म-स्वरूप में स्थित रहने का भाव और तत्व-स्वरूप परमात्मा से साक्षात्कार करने का भाव यह सब तो मेरे द्वारा ज्ञान कहा गया है और इनके अतिरिक्त जो भी है वह अज्ञान है।

*🪷चौदहवां अध्याय* 

चौदहवें अध्याय में समस्त वैदिक, दार्शनिक और पौराणिक तत्वचिंतन का निचोड़ है-सत्व, रज, तम नामक तीन गुण-त्रिको की अनेक व्याख्याएं हैं। जो मूल या केंद्र है, जिसे ऊर्ध्व कहते हैं, वह ब्रह्म ही है एक ओर वह परम तेज, जो विश्वरूपी अश्वत्थ को जन्म देता है, सूर्य और चंद्र के रूप में प्रकट है, दूसरी ओर वही एक एक चैतन्य केंद्र में या प्राणि शरीर में आया हुआ है। जैसा गीता में स्पष्ट कहा है-अहं वैश्वानरो भूत्वा प्राणिनां देहमाश्रित: । वैश्वानर या प्राणमयी चेतना से बढ़कर और दूसरा रहस्य नहीं है। नर या पुरुष तीन हैं-क्षर, अक्षर और अव्यय। पंचभूतों का नाम क्षर है, प्राण का नाम अक्षर है और मनस्तत्व या चेतना की संज्ञा अव्यय है। इन्हीं तीन नरों की एकत्र स्थिति से मानवी चेतना का जन्म होता है उसे ही ऋषियों ने वैश्वानर अग्नि कहा है।

*🪷पंद्रहवां अध्याय* 

पंद्रहवें अध्याय में भगवान श्री कृष्ण ने विश्व के अश्वत्थ रूप का वर्णन किया है। यह अश्वत्थ रूपी संसार महान विस्तार वाला है। वह ब्रह्म ही है एक ओर वह परम तेज, जो विश्वरूपी अश्वत्थ को जन्म देता है, सूर्य और चंद्र के रूप में प्रकट है। यह सृष्टि के द्विविरुद्ध रूप की कल्पना है, एक अच्छा और दूसरा बुरा। एक प्रकाश में, दूसरा अंधकार में। एक अमृत, दूसरा मर्त्य। एक सत्य, दूसरा अनृत। नर या पुरुष तीन हैं-क्षर, अक्षर और अव्यय। पंचभूतों का नाम क्षर है, प्राण का नाम अक्षर है और मनस्तत्व या चेतना की संज्ञा अव्यय है। इन्हीं तीन नरों की एकत्र स्थिति से मानवी चेतना का जन्म होता है उसे ही ऋषियों ने वैश्वानर अग्नि कहा है।

*🪷सोलहवां अध्याय* 

सोलहवें अध्याय में देवासुर संपत्ति का विभाग बताया गया है। आरंभ से ही ऋग्देव में सृष्टि की कल्पना देवी और आसुरी शक्तियों के रूप में की गई है। यह सृष्टि के द्विविरुद्ध रूप की कल्पना है, एक अच्छा और दूसरा बुरा। एक प्रकाश में, दूसरा अंधकार में। एक अमृत, दूसरा मर्त्य। एक सत्य, दूसरा अनृत। भगवान कृष्ण ने कहा की अनेक प्रकार की चिन्ताओं से भ्रमित होकर विषय-भोगों में आसक्त आसुरी स्वभाव वाले मनुष्य नरक में जाते हैं। आसुरी स्वभाव वाले व्यक्ति स्वयं को ही श्रेष्ठ मानते हैं और वे बहुत ही घमंडी होते हैं। ऐसे मनुष्य धन और झूठी मान-प्रतिष्ठा के मद में लीन होकर केवल नाम-मात्र के लिये बिना किसी शास्त्र-विधि के घमण्ड के साथ यज्ञ करते हैं। आसुरी स्वभाव वाले ईष्यालु, क्रूरकर्मी और मनुष्यों में अधम होते हैं, ऐसे अधम मनुष्यों को मैं संसार रूपी सागर में निरन्तर आसुरी योनियों में ही गिराता रहता हूं ।

*🪷सत्रहवां अध्याय* 

सत्रहवें अध्याय में भगवान श्री कृष्ण ने बताया कि सत, रज और तम जिसमें इन तीन गुणों का प्रादुर्भाव होता है, उसकी श्रद्धा या जीवन की निष्ठा वैसी ही बन जाती है। इसका संबंध सत, रज और तम, इन तीन गुणों से ही है, अर्थात् जिसमें जिस गुण का प्रादुर्भाव होता है, उसकी श्रद्धा या जीवन की निष्ठा वैसी ही बन जाती है। यज्ञ, तप, दान, कर्म ये सब तीन प्रकार की श्रद्धा से संचालित होते हैं। यहाँ तक कि आहार भी तीन प्रकार का है। उनके भेद और लक्षण गीता ने यहाँ बताए हैं। जिस प्रकार यज्ञ से, तप से और दान से जो स्थिति प्राप्त होती है, उसे भी "सत्‌" ही कहा जाता है और उस परमात्मा की प्रसन्नता लिए जो भी कर्म किया जाता है वह भी निश्चित रूप से "सत्‌" ही कहा जाता है। बिना श्रद्धा के यज्ञ, दान और तप के रूप में जो कुछ भी सम्पन्न किया जाता है, वह सभी "असत्‌" कहा जाता है, इसलिए वह न तो इस जन्म में लाभदायक होता है और न ही अगले जन्म में लाभदायक होता है।

*🪷अठारवां अध्याय* 

अठारवें अध्याय में गीता के समस्त उपदेशों का सार एवं उपसंहार है। जो बुद्धि धर्म-अधर्म, बंधन-मोक्ष, वृत्ति-निवृत्ति को ठीक से पहचानती है, वही सात्विकी बुद्धि है और वही मानव की सच्ची उपलब्धि है। पृथ्वी के मानवों में और स्वर्ग के देवताओं में कोई भी ऐसा नहीं जो प्रकृति के चलाए हुए इन तीन गुणों से बचा हो। मनुष्य को बहुत देख भालकर चलना आवश्यक है जिससे वह अपनी बुद्धि और वृत्ति को बुराई से बचा सके और क्या कार्य है, क्या अकार्य है, इसको पहचान सके। धर्म और अधर्म को, बंध और मोक्ष को, वृत्ति और निवृत्ति को जो बुद्धि ठीक से पहचनाती है, वही सात्विकी बुद्धि है और वही मानव की सच्ची उपलब्धि है। जो मनुष्य श्रद्धा पूर्वक इस गीताशास्त्र का पाठ और श्रवण करते हैं वे सभी पापों से मुक्त होकर श्रेष्ठ लोक को प्राप्त होते हैं।  


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Saturday, August 31, 2024

*"सरसों के तेल के हैं अनगिनत अद्भुत अमृतमयी फायदे"*

 *"सरसों के तेल के हैं अनगिनत अद्भुत अमृतमयी फायदे"*

सरसों भारतीय रसोई का एक अहम हिस्‍सा है। सरसों के तेल और इसके दाने सदियों से भारतीय पकवानों का हिस्‍सा है।

सरसों की पत्तियां भी बहुत फायदेमंद है।

इस तेल को मालिश के लिए भी इस्‍तेमाल किया जाता है।

इसकी मालिश से रक्‍त संचार बढ़ता है, मांसपेशियां विकसित और मजबूत होती है, त्‍वचा की बनावट में सुधार होता है।

बच्‍चों को भी सरसों के उबटन की मालिश की जाती है।

सरसों का तेल जीवाणुरोधी होता है।

खाने में पौष्टिक और बहुपयोगी हैं।


*आइये जानते हैं इसके लाभ...*


*"सरसों के तेल के लाभ"*

सरसों के तेल में ओलिक एसिड और लीनोलिक एसिड पाया जाता है, यह फैटी एसिड होते हैं जो बालों के लिए फायदेमंद हैं।

इनसे बालों की जड़ो को पोषण मिलता है।

अगर आप इस तेल को हफ्ते में दो दिन इस्‍तेमाल करेंगे तो बाल झड़ना कम हो जाता है।


दातों और मसूड़ों पर सरसों का तेल रगड़ने से वह मजबूत होते हैं।


पायरिया के मरीजों के लिए भी यह फायदेमंद है।


इसके अलावा यह सर्दी, जुखाम, सिरदर्द और शरीर के दर्द में भी बहुत फायदा देता है।

सरसों के तेल में एलिल आइसोथियोसाइनेट के गुण मौजूद होते हैं।

त्वचा विकारों के लिए सबसे अच्छे इलाज के रूप में काम करता है। साथ ही यह शरीर के किसी भी भाग में फंगस को बढ़ने से रोकता है।


सरसों शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है।

यह शरीर को गर्माहट भी प्रदान करता है, अगर इसे ठंडक में खाया जाए तो ठंड बिलकुल नहीं लगेगी।


अगर आपको भूख नहीं लगती तो अपने खाने को सरसों के तेल में बनाना शुरु कर दीजिए, क्‍योंकि यह तेल भूख बढ़ा कर शरीर में पाचन क्षमता को बढ़ाता है।


सरसों के तेल में विटामिन ई होता है।

इसे त्‍वचा पर लगाने से सूर्य की अल्‍ट्रावायलेट की किरणों से बचाव होता है।


सरसों का तेल साथ ही यह झाइयों और झुर्रियों से भी काफी हद तक राहत दिलाता है।


सरसों के तेल से मालिश करने से गठिया और जोड़ो का दर्द भी ठीक हो जाता है।

गठिया के रोगी सरसों के तेल में कपूर मिलाकर मालिश करें फायदा होगा।


सरसों का तेल खाने से कोरोनरी हार्ट डिज़ीज का खतरा भी थोड़ा कम हो जाता है।


जिन लोगों की त्‍वचा रूखी-सूखी है, वे लोग अपने हाथों, पैरों में तेल लगाने के बाद पानी से स्‍नान कर लें। इससे त्‍वचा को पोषण मिलता है और त्‍वचा नम हो जाती है।


सरसो के दानों को पीसकर लेप लगाने से किसी भी प्रकार की सूजन ठीक हो जाती है।


सरसों के दानों को पीसकर शहद के साथ चाटने से कफ और खांसी समाप्त हो जाती है।


सरसों के तेल को एक टॉनिक के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसका इस्‍तेमाल करने से शरीर की कार्य क्षमता बढ़ा कर शरीर की कमजोरी को एकदम दूर कर देता है।

*_सच्चर कमिशन क्या था_*

 ★★★  *_सच्चर कमिशन क्या था_*  ★★★


मुसलमान 1 वोट डालेगा तो उसकी गिनती 2 वोट के बराबर होगा।

सच्चर कमिशन की मांग थी ऐसी...


सच्चर कमिशन क्या था❓जिसे सोनिया गांधी मनमोहन की सरकार मे 2005 मे लाई थी️।


"सच्चर कमिशन" नाम का आयोग सोनिया गांधी के कहने पर बनाया गया था जिसका काम था भारत मे मुसलमानो की आर्थिक स्थिति का आंकलन करने के लिए।


साफ शब्दों मे कहा जाय तो भारत के अस्तित्व को तालिबानी बनाने के लिए कांग्रेस ने बनाया था "सच्चर कमीसन" 2005 मे।


"सच्चर कमिसन" ने मनगढंत रिपोर्ट सोनिया गांधी के इसारे पर बना के देश को ये झूठ परोस दिया की भारत मे मुसलमानो की स्थिति दलितों और आदिवासियो से भी बत्तर है।


अब "सच्चर कमिशन" ने मुसलमानो की स्थिति सुधारने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को 10 तरीके का सुझाव दिया और इसे जल्द से जल्द भारत मे लागु करने की मांग किया।


*वो 10 बड़ी मांग इस प्रकार से थी -*

1) मुसलमानो को भारत मे आबादी के हिसाब से दोगुना अधिकार मिले अर्थात अगर मुसलमान 1 वोट डाले तो उसकी गिनती 2 वोट के बराबर हो।


2) मुसलमानो को OBC आरक्षण के साथ-साथ SC-ST के हिस्से वाले आरक्षण मे भी पुरा-पुरा लाभ मिले।


3) मुसलमान अगर किसी भी बैंक से लोन ले तो उसका आधा लोन केंद्र और राज्य सरकार मिल के भरे और भारत के कुल बजट का 20% हिस्सा मुसलमानो के लिए निकाल कर बाकी बचे बजट से पूरे देश को चलाया जाय।


4) IIT-IIM  और MBBS समेत्  सभी तरह के ग्रेजुएशन, की पढ़ाई के लिए मुसलमानो को अल्पसंख्यक-मंत्रालय के अंतर्गत मुफ्त पढ़ाई कराई जाय।


5) भारत का शिक्षा मंत्रालय मुसलमानो के मदरसा की डिग्री को IAS- IPS-PCS और जज़ बनने के लिए भी मान्यता दे।


6) भारत मे 30% सांसदों की सीट और हर एक राज्य मे 40% विधायकों की सीट मुसलमानो के लिए रिजर्व किया जाय।


7) भारत की हर एक राज्य सरकार बोर्ड निगम और सरकारी नौकरियो मे मुसलमानो की हिस्सेदारी बढ़ा के 50% करे।


8) मुसलमानो को व्यापार करने के लिए हर एक राज्य मे अगल-अलग इंड्रस्ट्रियल जोन हो और उसे वहा कर्ज मुक्त लोन के साथ मुफ्त बिजली और मुफ्त ज़मीन मिले।


9) मुस्लिम लड़कियों की शादी के लिए केंद्र सरकार 5 लाख रुपये और राज्य सरकार 2 लाख रुपये की मदद करे और मुस्लिम लड़को के स्व रोजगार के लिए 10 लाख रुपये सरकार अनुदान करे।


10) जिस भी गाँव क़स्बा शहर या जिला मे मुस्लिम आबादी 25% से ज्यादा हो उसे सिर्फ मुसलमानो के चुनाव लड़ने के लिए रिजर्व कर दिया जाय।


*सारी जानकारी आप को आसानी से Google और Youtube पर मिल जाएंगी "सच्चर कमिशन" के बारे मे।*


*BJP के कड़े विरोध के बाद कांग्रेस ने "सच्चर कमिशन" को लागु नही कर सकी वरना हिन्दुओ के 1 वोट के सामने मुसलमानो का 2 वोट की गिनती भारी पड़ता और भारत की राजनीति और पूरे देश का संसाधन मुसलमानो के कब्जे मे चला गया होता।*


*खुद भी इस पोस्ट को 10 बार पढ़े और 100 करोड़ हिन्दुओ तक इस पोस्ट को शेयर कर के पहुँचाये।*

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Friday, August 30, 2024

भारत में #बलात्कार_का_आरंभ और यौन अपराध..

 भारत में #बलात्कार_का_आरंभ और यौन अपराध..

#इस्लाम_की_देन !!

मुझे पता है 90 % बिना पढ़े ही निकल लेंगे..


आखिर भारत जैसे देवियों को पूजने वाले देश में #बलात्कार की गन्दी मानसिकता कहाँ से आयी ?


आखिर क्या बात है कि जब प्राचीन भारत के #रामायण, #महाभारत आदि लगभग सभी #हिन्दू_ग्रंथ के उल्लेखों में अनेकों लड़ाईयाँ लड़ी और जीती गयीं, परन्तु विजेता सेना द्वारा किसी भी स्त्री का बलात्कार होने का उल्लेख नहीं है ?


तब आखिर ऐसा क्या हो गया ?.. कि आज के आधुनिक भारत में बलात्कार रोज की सामान्य बात बन कर रह गयी है ??


श्री #राम ने #लंका पर विजय प्राप्त की पर न ही उन्होंने और न उनकी सेना ने पराजित लंका की स्त्रियों को हाथ लगाया।


महाभारत में #पांडवों की जीत हुयी लाखों की संख्या में योद्धा मारे गए। पर किसी भी #पांडव सैनिक ने #कौरव सेना की विधवा स्त्रियों को हाथ तक न लगाया ।


अब आते हैं ईसापूर्व इतिहास में - 


220-175 ईसापूर्व में यूनान के शासक "डेमेट्रियस प्रथम" ने भारत पर आक्रमण किया। 183 ईसापूर्व के लगभग उसने पंजाब को जीतकर साकल को अपनी राजधानी बनाया और पंजाब सहित सिन्ध पर भी राज किया। लेकिन उसके पूरे समयकाल में बलात्कार का कोई जिक्र नहीं।


इसके बाद "युक्रेटीदस" भी भारत की ओर बढ़ा और कुछ भागों को जीतकर उसने "तक्षशिला" को अपनी राजधानी बनाया। बलात्कार का कोई जिक्र नहीं।


डेमेट्रियस के वंश के मीनेंडर (ईपू 160-120) ने नौवें बौद्ध शासक "वृहद्रथ" को पराजित कर सिन्धु के पार पंजाब और स्वात घाटी से लेकर मथुरा तक राज किया परन्तु उसके शासनकाल में भी बलात्कार का कोई उल्लेख नहीं मिलता।


सिकंदर ने भारत पर लगभग 326-327 ई .पू आक्रमण किया जिसमें हजारों सैनिक मारे गए लेकिन यहां भी परस्त्रीहरण का कोई उदाहरण नहीं मिलता।


इसके बाद शकों ने भारत पर आक्रमण किया (जिन्होंने ई.78 से शक संवत शुरू किया था)। सिन्ध नदी के तट पर स्थित मीननगर को उन्होंने अपनी राजधानी बनाकर गुजरात क्षेत्र के सौराष्ट्र , अवंतिका, उज्जयिनी,गंधार,सिन्ध,मथुरा समेत महाराष्ट्र के बहुत बड़े भू भाग पर 130 ईस्वी से 188 ईस्वी तक शासन किया। परन्तु इनके राज्य में भी बलात्कार का कोई उल्लेख नहीं।


इसके बाद #तिब्बत के "युइशि" (यूची) कबीले की लड़ाकू प्रजाति "कुषाणों" ने #काबुल और #कंधार पर अपना अधिकार कायम कर लिया। जिसमें "कनिष्क प्रथम" (127-140ई.) नाम का सबसे शक्तिशाली सम्राट हुआ।जिसका राज्य कश्मीर से उत्तरी सिन्ध तथा पेशावर से सारनाथ के आगे तक फैला था। कुषाणों ने भी भारत पर लम्बे समय तक विभिन्न क्षेत्रों में शासन किया। परन्तु इतिहास में कहीं नहीं लिखा कि इन्होंने भारतीय स्त्रियों का बलात्कार किया हो ।

इसके बाद #अफगानिस्तान से होते हुए भारत तक आये हूणों ने 520 AD के समयकाल में भारत पर अधिसंख्य बड़े आक्रमण किए और यहाँ पर राज भी किया। ये क्रूर तो थे परन्तु #बलात्कारी होने का कलंक इन पर भी नहीं लगा।

इन सबके अलावा भारतीय इतिहास के हजारों साल के इतिहास में और भी कई आक्रमणकारी आये जिन्होंने भारत में बहुत मार काट मचाई जैसे #नेपालवंशी शक्य आदि। पर बलात्कार शब्द भारत में तब तक शायद ही किसी को पता था।


अब आते हैं #मध्यकालीन_भारत में -


जहाँ से शुरू होता है #इस्लामी आक्रमण -


और यहीं से शुरू होता है भारत में बलात्कार का प्रचलन !!


सबसे पहले 711 ईस्वी में "मुहम्मद बिन कासिम" ने सिंध पर हमला करके राजा दाहिर को हराने के बाद उसकी दोनों बेटियों को "यौनदासियों" के रूप में "खलीफा" को तोहफे में दे दिया। 


तब शायद भारत की स्त्रियों का पहली बार बलात्कार जैसे कुकर्म से सामना हुआ जिसमें हारे हुए राजा की बेटियों और साधारण भारतीय स्त्रियों का जीती हुयी इस्लामी सेना द्वारा बुरी तरह से बलात्कार और अपहरण किया गया ।


फिर आया 1001 इस्वी में "गजनवी"। इसके बारे में ये कहा जाता है कि इसने इस्लाम को फ़ैलाने के उद्देश्य से ही आक्रमण किया था। 


सोमनाथ के मंदिर को तोड़ने के बाद इसकी सेना ने हजारों "काफिर" औरतों का बलात्कार किया फिर उनको अफगानिस्तान ले जाकर "बाजारों में बोलियाँ" लगाकर "जानवरों" की तरह "बेच" दिया ।


फिर "गौरी" ने 1192 में "पृथ्वीराज चौहान" को हराने के बाद भारत में "इस्लाम का प्रकाश" फैलाने के लिए "हजारों काफिरों" को मौत के घाट उतार दिया और उसकी "फौज" ने "अनगिनत हिन्दू स्त्रियों" के साथ बलात्कार कर उनका "धर्म-परिवर्तन" करवाया।


ये #विदेशी_मुस्लिम अपने साथ औरतों को लेकर नहीं आए थे।


मुहम्मद बिन कासिम से लेकर सुबुक्तगीन, बख्तियार खिलजी, जूना खाँ उर्फ अलाउद्दीन खिलजी, फिरोजशाह, तैमूरलंग, आरामशाह, इल्तुतमिश, रुकुनुद्दीन फिरोजशाह, मुइजुद्दीन बहरामशाह, अलाउद्दीन मसूद, नसीरुद्दीन महमूद, गयासुद्दीन बलबन, जलालुद्दीन खिलजी, शिहाबुद्दीन उमर खिलजी, कुतुबुद्दीन मुबारक खिलजी, नसरत शाह तुगलक, महमूद तुगलक, खिज्र खां, मुबारक शाह, मुहम्मद शाह,अलाउद्दीन आलम शाह, बहलोल लोदी, सिकंदर शाह लोदी, बाबर, नूरुद्दीन सलीम जहांगीर, और अपने हरम में 8000 रखैलें रखने वाला तथाकथित lover-boy शाहजहाँ।


इसके आगे अपने ही दरबारियों और कमजोर मुसलमानों की औरतों से अय्याशी करने के लिए "मीना बाजार" लगवाने वाला "जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर"।


मुहीउद्दीन मुहम्मद से लेकर औरंगजेब तक बलात्कारियों की ये सूची बहुत लम्बी है। जिनकी फौजों ने हारे हुए राज्य की लाखों "काफिर महिलाओं" "(माल-ए-गनीमत)" का बेरहमी से बलात्कार किया और "जेहाद के इनाम" के तौर पर कभी वस्तुओं की तरह "सिपहसालारों" में बांटा तो कभी बाजारों में "जानवरों की तरह उनकी कीमत लगायी" गई। 


ये असहाय और बेबस महिलाएं "हरमों" से लेकर "वेश्यालयों" तक में पहुँची। इनकी संतानें भी हुईं पर वो अपने मूलधर्म में कभी वापस नहीं पहुँच पायीं।


एकबार फिर से बता दूँ कि मुस्लिम "आक्रमणकारी" अपने साथ "औरतों" को लेकर नहीं आए थे।


वास्तव में मध्यकालीन भारत में मुगलों द्वारा "पराजित काफिर स्त्रियों का बलात्कार" करना एक आम बात थी क्योंकि वो इसे "अपनी जीत" या "#जिहाद का इनाम" (माल-ए-गनीमत) मानते थे। 

केवल यही नहीं इन सुल्तानों द्वारा किये अत्याचारों और असंख्य बलात्कारों के बारे में आज के किसी #इतिहासकार ने नहीं लिखा। 


बल्कि खुद इन्हीं सुल्तानों के साथ रहने वाले लेखकों ने बड़े ही शान से अपनी कलम चलायीं और बड़े घमण्ड से अपने मालिकों द्वारा काफिरों को सबक सिखाने का विस्तृत वर्णन किया।


#गूगल के कुछ लिंक्स पर क्लिक करके हिन्दुओं और हिन्दू महिलाओं पर हुए "दिल दहला" देने वाले अत्याचारों के बारे में विस्तार से जान पाएँगे। वो भी पूरे सबूतों के साथ।


इनके सैकड़ों वर्षों के खूनी शासनकाल में भारत की हिन्दू जनता अपनी महिलाओं का सम्मान बचाने के लिए देश के एक कोने से दूसरे कोने तक भागती और बसती रहीं। 


इन #मुस्लिम_बलात्कारियों से सम्मान-रक्षा के लिए हजारों की संख्या में #हिन्दू_महिलाओं ने स्वयं को जौहर की ज्वाला में जलाकर भस्म कर लिया। 


ठीक इसी काल में कभी स्वच्छंद विचरण करने वाली प्रकृति-पुत्री #भारतवर्ष की हिन्दू महिलाओं को भी मुस्लिम सैनिकों की दृष्टि से बचाने के लिए #पर्दा_प्रथा की शुरूआत हुई।


महिलाओं पर अत्याचार और बलात्कार का इतना घिनौना स्वरूप तो 17वीं शताब्दी के प्रारंभ से लेकर 1947 तक अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनकाल में भी नहीं दिखीं। अंग्रेजों ने भारत को बहुत लूटा परन्तु बलात्कारियों में वे नहीं गिने जाते। 


1946 में #मुहम्मद_अली_जिन्ना के #डायरेक्टर_एक्शन_प्लान, 1947 विभाजन के दंगों से लेकर 1971 के #बांग्लादेश_मुक्ति_संग्राम तक तो लाखों काफिर महिलाओं का बलात्कार हुआ या फिर उनका अपहरण हो गया। फिर वो कभी नहीं मिलीं।

     नवंबर 1947 मे मेरे #मीरपुर पर मुसलमानों ने हमला कर #हिन्दूओ व #सिक्खो का कत्लेआम करने के बाद  10 साल से  40 साल की औरतों को बंदी बनाकर पाकिस्तान ले जाकर  #नीलाम किया गया ।


इस दौरान स्थिती ऐसी हो गयी थी कि "पाकिस्तान समर्थित मुस्लिम बहुल इलाकों" से "बलात्कार" किये बिना एक भी "काफिर स्त्री" वहां से वापस नहीं आ सकती थी।


जो स्त्रियाँ वहां से जिन्दा वापस आ भी गयीं वो अपनी जांच करवाने से डरती थी।


जब #डॉक्टर पूछते क्यों तब ज्यादातर महिलाओं का एक ही जवाब होता था कि "हमपर कितने लोगों ने बलात्कार किये हैं ये हमें भी पता नहीं"।


#विभाजन के समय पाकिस्तान के कई स्थानों में सड़कों पर काफिर स्त्रियों की "नग्न यात्राएं (धिंड) "निकाली गयीं, "बाज़ार सजाकर उनकी #बोलियाँ लगायी गयीं" अर्थात हमारी देवियां और इस दुर्दांत कौम के लिए कमोडिटी !!


और 10 लाख से ज्यादा की संख्या में उनको #दासियों की तरह खरीदा बेचा गया।


20 लाख से ज्यादा महिलाओं को जबरन मुस्लिम बना कर अपने घरों में रखा गया। (देखें फिल्म "पिंजर" और पढ़ें पूरा सच्चा इतिहास गूगल पर)।


इस विभाजन के दौर में हिन्दुओं को मारने वाले सबके सब विदेशी नहीं थे। इन्हें मारने वाले स्थानीय मुस्लिम भी थे। 


वे समूहों में कत्ल से पहले हिन्दुओं के अंग-भंग करना, आंखें निकालना, नाखुन खींचना, बाल नोचना, जिंदा जलाना, चमड़ी खींचना खासकर महिलाओं का बलात्कार करने के बाद उनके "स्तनों को काटकर" तड़पा-तड़पा कर मारना आम बात थी।


अंत में #कश्मीर की बात -


19 जनवरी 1990 -


सारे #कश्मीरी_पंडितों के घर के दरवाजों पर नोट लगा दिया जिसमें लिखा था - "या तो मुस्लिम बन जाओ या मरने के लिए तैयार हो जाओ या फिर कश्मीर छोड़कर भाग जाओ लेकिन.. अपनी औरतों को यहीं छोड़कर "। 


लखनऊ में विस्थापित जीवन जी रहे कश्मीरी पण्डित संजय बहादुर उस मंजर को याद करते हुए आज भी सिहर जाते हैं।वह कहते हैं कि "मस्जिदों के लाउडस्पीकर" लगातार तीन दिन तक यही आवाज दे रहे थे कि यहां क्या चलेगा, "निजाम-ए-मुस्तफा", 'आजादी का मतलब क्या "ला इलाहा इलल्लाह", 'कश्मीर में अगर रहना है, "अल्लाह-ओ-अकबर" कहना है।


और 'असि गच्ची पाकिस्तान, बताओ "रोअस ते बतानेव सान" जिसका मतलब था कि हमें यहां अपना पाकिस्तान बनाना है, कश्मीरी पंडितों के बिना मगर कश्मीरी पंडित महिलाओं के साथ।


सदियों का #भाईचारा कुछ ही समय में समाप्त हो गया जहाँ पंडितों से ही तालीम हासिल किए लोग उनकी ही महिलाओं की अस्मत लूटने को तैयार हो गए थे।


सारे कश्मीर की मस्जिदों में एक टेप चलाया गया। जिसमें मुस्लिमों को कहा गया की वो हिन्दुओं को कश्मीर से निकाल बाहर करें। उसके बाद कश्मीरी मुस्लिम सड़कों पर उतर आये। 


उन्होंने कश्मीरी पंडितों के घरों को जला दिया, कश्मीर पंडित महिलाओ का बलात्कार करके, फिर उनकी हत्या करके उनके "नग्न शरीर को पेड़ पर लटका दिया गया"। 


कुछ महिलाओं को बलात्कार कर जिन्दा जला दिया गया और बाकियों को लोहे के गरम सलाखों से दाग-दाग कर मार दिया गया। 


कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्टजो श्रीनगर के सौर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में काम करती थी, का सामूहिक बलात्कार किया गया और फिर हाथों और लातों से पीट-पीट कर उसकी हत्या कर दी गयी।


कुछ वर्षों से कुछ महीनों तक की उम्र के बच्चों को उनकी माँओं के सामने स्टील के तार से पेड़ों पर लटका फाँसी दे कर मार दिया गया।


कश्मीरी #काफिर महिलाएँ पहाड़ों की गहरी घाटियों और भागने का रास्ता न मिलने पर ऊंचे मकानों की छतों से कूद कूद कर जान देने लगी।


लेखक #राहुल_पंडिता उस समय 14 वर्ष के थे। बाहर माहौल ख़राब था। मस्जिदों से उनके ख़िलाफ़ नारे लग रहे थे। पीढ़ियों से उनके भाईचारे से रह रहे पड़ोसी ही कह रहे थे, 'मुसलमान बनकर आज़ादी की लड़ाई में शामिल हो या वादी छोड़कर भागो'।


राहुल पंडिता के परिवार ने तीन महीने इस उम्मीद में काटे कि शायद माहौल सुधर जाए। राहुल आगे कहते हैं, "कुछ लड़के जिनके साथ हम बचपन से क्रिकेट खेला करते थे वही हमारे घर के बाहर पंडितों के ख़ाली घरों को आपस में बांटने की बातें कर रहे थे और हमारी लड़कियों के बारे में गंदी बातें कह रहे थे। ये बातें मेरे ज़हन में अब भी ताज़ा हैं।


1989 में कश्मीर में जिहाद के लिए गठित जमात-ए-इस्लामी संगठन का नारा था- 'हम सब एक, तुम भागो या मरो'। 


घाटी में कई कश्मीरी पंडितों की बस्तियों में सामूहिक बलात्कार और लड़कियों के अपहरण किए गए। हालात और बदतर हो गए थे।


कुल मिलाकर हजारों की संख्या में काफिर महिलाओं का बलात्कार किया गया.. पच्चास-पच्चास मुस्लिमों द्वारा..

उनके पिताओं.. उनके भाइयों.. पतियों के सामने !!


आज आप जिस तरह दाँत निकालकर धरती के जन्नत कश्मीर घूमकर मजे लेने जाते हैं और वहाँ के लोगों को रोजगार देने जाते हैं। उसी कश्मीर की हसीन वादियों में आज भी सैकड़ों कश्मीरी हिन्दू बेटियों की बेबस कराहें गूंजती हैं, जिन्हें केवल इसलिए नोच-नोच कर खा लिया गया कि वे हिन्दू थीं।


घर, बाजार, हाट, मैदान से लेकर उन खूबसूरत वादियों में न जाने कितनी जुल्मों की दास्तानें दफन हैं जो आज तक अनकही हैं। घाटी के खाली, जले मकान यह चीख-चीख के बताते हैं कि रातों-रात दुनिया जल जाने का मतलब कोई हमसे पूछे कि धूप-दीप और हवन से सुवासित होने वाले दीवारो-दर आज बकरीद के खून के छींटों से दगे पड़े हैं। झेलम और वितस्ता का बहता हुआ पानी उन रातों की वहशियत के गवाह हैं जिसने कभी न खत्म होने वाले दाग इंसानियत के दिल पर दिए।


लखनऊ में विस्थापित जीवन जी रहे कश्मीरी पंडित रविन्द्र कोत्रू के चेहरे पर अविश्वास की सैकड़ों लकीरें पीड़ा की शक्ल में उभरती हुईं बयान करती हैं कि यदि आतंक के उन दिनों में घाटी की मुस्लिम आबादी ने उनका साथ दिया होता जब उन्हें वहां से खदेड़ा जा रहा था, उनके साथ कत्लेआम हो रहा था तो किसी भी आतंकवादी में ये हिम्मत नहीं होती कि वह किसी कश्मीरी पंडित को चोट पहुंचाने की सोच पाता लेकिन तब उन्होंने हमारा साथ देने के बजाय कट्टरपंथियों को अपने कंधों पर बिठाया और उनके ही #लश्कर में शामिल हो दसियों साल से "गंगा-जमुनी तहजीब" के नशे में डूबे हिन्दुओं को जी भर-भर लूटा !!


अभी हाल में ही आपलोगों ने टीवी पर "अबू बकर अल बगदादी" के जेहादियों को काफिर "यजीदी महिलाओं" को रस्सियों से बाँधकर कौड़ियों के भाव बेचते देखा होगा।


पाकिस्तान में बकरियों की तरह खुलेआम हिन्दू लड़कियों का अपहरण कर सार्वजनिक रूप से मौलवियों की टीम द्वारा धर्मपरिवर्तन कर निकाह कराते देखा होगा। 


#बांग्लादेश से भारत भागकर आये हिन्दुओं के मुँह से महिलाओं के बलात्कार की हजारों मार्मिक घटनाएँ सुनी होंगी। 


यहाँ तक कि म्यांमार में भी एक काफिर बौद्ध महिला के बलात्कार और हत्या के बाद शुरू हुई हिंसा के भीषण दौर को देखा होगा।केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में आदम हवस से बजबजाती इस घिनौनी सोच ने मोरक्को से ले कर हिन्दुस्तान तक सभी देशों पर आक्रमण कर वहाँ के निवासियों को धर्मान्तरित किया, संपत्तियों को लूटा तथा इन देशों में पहले से फल फूल रही हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता का विनाश कर दिया। 


परन्तु पूरी दुनियाँ में इसकी सबसे ज्यादा सजा महिलाओं को ही भुगतनी पड़ी...

बलात्कार के रूप में ।


आज सैकड़ों साल की गुलामी के बाद और नराधमों के अनवरत कुसंग के चलते समय बीतने के साथ धीरे-धीरे ये बलात्कार करने की मानसिक बीमारी भारत के पुरुषों में भी फैलने लगी।


जिस देश में कभी नारी जाति शासन करती थीं, सार्वजनिक रूप से शास्त्रार्थ करती थीं, स्वयंवर द्वारा स्वयं अपना वर चुनती थीं, जिन्हें भारत में देवियों के रूप में श्रद्धा से पूजा जाता था आज उसी देश में छोटी-छोटी.. दुधमुंही.. देवी जैसी बच्चियों तक का बलात्कार होने लगा और आज इस मानसिक रोग का ये भयानक रूप हमें देखने को मिल रहा है। शेयर जरूर करें!!


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🙏🚩#जय_श्री_राम🚩🙏

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लेख जरूर पढ़ें... स्वयं को हिन्दू कहते हो तो

 लेख जरूर पढ़ें...

स्वयं को हिन्दू कहते हो तो,

🚩🚩🙏🙏🚩🚩


90 करोड़ हिन्दूओ का झुण्ड 25 करोड़ असुरों से डर रहा है और अत्याचार सहन कर रहा है....

1 बेटा धर्म के लिए तैयार करो हिन्दूओ...

.स्वयं उसको धर्मादेश देकर आसपास रहने वाले असुर का वध करवाइए

 उसे अपने हाथों से चंदन तिलक व केसरिया साफा पहनाकर ढ़ोल थाली, गाजे बाजे के साथ स्वागत करते हुए जेल भेजिए....

संविधान लचर है, जमानत मिल जाएगी देर सवेर.....

जेल में भी रहेगा तो गर्व कीजिएगा कि तुम्हारी कोख ने एक सिंह,एक शेर को जन्म दिया है....


जब तक युवा पीढ़ी अपने धर्म की रक्षार्थ एक अतिरिक्त सन्तान पैदा करने की ओर नहीं तैयार होगी तब तक सनातन संस्कृति को सुरक्षित रखने के उपाय करने के लिए सरकार पर निर्भर रहना होगा.....

या तो स्वयं धर्मरक्षक सन्तान तैयार करो, या चुपचाप हिन्दू नेतृत्व को अपना काम उनके तरीके से करने दो.....


क्योंकि लोकतांत्रिक व्यवस्था के देश में आप जो सोच रहे हो कि ये कानून बना दो, उसे फांसी दे दो, उसे जान से मार दो, असूरों को समाप्त करने के काम तत्काल प्रभाव से कर दो....

यह सब कुछ लोकतांत्रिक व्यवस्था के देश में तत्काल प्रभाव से सम्भव है ही नहीं हिन्दूओ....


क्योंकि 25 करोड़ असूरों को 25 करोड़ राजनीतिक हिन्दूओ का संरक्षण प्राप्त हो गया है राजनीतिक दलों के कारण...

उनके हितों की रक्षा के लिए उनसे ज्यादा उनके पक्ष में विपक्षी दलों के हिन्दू खड़े हो जाते हैं संसद भवन में....

यहां तक कि सड़कों पर भी उनकी सुरक्षा संविधान के कारण हिन्दूओ की पुलिस व सेना के द्वारा निर्धारित कर दी जाती है...


ये व्यवस्था जानबूझकर अंग्रेजों ने मुसलमानों के साथ मिलकर 1947 में हिन्दूओ पर थोपी थी.....

ताकि हिन्दूओ से भारत में रह रहे कन्वर्ट मुसलमानों व कन्वर्ट ईसाइयों को व हिन्दुविरोधी 5-7करोड़(25 करोड़ दलितों में से)दलितों को संविधान द्वारा निर्धारित कानूनी प्रक्रिया से सुरक्षा व्यवस्था प्रदान किया जाता रहे.....

संविधान कन्वर्ट मुसलमानों, कन्वर्ट ईसाइयों व पाकिस्तान को वोट डालने वाले 7%दलितों के हितों को ध्यान में रखकर तैयार करवाया गया था, क्योंकि तत्कालीन दौर में भारत में कन्वर्ट मुसलमानों का नेतृत्व मोहनदास करमचंद गांधी कर रहा था, कन्वर्ट ईसाइयों का नेतृत्व जवाहर लाल नेहरू कर रहा था, और हिन्दुविरोधी 7%दलितों का नेतृत्व अम्बेडकर कर रहे थे...

इन्होंने जिन्ना,लार्ड माउंटबेटन व शेख मुजीबुर्रहमान के साथ मिलकर हिन्दूओ को काबू में रखने के कानून लिखवाए...

और उसे संविधान का नाम दिया.....


संविधान हिन्दूओ का है ही नहीं हिन्दूओ........


अगर इस संविधान का इस्तेमाल करना चाहते हो तो अत्याचारों के विरुद्ध पहला हमला स्वयं की तैयार की गई सुरक्षा धर्मरक्षक योद्धाओं की ओर से करना प्रारंभ करो...

असूरों को मारकाट कर उत्सव मनाओ....

गाजे बाजे के साथ, ढ़ोल थाली बजाकर उन धर्मरक्षक योद्धाओं को जेल भेजने का कार्यक्रम करो....

उनके लिए वकील खड़े करो, उनकी जमानतें करवाओ और उनके परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करो...


धर्म की रक्षा के लिए इकोसिस्टम बनाओ हिन्दूओ......

तभी असूरों को काबू में रख पाओगे.....

असूरों ने राजनीतिक दलों के साथ मिलकर अपना इकोसिस्टम1947 में ही बना लिया था और उसके हिसाब से ही असुर पूरे देश में हिन्दूओ पर हमले कर रहे हैं और उनके जेहादियों को वकील मुहैया कराने के बाद जिहादी के परिवार को आर्थिक सहायता व संरक्षण देने का काम करते हैं...


हिम्मत है तो बनाओ अपना क्षेत्रीय इकोसिस्टम....

हिम्मत नहीं है तो चुपचाप अपने काम धंधे करो, बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाओ, पैसा कमाओ, विदेश घूमो, मंदिरों में कथापण्डालों में ठुमके लगाओ, बहन बेटियों को फूहड़ता सिखाओ, उन्हें मॉर्डन बनाओ, कोठी बंगले बनाओ, महंगी गाडियाँ खरीदो,खाओ पीओ और मौज उड़ाओ....


मरना तो तय है मौत से मरो या असूरों के हाथ से.....

बहन बेटियों को असुरों की मेहरबानी पर छोड़ दो, जब तक मन नहीं करेगा असूरों का, तब तक तुम्हारी बहन बेटियां मेकअप करेगी, अधंनग कपड़े पहनेगी, सरकारी नौकरी करेगी, प्राइवेट नौकरी करेगी, स्कूल कालेज जाएगी और जब असूरों का मन करेगा वो उसे तुम्हारे घरों में से, स्कूलों में से, गली मोहल्ले में से, कालेज में से, अस्पताल में से, पब्लिक पार्कों में से, सड़कों पर से, कहीं से भी उठा ले जाएगा.....

5-10असुर मिलकर बारी बारी सामुहिक बलात्कार करके अपनी हवस की भूख मिटायेंगे और फिर नोच नोच कर उसका बदन चाटेंगे, चूमेंगे और दांतों से काटेंगे... जब सब असुर मन भर कर उसका बलात्कार कर कर के थक चुके होंगे तो उसको या तो बेहोशी की हालत में ही जिंदा जला देंगे या टुकड़े टुकड़े करके सिर कहीं और धड़ कहीं फेंक देंगे या तुम्हारी बहन बेटियों की न्नगी लाश किसी नाले में या सड़क किनारे फेंक कर अपने प्रॉफिट को सबाब देने चले जाएंगे....

पुलिस गिरफ्तार करने के बाद कोर्ट में जज साहब के सामने ले जाएगी और जज साहब उन्हें जेल भेज देंगे....

तारीख पर तारीख दी जाती रहेगी और असुर संविधान के द्वारा निर्धारित व्यवस्था से बरसों तक सरकारी खर्च पर जीवित रहते रहेंगे ..जेल में उसे कोई हिन्दू छू भी नहीं सकेगा....

जज साहब (अपने परिवार की असूरों से सुरक्षा के डर से)की मेहरबानी से वो अधिक से अधिक उम्रकैद की सजा पायेगा....

जज साहब उसे फाँसी दे ही नहीं सकते... क्योंकि जज साहब को भी डर लगता है कि असूरों का इकोसिस्टम जज साहब की बेटी के साथ भी सामुहिक बलात्कार करवा सकता है....


वकील साहब को भी अपनी बहन बेटी की चिंता है ठीक उसी प्रकार बड़े पुलिस अधिकारियों व नेताओं को भी अपनी बहन बेटियों की असूरों से बचाए रखने की चिंता लगी हुई है...


हिन्दूओ तुम्हारी रक्षा के लिए पुरखों ने साधु संतों व सन्यासियों को भी जिम्मेदारी सौंपी थी...

परंतु वर्तमान समय के साधु संत, मठाधीश, महंत व शुक्राचार्य व शंकराचार्य सब के सब राजनीतिक दलों के संरक्षण के सहारे ही अपने अपने सिंहासन पर बैठे हैं क्योंकि अकूत धन अर्जित कर लिया है इन तथाकथित भगवाधरियों ने भी, फाइव स्टार आश्रम व्यवस्था में लीन ये योगी से भोगी बन चुके हैं इन्हें भी राजनीतिक दलों के द्वारा ED,CBI,इनकम टैक्स विभाग की कार्यवाही व चेलियों के साथ रंगरेलियां मनाते सबूतों के सार्वजनिक होने के डर के कारण बिल्कुल मौन धारण कर चुके हैं....


वर्तमान समय के हिन्दूओ.....

तुम्हारा रक्षक कोई नहीं है......

सब कहीं न कहीं से दबाव में आये हुए हैं.....

भारत में जाग्रत हिन्दूओ की संख्या 30 से 50 करोड़ के बीच में है वर्तमान समय में.....

जबकि हिन्दुविरोधी ताकतों की संख्या 70 से 90 करोड़ के लगभग है....

हरेक चुनावों में इनमें 10-20करोड़ वोटर इधर उधर होते रहते हैं....

राजनीतिक दलों का एक बड़ा वोटबैंक हिन्दुविरोधी ताक़त का है इस कारण कोई भी राष्ट्रीय या क्षेत्रीय दल खुलकर हिन्दूओ के लिए तैयार नहीं हो पाता है......


BJP में भी 90%नेता सेकुलर हैं और सेकुलर गिरोह के लिए काम करते रहते हैं....

10% BJP नेता ही मोदी योगी के साथ खड़े हैं हिंदुहितकारी बनकर....

इतने से राजनीतिक हिन्दूओ से इस संविधान का बाल भी बाँका करना तुम हिन्दू जितना सोचते हो उतना आसान नहीं है हिन्दूओ......


सब ओर से असुरक्षित हो हिन्दूओ तुम वर्तमान समय में....

कैंडल मार्च निकालने की मानसिकता त्यागो,

वी वान्ट जस्टिस का चुतियापा त्यागो....


न्याय मांगने से मिल जाये,ऐसा संविधान बनाया ही नहीं गया था1947 में.....

राम व कृष्ण की तरह न्याय करो हिन्दूओ.....

राम व कृष्ण की तरह अपने आसपास की धर्म शक्तियों को संगठित करते हुए धर्मयुद्ध की तैयारियां शुरू करो....

अधर्मी तो चारों युगों में बलशाली ही रहा है......

रावण सेना सहित राम व वानरदल से अधिक महाशक्तिशाली था कि नहीं?

दुर्योधन कौरवों सहित व कृष्ण की नारायणी सेना सहित महाशक्तिशाली था कि नहीं?


फिर भी राम ने वानरों की अगुवाई में, और कृष्ण ने पांडवों की अगुवाई में धर्मयुद्ध लड़ा था कि नहीं लड़ा था?


विजय किसकी हुई.... यह हिन्दूओ को जरूर ज्ञात है....

धर्मयुद्ध में मानवक्षति उठानी पड़ती है हिन्दूओ....

पांडवों ने भी उठाई थी.....


मानवक्षति के लिए तैयार हो जाओ हिन्दूओ.....

धर्म की रक्षा के लिए एक सन्तान तैयार करो हिन्दूओ......


अगर नहीं कर सकते हो तो चुपचाप मोदी-योगी को उनका काम करने दो.....


🖋️...................

हिन्दूधर्मध्वजावाहक

🚩🚩🙏🙏🚩🚩

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